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Children Vaccination: झारखंड, केरल, और जम्मू-कश्मीर समेत 6 राज्यों में 100 फीसदी बच्चों का टीकाकरण

Updated at : 19 Feb 2022 7:47 PM (IST)
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Children Vaccination: झारखंड, केरल, और जम्मू-कश्मीर समेत 6 राज्यों में 100 फीसदी बच्चों का टीकाकरण

Children Vaccination in India: झारखंड, केरल, और जम्मू-कश्मीर समेत 6 राज्यों में 100 फीसदी बच्चों का टीकाकरण. विस्तार से रिपोर्ट यहां पढ़ें...

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Children Vaccination in India: शिशु मृत्यु दर को कम करने और उन्हें बीमारियों से बचाने के लिए दुनिया भर में बड़े पैमाने पर बच्चों का टीकाकरण अभियान (Vaccination Drive) चलाया जाता है. भारत सरकार इंद्रधनुष (Indradhanush) कार्यक्रम चलाती है. कई राज्यों ने टीकाकरण अभियान को प्रभावशाली तरीके से लागू किया, जबकि कई राज्य अब तक इसके महत्व को शायद समझ नहीं पाये हैं.

सिर्फ चार राज्यों में 100 फीसदी बच्चों का टीकाकरण

यही वजह है कि देश के मात्र चार राज्यों में 100 फीसदी टीकाकरण (100 Percent Vaccination) संभव हो पाया है. अंडमान एवं निकोबार द्वीप समूह (Andaman And Nicobar Islands) एवं लक्षद्वीप (Lakshdweep) दो ऐसे केंद्रशासित प्रदेश हैं, जिन्होंने इस लक्ष्य को हासिल किया है. राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली (Delhi) 100 फीसदी टीकाकरण का लक्ष्य हासिल नहीं कर पायी.

नीति आयोग ने प्रकाशित की रिपोर्ट

नीति आयोग (NITI Aayog) ने स्वास्थ्य से जुड़ी एक रिपोर्ट प्रकाशित की है. इसमें बताया गया है कि झारखंड (Jharkhand), जम्मू-कश्मीर (Jammu-Kashmir), केरल (Kerala), आंध्रप्रदेश (Andhra Pradesh), मणिपुर (Manipur) एवं मिजोरम (Mizoram) में ही 100 फीसदी बच्चों का टीकाकरण हो पाया है. ओड़िशा में 60 फीसदी से भी कम बच्चों को सभी टीके लगाये गये. तमिलनाडु, मध्यप्रदेश, हिमाचल प्रदेश, राजस्थान, असम, उत्तर प्रदेश, छत्तीसगढ़, हरियाणा और बिहार में 90 फीसदी से कम बच्चों का टीकाकरण हो सका है.

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10 राज्यों में 90 फीसदी बच्चों का हुआ टीकाकरण

भारत के 10 राज्य ऐसे हैं, जहां 90 फीसदी या उससे अधिक बच्चों का टीकाकरण हो चुका है. सबसे कम बच्चों को टीका लगाने वाले राज्यों में ओड़िशा, नगालैंड और दमन एवं दीव शामिल हैं. इन राज्यों एवं केंद्रशासित प्रदेशों में 52.8 से 59.8 फीसदी बच्चों को ही सभी टीके लगाये गये हैं.

कई राज्यों में टीकाकरण में आयी गिरावट

बेहद चिंता की बात यह है कि वर्ष 2015-16 से वर्ष 2017-18 के दौरान बच्चों के टीकाकरण के मामले में कई राज्यों में गिरावट देखी गयी है. हिमाचल प्रदेश, ओड़िशा, मेघालय, अंडमान एवं निकोबार द्वीप समूह, लक्षद्वीप और दमन एवं दीव ऐसे ही राज्यों एवं केंद्रशासित प्रदेशों में शुमार हैं. यहां टीकाकरण में 15 प्वाइंट की गिरावट दर्ज की गयी है.

क्या है संपूर्ण टीकाकरण

एक शिशु को जब बीसीजी, डीपीटी की 3 खुराक, ओपीवी की 3 खुराक और मीजल के टीके लगा दिये जाते हैं, यह माना जाता है कि उसका संपूर्ण टीकाकरण हो चुका है.

टीकाकरण के फायदे

अगर शिशु को सभी टीके लगा दिये जाते हैं, तो उसकी प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है. इससे वह कम बीमार पड़ता है और शिशु मृत्यु दर कम करने में मदद मिलती है.

Posted By: Mithilesh Jha

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Mithilesh Jha

लेखक के बारे में

By Mithilesh Jha

मिथिलेश झा PrabhatKhabar.com में पश्चिम बंगाल राज्य प्रमुख (State Head) के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 32 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है. उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और अन्य समसामयिक विषयों पर केंद्रित रही है, जिससे वे क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक विश्वसनीय और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित हुए हैं. अनुभव : पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 3 दशक से अधिक काम करने का अनुभव है. वर्तमान भूमिका : प्रभात खबर डिजिटल (prabhatkhabar.com) में पश्चिम बंगाल के स्टेट हेड की भूमिका में हैं. वे डिजिटल न्यूज कवर करते हैं. तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं. वर्तमान में बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 पर पूरी तरह से फोकस्ड हैं. भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस पश्चिम बंगाल रहा है, साथ ही उन्होंने झारखंड और छत्तीसगढ़ की भी लंबे समय तक ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है, जो उनकी क्षेत्रीय समझ और अनुभव को दर्शाता है. मुख्य विशेषज्ञता (Core Beats) : उनकी पत्रकारिता निम्नलिखित महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता को दर्शाती है :- राज्य राजनीति और शासन : झारखंड और पश्चिम बंगाल की राज्य की राजनीति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निरंतर और विश्लेषणात्मक कवरेज. सामाजिक मुद्दे : आम जनता से जुड़े सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रिपोर्टिंग. जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा : पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर डेटा आधारित और फील्ड रिपोर्टिंग. डाटा स्टोरीज और ग्राउंड रिपोर्टिंग : डेटा आधारित खबरें और जमीनी रिपोर्टिंग उनकी पत्रकारिता की पहचान रही है. विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तीन दशकों से अधिक की निरंतर रिपोर्टिंग, विशेष और दीर्घकालिक कवरेज का अनुभव तथा तथ्यपरक पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने मिथिलेश झा को पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है.

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