संसद भवन पहुंची महुआ मोइत्रा, जानें आखिर क्यों आ गई निष्कासन की नौबत?

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संसद का शीतकालीन सत्र आज यानी चार दिसंबर से शुरू हुआ. आज के दिन को लेकर सबकी नजरें बनी हुई थी तृणमूल कांग्रेस से सांसद महुआ मोइत्रा पर. कैश फॉर क्वेरी मामले में उनपर आरोप लगे हुए है.

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संसद का शीतकालीन सत्र आज यानी चार दिसंबर से शुरू हुआ. आज के दिन को लेकर सबकी नजरें बनी हुई थी तृणमूल कांग्रेस से सांसद महुआ मोइत्रा पर. कैश फॉर क्वेरी मामले में उनपर आरोप लगे हुए है.

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ऐसे में उम्मीद लगाई जा रही थी कि लोकसभा की आचार समिति की वह रिपोर्ट संसद के शीतकालीन सत्र के पहले दिन यानी सोमवार को निचले सदन में पेश करेगी जिसमें महुआ मोइत्रा को ‘रिश्वत लेकर सवाल पूछने’ के मामले में सदन से निष्कासित करने की अनुशंसा की गई है. हालांकि, ऐसा नहीं हुआ. अब उम्मीद है कि यह मामला कल सदन के सामने रखा जाएगा.

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पहले के घटनाक्रम की अगर जानकारी दें तो सवाल के बदले पैसे लेने के मामले में लोकसभा एथिक्स पैनल के 6 सदस्यों ने टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा के खिलाफ पेश रिपोर्ट का समर्थन किया है, जबकि 4 सदस्यों ने इसका विरोध किया. पैनल प्रमुख विनोद सोनकर ने इसकी जानकारी दी है.

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वहीं, सूत्रों का कहना है कि एथिक्स कमेटी ने टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा को लोकसभा से निष्कासित करने की सिफारिश की है. वहीं, पूरे मामले को लेकर सांसद महआ मोइत्रा का बयान आया है. महुआ मोइत्रा का कहना है कि भले ही वे मुझे निष्कासित कर दें, मैं अगली लोकसभा में बड़े जनादेश के साथ वापस आऊंगी.

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बता दें कि लोकसभा में कांग्रेस के नेता अधीर रंजन चौधरी (Adhir Ranjan Chaudhary) ने ‘धन लेकर प्रश्न पूछने’ के मामले में तृणमूल कांग्रेस की नेता महुआ मोइत्रा के खिलाफ आचार समिति की कार्रवाई को लेकर लोकसभा के अध्यक्ष ओम बिरला को शनिवार को पत्र लिखकर निष्कासन को ‘अत्यंत गंभीर दंड’ करार दिया.

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साथ ही उन्होंने नियमों तथा संसदीय समितियों के कामकाज पर पुनर्विचार की मांग की. कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी ने चार पृष्ठों वाले अपने पत्र में कहा कि विशेषाधिकार समिति और आचार समिति के लिए उल्लेखित भूमिकाओं में कोई स्पष्ट सीमांकन नहीं है, विशेष रूप से दंडात्मक शक्तियों के प्रयोग के मामलों में.

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आरोप यह है कि महुआ मोइत्रा ने कैश और गिफ्ट के लिए अपने पदों का दुरुपयोग किया और पैसे के लिए पीएम मोदी और अडानी पर आरोप लगाए. साथ ही यह आरोप है कि हीरानंदानी समूह ने अडानी समूह के बारे में संसद में सवाल उठाने के लिए TMC को कथित तौर पर भुगतान किया था. आरोप है कि TMC सांसद ने 61 में से 50 सवाल हीरानंदानी और अडानी से जुड़े हुए पूछे.

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