PM Modi @ 76: 12 साल में Diplomacy से Delivery तक कैसे बदली भारत की तस्वीर?

Updated:
विज्ञापन

PM Modi Birthday Special

WhatsApp चैनल से जुड़ेंगूगल पर प्रभात खबर चुनें

PM Modi Birthday: नरेंद्र मोदी 17 सितंबर 2026 को 76 साल के हो गए. प्रधानमंत्री के रूप में 12 साल के कार्यकाल में भारत की विदेश नीति, BRICS-G20 कूटनीति, UPI, जल जीवन मिशन और सरकारी डिलीवरी में क्या बदलाव आया?

विज्ञापन

17 सितंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का जन्मदिन. 2026 में वह 76 वर्ष के हो गए हैं. यह सिर्फ एक जन्मदिन नहीं, बल्कि उनके प्रधानमंत्री के रूप में 12 वर्षों के कार्यकाल को देखने का भी एक अवसर है.

विज्ञापन

मई 2014 में जब नरेंद्र मोदी ने पहली बार प्रधानमंत्री पद की शपथ ली थी, तब उनके सामने तेज विकास, निर्णायक शासन और वैश्विक मंच पर भारत की भूमिका बढ़ाने की चुनौती थी.

12 साल बाद इस कार्यकाल को मोटे तौर पर दो तस्वीरों में देखा जा सकता है—विदेश नीति में सक्रिय और बहुस्तरीय कूटनीति तथा देश के भीतर योजनाओं की डिलीवरी और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर का विस्तार.

Read more: मोदी @ 76: Rising Power से Shaping Power तक भारत की विदेश नीति का सफर

BRICS से शुरू होती है विदेश नीति की नई तस्वीर

मोदी के 76वें जन्मदिन से कुछ दिन पहले ही नई दिल्ली में 18वां BRICS शिखर सम्मेलन आयोजित हुआ.

12-13 सितंबर 2026 को हुए सम्मेलन में BRICS नेताओं ने नई दिल्ली घोषणा स्वीकार की. घोषणा में बहुपक्षवाद, समावेशी विकास, सतत विकास और अधिक प्रतिनिधित्व वाली वैश्विक व्यवस्था पर जोर दिया गया.

भारत की BRICS अध्यक्षता के दौरान 30 के करीब शहरों में सैकड़ों बैठकें हुईं. प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में इसे people-centric और humanity-first दृष्टिकोण से जोड़कर पेश किया.

यानी, 2014 के बाद भारत की विदेश नीति सिर्फ पारंपरिक द्विपक्षीय संबंधों तक सीमित नहीं रही. BRICS, G20, QUAD, इंडो-पैसिफिक, ग्लोबल साउथ और विभिन्न रणनीतिक साझेदारियों के जरिए भारत ने कई समानांतर मंचों पर अपनी सक्रियता बढ़ाई.

ब्रिक्स नेताओं के साथ पीएम मोदी, फोटो ANI
ब्रिक्स नेताओं के साथ पीएम मोदी, फोटो ANI

अमेरिका से रूस तक, रिश्तों में संतुलन की कोशिश

मोदी सरकार के वर्षों में भारत ने अमेरिका के साथ रणनीतिक संबंधों को मजबूत किया, वहीं रूस के साथ अपने पारंपरिक रिश्तों को भी जारी रखा.

जापान और ऑस्ट्रेलिया के साथ सहयोग इंडो-पैसिफिक रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा बना. ASEAN और पड़ोसी देशों के साथ संपर्क को Act East और Neighbourhood First जैसी नीतियों से जोड़ा गया.

इसी दौरान खाड़ी देशों के साथ भारत के राजनीतिक, आर्थिक और ऊर्जा संबंध भी विदेश नीति के महत्वपूर्ण हिस्से बने.

यह मॉडल किसी एक शक्ति-गुट के साथ पूर्ण संरेखण के बजाय अलग-अलग साझेदारियों के साथ समानांतर जुड़ाव पर आधारित दिखाई देता है.

G20: भारत की कूटनीति का एक बड़ा पड़ाव

2023 में भारत की G20 अध्यक्षता भी मोदी सरकार की विदेश नीति का प्रमुख पड़ाव रही.

नई दिल्ली में हुए G20 शिखर सम्मेलन में नई दिल्ली नेताओं की घोषणा स्वीकार की गई और अफ्रीकी संघ को G20 के स्थायी सदस्य के रूप में शामिल करने का स्वागत किया गया.

भारत ने इसी दौरान Voice of Global South Summit के जरिए विकासशील देशों की चिंताओं को वैश्विक मंच पर रखने की कोशिश की.

जलवायु परिवर्तन, सौर ऊर्जा, जैव ईंधन और वैश्विक विकास जैसे मुद्दे भी भारत की कूटनीतिक प्राथमिकताओं में अधिक दिखाई देने लगे। International Solar Alliance और Global Biofuels Alliance जैसे मंच इसी व्यापक प्रयास का हिस्सा हैं.

विदेश नीति के साथ घरेलू डिलीवरी पर फोकस

अगर विदेश नीति मोदी सरकार की एक तस्वीर है, तो दूसरी तस्वीर देश के भीतर बुनियादी सुविधाओं और सरकारी योजनाओं की डिलीवरी की है.

  • स्वच्छ भारत मिशन 2014 में शुरू हुआ. सरकारी आंकड़ों के अनुसार अगस्त 2026 तक ग्रामीण भारत में 12.19 करोड़ से अधिक व्यक्तिगत घरेलू शौचालय बनाए जा चुके थे.
  • जल जीवन मिशन की कहानी भी इसी बदलाव का उदाहरण है.
  • 2019 में मिशन शुरू होने के समय करीब 3.23 करोड़ ग्रामीण परिवारों के पास नल का पानी कनेक्शन था. 18 जुलाई 2026 तक यह संख्या लगभग 15.89 करोड़ हो गई थी.
  • अगस्त 2026 के सरकारी आंकड़ों में यह संख्या 15.91 करोड़ से अधिक बताई गई है.

यानी सरकार की योजनाओं का एक बड़ा हिस्सा सीधे उस बुनियादी सुविधा पर केंद्रित रहा, जिसे आम परिवार रोजमर्रा की जिंदगी में महसूस करता है.

उज्ज्वला से आवास तक

प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के तहत अगस्त 2026 तक 10.57 करोड़ से अधिक LPG कनेक्शन दिए जाने की सरकारी जानकारी है.

वहीं प्रधानमंत्री आवास योजना के ग्रामीण हिस्से के तहत मार्च 2026 तक करीब 2.99 करोड़ मकान पूरे होने की जानकारी सरकार ने दी है.

इन योजनाओं का राजनीतिक और सामाजिक प्रभाव अलग-अलग तरीके से आंका जाता रहा है, लेकिन इनके जरिए सरकारी नीति का फोकस बुनियादी सुविधाओं की पहुंच बढ़ाने पर रहा है.

असली डिजिटल बदलाव: बैंक खाते से UPI तक

मोदी सरकार की 12 साल की कहानी में शायद सबसे दिखाई देने वाला बदलाव स्मार्टफोन की स्क्रीन पर दिखता है.

  1. जन धन खाते + आधार + Direct Benefit Transfer + UPI ने सरकारी भुगतान और रोजमर्रा के डिजिटल लेनदेन का ढांचा बदल दिया है.
  2. अगस्त 2014 में शुरू हुई प्रधानमंत्री जन धन योजना के तहत अगस्त 2026 तक 59.09 करोड़ खाते खोले जाने की जानकारी सरकार ने दी है.
  3. इसके बाद UPI ने डिजिटल भुगतान को एक बिल्कुल अलग स्तर पर पहुंचाया.
  4. वित्त वर्ष 2016-17 में UPI पर सालाना करीब 1.78 करोड़ लेनदेन हुए थे। वित्त वर्ष 2025-26 में यह संख्या बढ़कर 24,162 करोड़ से अधिक हो गई। लेनदेन का कुल मूल्य करीब ₹314 लाख करोड़ रहा.

यही वह बदलाव है जो मोदी काल की प्रशासनिक कहानी को केवल सरकारी दफ्तरों से निकालकर आम लोगों के मोबाइल फोन तक ले जाता है.

सिर्फ योजनाएं नहीं, मैन्युफैक्चरिंग पर भी जोर

सरकार ने पिछले 12 वर्षों में Make in India और आत्मनिर्भर भारत के जरिए घरेलू उत्पादन क्षमता बढ़ाने को भी प्रमुख नीति बनाया.

प्रधानमंत्री मोदी ने 2026 के स्वतंत्रता दिवस संबोधन में पिछले 12 वर्षों के दौरान रक्षा उत्पादन में करीब चार गुना और इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग में करीब सात गुना वृद्धि का उल्लेख किया था. मोबाइल फोन उत्पादन में करीब 35 गुना वृद्धि का भी दावा किया गया.

रक्षा मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक वित्त वर्ष 2025-26 में भारत का रक्षा उत्पादन रिकॉर्ड ₹1.78 लाख करोड़ तक पहुंचा, जो 2013-14 के स्तर से लगभग चार गुना है.

यह बदलाव सिर्फ सरकारी योजनाओं की संख्या का सवाल नहीं है. इसका एक बड़ा हिस्सा भारत को उत्पादन, तकनीक और रणनीतिक क्षमताओं में अधिक आत्मनिर्भर बनाने की नीति से जुड़ा है.

12 साल का कार्यकाल, लेकिन बहस भी उतनी ही बड़ी

मोदी सरकार का 12 साल का कार्यकाल उपलब्धियों की कहानी के साथ विवादों और राजनीतिक संघर्षों से भी भरा रहा है.

आर्थिक नीतियों, सामाजिक मुद्दों, संस्थागत स्वतंत्रता और सत्ता के केंद्रीकरण को लेकर विपक्ष और सरकार के आलोचक लगातार सवाल उठाते रहे हैं.

दूसरी ओर, सरकार और उसके समर्थकों ने मजबूत नेतृत्व, तेज फैसलों और बड़े सुधारों को शासन की प्रमुख विशेषता के रूप में पेश किया है.

यही वजह है कि नरेंद्र मोदी की राजनीतिक विरासत पर बहस किसी एक आंकड़े या एक घटना से खत्म नहीं होती.

रितिका करमाकर
रितिका करमाकर

76वें जन्मदिन पर मोदी की कहानी: Diplomacy और Delivery

नरेंद्र मोदी 76 वर्ष के हो गए. उनके प्रधानमंत्री कार्यकाल के 12 वर्षों को देखें तो दो शब्द इस पूरी अवधि को समझने का एक तरीका देते हैं—Diplomacy और Delivery.

एक तरफ BRICS, G20, Global South, Indo-Pacific और रणनीतिक साझेदारियों के जरिए भारत की वैश्विक सक्रियता बढ़ी.

दूसरी तरफ शौचालय, नल का पानी, LPG, बैंक खाते, आवास और UPI जैसी योजनाओं ने सरकारी डिलीवरी को नागरिकों के रोजमर्रा के जीवन से जोड़ने की कोशिश की.

मोदी के कार्यकाल की राजनीतिक विरासत पर बहस आगे भी जारी रहेगी. लेकिन 17 सितंबर 2026 को उनके 76वें जन्मदिन पर इतना जरूर कहा जा सकता है कि 2014 से 2026 का दौर भारत की विदेश नीति और घरेलू शासन—दोनों की दिशा में बड़े बदलावों का दौर रहा है.

लेखक: रितिका करमाकर

Read more: PM Modi @ 76: 2047 के उभरते भारत का दस्तावेज, 17 सितंबर को जन्मदिन पर पढ़ें प्रभात प्रकाशन की कहानी

विज्ञापन

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन
Sponsored Linksby Taboola