दलबदलू नेता जनता के वफादार नही

इन दिनों चुनाव प्रचार खूब जोरों पर है. सभी नेता अपना और अपना गुणगान कर रहे हैं. उपलब्धियां गिना रहे हैं. लेकिन आज जनता जागरूक हो गयी है, इसलिए मेरे ख्याल से नेताओं को इसकी कोई जरूरत नहीं. लेकिन एक और चीज देखने को मिल रही है, वो है इन नेताओं का एक पार्टी से […]
इन दिनों चुनाव प्रचार खूब जोरों पर है. सभी नेता अपना और अपना गुणगान कर रहे हैं. उपलब्धियां गिना रहे हैं. लेकिन आज जनता जागरूक हो गयी है, इसलिए मेरे ख्याल से नेताओं को इसकी कोई जरूरत नहीं. लेकिन एक और चीज देखने को मिल रही है, वो है इन नेताओं का एक पार्टी से दूसरी पार्टी में जाना. मतलब कई नेता अपनी पार्टी छोड़ दूसरी पार्टी में शामिल हो रहे हैं.
अखबार में पहले ही पेज पर पार्टी बदलनेवाले नेताओं की खबरें छपी होती हैं. अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या ऐसे नेता आम जनता और देश के लिए अच्छे साबित हो सकते हैं? आज अपनी पार्टी को छोड़ कर दूसरी पार्टी में शामिल हो रहे हैं. कल को अगर आम जनता की परिस्थिति ठीक नहीं होगी तो ये लोग बड़ी आसानी से हमें और हमारे देश को भी छोड़ कर भाग सकते हैं. ऐसे नेता लोकतंत्र के लिए भी खतरनाक हो सकते हैं.
पालुराम हेंब्रम, सालगाझारी
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