एक साधक, एक संकल्प, एक भारत: नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में गढ़ता नया भारत
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गोल घेरे में डॉ. संजय मयूख की फोटो
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 76वें जन्मदिन और विश्वकर्मा जयंती के अवसर पर 17 सितंबर सृजन, संकल्प और राष्ट्रसेवा का विशेष प्रतीक बन जाता है. साधारण परिवार से देश के प्रधानमंत्री तक की उनकी यात्रा विकास, सुशासन, आत्मनिर्भरता और विकसित भारत के संकल्प से जुड़ी एक प्रेरक राजनीतिक यात्रा के रूप में देखी जाती है.
भारत के इतिहास में कुछ तिथियां ऐसी होती हैं, जो कैलेंडर के पन्नों पर दर्ज होकर भी केवल तारीख नहीं रहतीं, बल्कि देश की सामूहिक स्मृति, सांस्कृतिक चेतना और राष्ट्रीय गौरव की प्रतीक बन जाती हैं. 17 सितंबर ऐसी ही एक विशेष तिथि है. यह दिन सृजन और शिल्प के देवता भगवान विश्वकर्मा की जयंती का पावन अवसर है, तो इसी दिन स्वतंत्र भारत में जन्मे प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र दामोदरदास मोदी जी ने भी जन्म लिया, जिन्होंने आगे चलकर भारतीय राजनीति और शासन की दिशा को नई दृष्टि और नई परिभाषा दी.
एक ही तारीख पर सृजन की शक्ति और राष्ट्रसेवा की साधना का यह अद्भुत संगम 17 सितंबर को विशेष बना देता है. भगवान विश्वकर्मा जहां निर्माण और नवसृजन के प्रतीक हैं, वहीं नरेंद्र मोदी का जीवन इस बात की प्रेरक यात्रा है कि एक साधारण परिवार में जन्मा व्यक्ति अपने संकल्प, परिश्रम और राष्ट्रसेवा के बल पर देश के सर्वोच्च लोकतांत्रिक पद तक पहुंचकर करोड़ों भारतीयों के सपनों को नई दिशा दे सकता है. वह गुजरात मॉडल से लेकर न्यू इंडिया बनाने के सपने को साकार कर सकता है. यह उस संकल्प, साधना और सेवा-यात्रा को स्मरण करने का अवसर है, जिसने भारतीय राजनीति को नई दिशा दी है.
तपस्या से राष्ट्र निर्माण तक: नरेंद्र मोदी के 76 वर्षों की प्रेरक यात्रा
एक सामान्य परिवार में जन्म लेने वाला बालक जब राष्ट्रसेवा को अपने जीवन का ध्येय बना लेता है, तो उसकी व्यक्तिगत यात्रा धीरे-धीरे करोड़ों लोगों की सामूहिक आकांक्षाओं की यात्रा बन जाती है. आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जीवन के 76वें वर्ष में प्रवेश कर रहे हैं. लेकिन उनके व्यक्तित्व की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि उम्र के साथ उनकी ऊर्जा कम होने के बजाय उनका संकल्प और अधिक व्यापक होता गया है. वे लगातार कहते रहे हैं कि उनके लिए सत्ता पद नहीं, बल्कि सेवा का माध्यम है. शायद यही कारण है कि प्रधानमंत्री के रूप में एक दशक से अधिक समय पूरा करने के बाद भी उनके राजनीतिक जीवन का केंद्रीय शब्द आज भी “सेवा” ही है.
2001 में गुजरात के मुख्यमंत्री बनने के बाद उनके सामने एक चुनौतीपूर्ण राज्य था. लेकिन उन्होंने गुजरात में विकास, सुशासन, निवेश, आधारभूत ढांचे और प्रशासनिक सुधार को प्राथमिकता दी. “गुजरात मॉडल” की चर्चा देशभर में होने लगी. विकास को राजनीतिक विमर्श के केंद्र में लाने का यह प्रयोग आगे चलकर राष्ट्रीय राजनीति की दिशा बदलने वाला साबित हुआ. वर्ष 2014 में जब नरेंद्र मोदी जी ने प्रधानमंत्री पद की जिम्मेदारी संभाली, तब देश के सामने अनेक चुनौतियां थीं. आर्थिक विकास को गति देना, गरीबों तक सरकारी योजनाओं का लाभ पहुंचाना, आधारभूत ढांचे का विस्तार करना, भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाना, युवाओं के लिए अवसर पैदा करना और दुनिया में भारत की भूमिका को मजबूत करना—इन सभी मोर्चों पर एक साथ काम करने की आवश्यकता थी.
तब प्रधानमंत्री मोदी जी ने “सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास, सबका प्रयास” को शासन का मूल मंत्र बनाया. जनधन योजना के माध्यम से करोड़ों लोगों को बैंकिंग व्यवस्था से जोड़ना हो, उज्ज्वला योजना के माध्यम से गरीब महिलाओं को धुएं से मुक्ति दिलाना हो, स्वच्छ भारत अभियान के माध्यम से शौचालय निर्माण को जनांदोलन बनाना हो, प्रधानमंत्री आवास योजना के माध्यम से गरीबों को पक्की छत उपलब्ध करानी हो या आयुष्मान भारत के माध्यम से गरीब परिवारों को स्वास्थ्य सुरक्षा देना हो- इन योजनाओं ने सरकारी योजनाओं को कागज से निकालकर सामान्य नागरिक के जीवन से जोड़ने का काम किया.
प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि ने छोटे और सीमांत किसानों को प्रत्यक्ष आर्थिक सहायता का एक नया माध्यम दिया. करोड़ों किसानों के खातों में सीधे राशि पहुंचना केवल आर्थिक सहायता नहीं, बल्कि “सरकार आपके साथ है” का भरोसा भी बना.
गुजरात मॉडल से लेकर न्यू इंडिया बनाने तक उठाए कई ऐतिहासिक कदम
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भगवान विश्वकर्मा की सृजनशीलता और शिल्प परंपरा से प्रेरणा लेते हुए आधुनिक भारत में निर्माण, कौशल और नवाचार की उस विरासत को नए आयाम देने का प्रयास किया है. बीते एक दशक में उनके नेतृत्व में देश ने विकास की ऐसी व्यापक यात्रा देखी है, जिसमें प्राचीन सृजन-परंपरा और आधुनिक तकनीक का अद्भुत संगम दिखाई देता है.
भगवान विश्वकर्मा जहां अपनी कला और कौशल से भव्य निर्माण के प्रतीक बने, वहीं आज का भारत उसी आत्मविश्वास के साथ विश्वस्तरीय बुनियादी ढांचे का निर्माण कर रहा है. मोदी सरकार ने इंफ्रास्ट्रक्चर को विकास की आधारशिला मानते हुए सड़क, रेलवे, बंदरगाह, हवाई अड्डे, पुल और ऊर्जा परियोजनाओं में बड़े पैमाने पर पूंजी निवेश किया है. यह निवेश केवल ईंट-पत्थर और कंक्रीट का विस्तार नहीं, बल्कि विकसित भारत के उस भविष्य की नींव है, जिसकी कल्पना आज देश कर रहा है.
पीएम मोदी की प्रेरणा से दुनिया का सबसे लंबा रेलवे प्लेटफॉर्म, सबसे ऊंची प्रतिमा, सबसे लंबी हाईवे टनल, सबसे ऊंचा रेल ब्रिज, सबसे बड़ा क्रिकेट स्टेडियम, सबसे बड़ा सोलर पावर प्लांट, दुनिया का सबसे बड़ा रिन्यूएबल एनर्जी प्लांट, देश का सबसे लंबा समुद्र से गुजरने वाला ब्रिज और सबसे बड़ी ऑफिस बिल्डिंग आज भारत के नाम दर्ज हो चुके हैं.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत ने केवल नए भवन, पुल और परियोजनाएं नहीं बनाईं, बल्कि अपने सामर्थ्य के नए मानक गढ़े हैं. 17 सितंबर का दिन इसलिए एक सुंदर प्रतीक बन जाता है क्योंकि एक ओर भगवान विश्वकर्मा की सृजन परंपरा है और दूसरी ओर उसी भावना से प्रेरित आधुनिक भारत का निर्माण है. फर्क केवल इतना है कि तब शिल्पी अपने औजार से युग की पहचान गढ़ते थे, आज भारत अपने संकल्प, तकनीक और सामूहिक पुरुषार्थ से नए भारत की तस्वीर गढ़ रहा है.
आज जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने जीवन के 76वें वर्ष में प्रवेश कर रहे हैं, तब उनके जन्मदिन को केवल शुभकामनाओं तक सीमित रखना उचित नहीं होगा. यह दिन हमें यह संकल्प लेने का अवसर देता है कि भारत को विकसित, आत्मनिर्भर, सुरक्षित, समृद्ध और सांस्कृतिक रूप से गौरवशाली राष्ट्र बनाने के प्रयास में हम अपनी भूमिका निभाएंगे. उनकी यात्रा में संघर्ष है, संगठन है, प्रशासन है, चुनाव है, आलोचना है, उपलब्धियां हैं और सबसे बढ़कर एक निरंतर चलने वाली राष्ट्रसेवा है.
नरेंद्र मोदी जी के 76वें जन्मदिन पर उन्हें शुभकामना देते हुए मैं यही कहना चाहूंगा कि मोदी केवल एक नाम नहीं हैं. वे उस विचार के प्रतिनिधि हैं, जो भारत को कमजोरियों से नहीं, उसकी शक्तियों से पहचानता है. वे उस युवा भारत की आकांक्षा हैं, जो दुनिया में नेतृत्व करना चाहता है. वे उस किसान का विश्वास हैं, जो आधुनिक तकनीक और बेहतर बाजार चाहता है. वे उस महिला का आत्मविश्वास हैं, जो सम्मान, सुरक्षा और आत्मनिर्भरता चाहती है. वे उस सैनिक के संकल्प का प्रतीक हैं, जो सीमाओं की रक्षा करता है. वे उस वैज्ञानिक की महत्वाकांक्षा हैं, जो चंद्रमा से आगे देख रहा है और वे उस सामान्य भारतीय के सपने का राजनीतिक रूप हैं, जो चाहता है कि 2047 का भारत दुनिया के सामने सिर ऊंचा करके खड़ा हो.
आज 17 सितंबर केवल एक जन्मदिवस मनाने का अवसर नहीं, बल्कि उस संकल्प को दोहराने का दिन है, जो भारत को उसकी पूरी क्षमता तक पहुंचाने का सपना देखता है. भगवान विश्वकर्मा की सृजन परंपरा से प्रेरणा लेते हुए आज भारत जिस निर्माण यात्रा पर आगे बढ़ रहा है, उसका अगला और सबसे बड़ा पड़ाव 2047 का विकसित भारत है.
डॉ. संजय मयूख लेखक बिहार विधान परिषद के माननीय सदस्य सह राष्ट्रीय प्रवक्ता (भाजपा) हैं.
प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी
Prabhat Khabar App :
देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए