पीएम मोदी ने लाल किले से पेश किया ‘सप्तधारा’ विजन, क्या है विकसित भारत के लिए 7 शक्तियों का पूरा प्लान?

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पीएम मोदी सप्तधारा विजन.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 15 अगस्त 2026 को लाल किले से 'विकसित भारत 2047' का लक्ष्य हासिल करने के लिए 'सप्तधारा' विजन देश के सामने रखा. इस महत्वाकांक्षी योजना में सात प्रमुख शक्तियों पर जोर दिया गया है.

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15 अगस्त 2026 को भारत अपना 80वां स्वतंत्रता दिवस मना रहा है. इस राष्ट्रीय गर्व के पर्व पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लाल किले की प्राचीर से लगातार 13वीं बार स्वतंत्रता दिवस संबोधन दिया. इस दौरान उन्होंने ‘विकसित भारत 2047’ के लक्ष्य को हासिल करने के लिए सात शक्तियों पर आधारित ‘सप्तधारा’ विजन देश के सामने रखा. करीब 75 मिनट के भाषण में पीएम मोदी ने देश के सामने मौजूद चुनौतियों के साथ-साथ उन क्षेत्रों को भी रेखांकित किया, जिनमें भारत को आने वाले वर्षों में अपनी क्षमता और आत्मनिर्भरता बढ़ानी होगी.

‘सप्तधारा’ विजन के माध्यम से प्रधानमंत्री ने एक बार फिर ‘आत्मनिर्भर भारत’ के संकल्प को आगे बढ़ाया. उन्होंने सेमीकंडक्टर, महत्वपूर्ण खनिज, ऊर्जा सुरक्षा, रक्षा तकनीक, कृषि, आधुनिक बुनियादी ढांचे और नई तकनीकों को भारत के भविष्य के लिए बेहद अहम बताया. प्रधानमंत्री ने कहा कि इन सात शक्तियों पर काम करके ही भारत वैश्विक स्तर पर नई ऊंचाइयों को छू सकेगा.

प्रधानमंत्री मोदी ने अपने सात सूत्रीय विजन की तुलना प्राचीन भारत के ‘सप्त सिंधु’ यानी सात नदियों की अवधारणा से की. उनका कहना है कि इन सात शक्तियों को मजबूत करके भारत विकसित राष्ट्र बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ सकता है.

1. मैन्युफैक्चरिंग की ताकत

प्रधानमंत्री ने भारत को दुनिया का एक भरोसेमंद मैन्युफैक्चरिंग हब बनाने पर जोर दिया. उनका लक्ष्य केवल तैयार उत्पाद बनाने तक सीमित नहीं है, बल्कि कॉम्पोनेंट से लेकर फाइनल प्रोडक्ट तक पूरी मैन्युफैक्चरिंग चेन को भारत में मजबूत करना है. मोदी ने कहा, ’जब मैं सप्तधारा की बात करता हूं, तो ताकत की पहली धारा मैन्युफैक्चरिंग पावर है.’

उन्होंने कहा कि कंपोनेंट्स और डिजाइन से लेकर तैयार उत्पाद तक पूरी वैल्यू चेन भारत में विकसित होनी चाहिए. भारतीय मैन्युफैक्चरिंग को लागत, गुणवत्ता और बड़े पैमाने पर उत्पादन के मोर्चों पर दुनिया के साथ प्रतिस्पर्धा करने में सक्षम होना होगा. उन्होंने कहा कि बिना किसी खामी के उत्पादन और सटीक मैन्युफैक्चरिंग भारत की पहचान बननी चाहिए.

2. कृषि और फूड प्रोसेसिंग

सप्तधारा का दूसरा विजन कृषि और फूड प्रोसेसिंग पर केंद्रित है. इसका उद्देश्य भारत को दुनिया की बड़ी खाद्य अर्थव्यवस्थाओं में शामिल करना है. प्रधानमंत्री ने किसानों को भारत को दुनिया की बड़ी फूड पावर बनाने की दिशा में काम करने का आह्वान किया. उन्होंने भारत के पारंपरिक और देसी उत्पादों को वैश्विक बाजार तक पहुंचाने पर विशेष जोर दिया. इसके तहत मिलेट्स, मसाले और फलों जैसे भारतीय उत्पादों को दुनिया के बाजारों में बड़े पैमाने पर पहुंचाने की बात कही गई. 

पीएम मोदी ने इस क्षेत्र को भारत की निर्यात क्षमता से जोड़ते हुए कहा कि कृषि उत्पादन से ज्यादा से ज्यादा मूल्य पैदा करने की जरूरत है. उन्होंने वैश्विक स्तर पर उर्वरकों की कीमतों में उतार-चढ़ाव से किसानों को बचाने के लिए सरकार की ओर से किए जा रहे प्रयासों का भी जिक्र किया.

3. टेक्नोलॉजी और इनोवेशन

सप्तधारा की तीसरी धारा टेक्नोलॉजी और इनोवेशन है. नरेंद्र मोदी ने इन्हें भारत की भविष्य की आर्थिक वृद्धि का प्रमुख आधार बताया. पीएम मोदी ने सेमीकंडक्टर, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), क्वांटम टेक्नोलॉजी, अंतरिक्ष और रोबोटिक्स जैसे क्षेत्रों में भारत की क्षमता विकसित करने की जरूरत बताई. उन्होंने कहा कि आने वाले सात से आठ वर्षों में 7-8 सेमीकंडक्टर प्लांट स्थापित होने की उम्मीद है. 

तकनीकी क्षमताओं को मजबूत करने और इनोवेशन को विकसित भारत की यात्रा का एक महत्वपूर्ण इंजन बनाने पर है. प्रधानमंत्री का जोर इस बात पर रहा कि भारत केवल दुनिया के लिए एक बड़ा बाजार बनकर न रह जाए, बल्कि नई तकनीकों के विकास और नवाचार का वैश्विक केंद्र बने.

4. गति शक्ति

सप्तधारा की चौथी धारा गति शक्ति है, जिसका मुख्य उद्देश्य विश्वस्तरीय, तेज और बेहतर कनेक्टिविटी के साथ आधुनिक बुनियादी ढांचा तैयार करना है. प्रधानमंत्री ने देश के शहरों और अलग-अलग हिस्सों के बीच तेज और आधुनिक कनेक्टिविटी को समय की जरूरत बताया. इसके लिए हाई-स्पीड रेल और आधुनिक हाईवे जैसे बुनियादी ढांचे को तेजी से विकसित करने पर जोर दिया गया.

पीएम मोदी ने कहा कि भारत की आर्थिक तरक्की के लिए निर्बाध कनेक्टिविटी बेहद जरूरी होगी. इससे सामान, सेवाओं और लोगों की आवाजाही तेज होगी और देश के बुनियादी ढांचे के साथ-साथ उसकी वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता भी मजबूत होगी.

5. रक्षा शक्ति और आत्मनिर्भर रक्षा

सप्तधारा की पांचवीं धारा रक्षा शक्ति और आत्मनिर्भर रक्षा है. मोदी ने रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता पर जोर ऐसे समय में दिया है, जब दुनिया के कई देश अपने रणनीतिक संसाधनों और जरूरी आपूर्ति को सुरक्षित रखने पर ज्यादा ध्यान दे रहे हैं.

उन्होंने कहा कि पेट्रोल और डीजल से लेकर उर्वरक, दवाइयां और टेक्नोलॉजी चिप्स तक कई तरह के संसाधनों को दुनिया में 'हथियार की तरह इस्तेमाल' किया जा रहा है. ऐसे माहौल में भारत के लिए आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ना पहले से कहीं ज्यादा महत्वपूर्ण हो गया है.

6. ग्रीन इकोनॉमी और ब्लू इकोनॉमी

सप्तधारा की छठी धारा ग्रीन इकोनॉमी और ब्लू इकोनॉमी को एक साथ जोड़ती है. इसका फोकस भारत की जमीन और समुद्री संसाधनों के क्षेत्र में टिकाऊ विकास को बढ़ावा देना है. प्रधानमंत्री ने भारत की विशाल समुद्री सीमा और मछुआरा समुदायों की क्षमता का भी उल्लेख किया. उन्होंने कहा कि वैश्विक व्यापार के बढ़ते अवसरों से इन क्षेत्रों को काफी फायदा हो सकता है. उन्होंने भारत के साथ हुए मुक्त व्यापार समझौतों (FTA) का जिक्र करते हुए कहा कि समुद्री खाद्य उत्पादों जैसे क्षेत्र अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक बेहतर पहुंच का फायदा उठाकर अपना निर्यात बढ़ा सकते हैं.

प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत को अपनी बढ़ती ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता मजबूत करनी होगी. उन्होंने कहा कि ग्रीन हाइड्रोजन, रिन्यूबल एनर्जी, एनर्जी स्टोरेज, ग्रीन मोबालिटी, ग्रीन मैन्यूफैक्चरिंग इन ग्लोबल स्केल को हासिल करना है. उन्होंने अगले एक दशक में पांच परमाणु रिएक्टर शुरू करने का लक्ष्य बताया. प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत का लक्ष्य 100 गीगावाट परमाणु ऊर्जा क्षमता हासिल करना है.

7. भारत की सॉफ्ट पावर

सप्तधारा की सातवीं और अंतिम धारा भारत की सॉफ्ट पावर है. इसके जरिए भारत अपनी वैश्विक सांस्कृतिक और कूटनीतिक प्रभाव को और व्यापक बनाने की दिशा में आगे बढ़ना चाहता है. पीएम मोदी ने कहा कि 2014 के बाद से भारत ने करीब 40 देशों के साथ मुक्त व्यापार समझौते (FTA) किए हैं. उन्होंने भारतीय कारोबारियों, खासकर MSME क्षेत्र से जुड़े उद्यमियों से इन अवसरों का फायदा उठाने और भारतीय उत्पादों को दुनिया के बाजारों तक पहुंचाने का आह्वान किया.

मोदी ने कहा, 'हर भारतीय उत्पाद वैश्विक बाजार तक पहुंचना चाहिए.' हालांकि, उन्होंने साथ ही जोर दिया कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में जगह बनाने के लिए भारतीय उत्पादों को गुणवत्ता और कीमत, दोनों के मामले में वैश्विक मानकों पर खरा उतरना होगा.

कोरोना से लेकर ऊर्जा संकट तक, पीएम मोदी ने गिनाईं चुनौतियां

देश के सामने मौजूद चुनौतियों का जिक्र करते हुए पीएम मोदी ने लाल किले से कहा कि पिछले 10-12 वर्षों से भारत 2047 के लक्ष्य को हासिल करने की दिशा में लगातार काम कर रहा है. इस दौरान देश को कई तरह की मुश्किलों और संकटों का सामना करना पड़ा.

प्रधानमंत्री ने कोरोना महामारी का उदाहरण देते हुए कहा कि वैश्विक महामारी के कारण दुनिया की अर्थव्यवस्था चरमरा गई थी. इसके बावजूद भारत ने पहले से की गई तैयारियों और एक के बाद एक उठाए गए कदमों के जरिए संकट का सामना किया. पीएम मोदी ने कहा कि इन तैयारियों का फायदा यह हुआ कि आज देश में गैस भी है, पेट्रोल भी है और यूरिया भी है.

प्रधानमंत्री का यह बयान मौजूदा ईरान युद्ध के कारण फारस की खाड़ी में पैदा हुए ऊर्जा संकट के संदर्भ में था. इस संकट का असर पूरी दुनिया पर पड़ा है और भारत को भी तेल तथा गैस की आपूर्ति से जुड़ी चुनौतियों का सामना करना पड़ा है. हालांकि, भारत ने अपनी कूटनीतिक क्षमता का इस्तेमाल करते हुए इस संकट से निपटने की कोशिश की है. इसी पृष्ठभूमि विकसित भारत के लक्ष्य को साधते हुए प्रधानमंत्री ने देश के सामने ‘सप्तधारा’ विजन का रोडमैप रखा.


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अनन्त नारायण शुक्ल

लेखक के बारे में

By अनन्त नारायण शुक्ल

अनन्त नारायण शुक्ल प्रभात खबर डिजिटल में कंटेंट क्रिएटर के रूप में कार्यरत हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में करीब दो वर्षों का अनुभव है. अनन्त राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मामलों, वैश्विक भू-राजनीति (ग्लोबल जियोपॉलिटिक्स), रक्षा नीति, कूटनीति और विश्व राजनीति से जुड़े विषयों पर खबरें करते हैं. वे दुनिया भर में घट रही महत्वपूर्ण घटनाओं को गहरी रिसर्च और तथ्यमात्मक विश्लेषण के साथ पाठकों तक पहुंचाने का काम करते हैं.

अनन्त मुख्य रूप से अंतरराष्ट्रीय संघर्ष, वैश्विक सुरक्षा, रक्षा रणनीतियों, विदेश नीति, भारत के पड़ोसी देशों से जुड़े घटनाक्रम और विश्व स्तर पर भारत की भूमिका जैसे विषयों को कवर करते हैं. इजरायल-ईरान संघर्ष, अमेरिका की विदेश नीति, परमाणु सुरक्षा, पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) के हालात, नेपाल-चीन सीमा से जुड़े मुद्दे और वैश्विक कूटनीतिक घटनाक्रम पर उनकी विशेष पकड़ है. इसके अलावा वे अंतरराष्ट्रीय आपदाओं, विदेशों में बसे भारतीयों और वैश्विक स्तर पर भारत के बढ़ते प्रभाव से जुड़ी खबरों पर भी नियमित रूप से लिखते हैं.

इतिहास, राजनीति और विज्ञान में उनकी गहरी रुचि रही है, जिसने उन्हें वैश्विक मामलों और अंतरराष्ट्रीय पत्रकारिता की ओर प्रेरित किया. यही वजह है कि उनके लेखों में विषय की गहराई, एक्सपर्ट्स की राय के साथ उनके कमेंट्स, तथ्यों की सटीकता और व्यापक संदर्भ देखने को मिलता है. बदलते वैश्विक परिदृश्य पर उनकी पैनी नजर रहती है, जिससे वे पाठकों तक समय पर विश्वसनीय और विश्लेषणात्मक जानकारी पहुंचाते हैं.

अनन्त को राष्ट्रीय राजनीति की भी समझ है. उन्होंने झारखंड विधान सभा 2024, दिल्ली विधान सभा चुनाव 2025 चुनाव और देश के अन्य चुनावों को कवर किया है. चुनाव के काउंटिंग डे को कवर करने का भी उनके पास काफी अनुभव है.

अनन्त कभी-कभी नेशनल डेस्क भी संभालते हैं, जिसमें देश भर में जनता से जुड़े जरूरी सामाजिक मुद्दे, न्यायिक खबरों और अपराध की खबरों को भी कवर करते हैं. इसके अलावा उन्हें रोचक जानकारियों को क्यूरेट करने का भी शौक है. इसमें लाइफस्टाइल, ऐतिहासिक और पुरातात्विक जानकारी के साथ ही दुनिया भर के साम्राज्यों के बारे में खबरें करते हैं.

उत्तर प्रदेश के भदोही जिले के रहने वाले अनन्त ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से मास कम्युनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएशन की पढ़ाई पूरी की है. उन्होंने 2024 में अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत प्रभात खबर में खेल पत्रकार के रूप में की थी, जहां उन्होंने करीब एक वर्ष तक क्रिकेट और अन्य खेलों से जुड़ी खबरों को कवर किया. बाद में अपनी रुचि और विशेषज्ञता के चलते उन्होंने अंतरराष्ट्रीय डेस्क का रुख किया और आज वैश्विक राजनीति व भू-राजनीति के प्रमुख विषयों पर लेखन कर रहे हैं.

तथ्यों की पुष्टि और सटीक जानकारी को वे अपनी पत्रकारिता का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा मानते हैं. उनका प्रयास रहता है कि पाठकों को विश्व घटनाक्रम की भरोसेमंद, संतुलित और गहन जानकारी सरल भाषा में उपलब्ध हो, ताकि वे वैश्विक मुद्दों को बेहतर ढंग से समझ सकें.

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