दिखाने का आटा!
Updated at : 03 Jul 2017 6:23 AM (IST)
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आलोक पुराणिक वरिष्ठ व्यंग्यकार टैक्स और मौत में क्या फर्क है. मौत कभी नहीं भी आती. टैक्स के बारे में यह नहीं कह सकते, उनका आना एकदम पक्का है. जीएसटी आ गया, समझ में ना आया, तो कोई बात नहीं. जीएसटी के भुगतान से पहले ऐसी कोई शर्त ना लगायी गयी है कि आप इसे […]
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आलोक पुराणिक
वरिष्ठ व्यंग्यकार
टैक्स और मौत में क्या फर्क है. मौत कभी नहीं भी आती. टैक्स के बारे में यह नहीं कह सकते, उनका आना एकदम पक्का है. जीएसटी आ गया, समझ में ना आया, तो कोई बात नहीं. जीएसटी के भुगतान से पहले ऐसी कोई शर्त ना लगायी गयी है कि आप इसे समझें.
बिना समझे भी भुगतान करें, कोई चालान ना होगा. कुल मिला कर जीएसटी सिंगल विंडो सफाई है, पहले राज्य सरकार अलग साफ करती थी जेब, केंद्र सरकार अलग साफ करती थी. अब सिंगल विंडो सफाई हो लेगी, बंटवारा बाद में होता रहेगा. यूं समझ लें कि जीएसटी एक वड्डे सिंगल चाकू से कटाई है. एक चाकू पीछे की जेब काटता था, दूसरा चाकू आगे की जेब काटता था. एक बड़ा वाला आयेगा, सब साफ करके चला जायेगा.
मौत और टैक्स में क्या समानता है. समानता यह है कि समझो या ना समझो, आना तय है. पब्लिक समझदार है, पब्लिक जो सरकार चुनती है, वह पब्लिक से ज्यादा समझदार है. सरकार को पता है कि पब्लिक ब्रांड पर धुआंधार खर्च कर देती है. रोलेक्स ब्रांड की असली घड़ी जो पांच लाख की है, पब्लिक पंद्रह हजार का उसका नकली वर्जन खरीद लेती है और यह पता होते हुए खरीदती है कि नकली है.
ब्रांड के नाम पर पब्लिक की जेब खाली करायी जा सकती है. ब्रांडेड आटे पर जीएसटी पांच प्रतिशत है, अनब्रांडेड आटे पर कोई जीएसटी नहीं. पर ब्रांड सिर्फ आइटम नहीं होता, स्टेटस होता है. फोन सिर्फ फोन नहीं होता, एप्पल होता या चाइनीज होता है. होशियार लोग यूं कर सकते हैं कि खाने का आटा और दिखाने का आटा और. एक बार ब्रांडेड आटे की बोरी लाकर घर के बाहर टांग लें, फिर चाहें तो लगातार अनब्रांडेड आटा खायें.
आटा सिर्फ खाने के काम नहीं आता, जैसे फोन सिर्फ बात करने के काम नहीं आता. दिखाना जरूरी है.
90 रुपये के टिकट में सिंगल स्क्रीन में सिनेमा देखा जाये, तो जीएसटी 18 परसेंट, शापिंग माल के सिनेमा हाल में फिल्म देखेंगे, तो जीएसटी 28 परसेंट. फिल्म सिर्फ देखनी ना होती, लौट कर बताना भी होता है ना, किस माल में. तरकीब निकाली जा सकती है बंदा एक बार शापिंग माल में देख ले, उसका टिकट लाकर टांग दे ड्राइंग रूम में. फिर सावित्री सिनेमा सिंगल स्क्रीन 90 रुपये में देखे.
जूते इएमआइ पर मिल रहे हैं बहुत पहले से यानी जूते लाइये और 20000 रुपये की कीमत किश्तों में चुकाइये. अब जूते किश्त में मिलेंगे, पहले एक फिर एक, 500 से नीचे के फुटवियर पर 5 परसेंट, 500 से ज्यादा पर 18 परसेंट. 400 रुपये का एक जूता पकड़ लाओ, टैक्स पांच परसेंट, फिर बाद में दूसरा टैक्स सिर्फ पांच परसेंट. जूता किश्तों पर.
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