BRICS Summit 2026 Highlights : मोदी-जिनपिंग की टॉक, पुतिन संग खास केमिस्ट्री और चीन को अगली कमान; जानें समिट के पहले दिन क्या-क्या हुआ

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समिट के पहले दिन ब्रिक्स के सभी नेताओं के साथ पीएम मोदी (PC : ANI)

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BRICS Summit 2026 Highlights : नई दिल्ली में 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में भारत ने अपनी अध्यक्षता में कई अहम कूटनीतिक पड़ाव पार किए. पीएम मोदी ने शीर्ष नेताओं से मुलाकात की, जिसमें आतंकवाद, व्यापार और क्षेत्रीय स्थिरता पर विशेष जोर दिया गया.

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BRICS Summit 2026 Highlights : भारत की अध्यक्षता में 18वां ब्रिक्स शिखर सम्मेलन नई दिल्ली के भारत मंडपम में 12 और 13 सितंबर 2026 को आयोजित किया जा रहा है. 12 सितंबर को सारे ब्रिक्स देशों द्वारा नई दिल्ली घोषणापत्र को मंजूर कर लिया गया है. घोषणापत्र में भारत के पहलगाम में हुए आतंकी हमले की एक स्वर में कड़ी निंदा की गई है. वहीं पूरी दुनिया की नजर इस वक्त भारत पर टिकी हैं, जहां दुनिया की अर्थव्यवस्था में 40 फीसदी का योगदान करने वाले देशों के लीडर्स जुटे हुए हैं.

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मोदी-जिनपिंग की मीटिंग : मतभेदों को टकराव में न बदलने पर सहमति

ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच महत्वपूर्ण द्विपक्षीय वार्ता हुई. सात वर्षों के लंबे अंतराल के बाद जिनपिंग के भारत दौरे पर हुई इस मुलाकात ने वर्ल्ड लेबल पर सबका ध्यान खींचा. दोनों नेताओं ने संबंधों को लंबे समय तक चलने वाले और रणनीतिक दृष्टिकोण से मजबूत करने की आवश्यकता जताई. पीएम मोदी ने स्पष्ट कहा कि आपसी अंतर स्वाभाविक हैं, लेकिन उन्हें विवाद का रूप नहीं लेना चाहिए. सीमावर्ती क्षेत्रों में अमन और स्थिरता को संबंधों की प्रगति की बुनियाद माना गया. इसके साथ ही व्यापार घाटे को पाटने, आपूर्ति श्रृंखला को सुगम बनाने, जनसंपर्क बढ़ाने और सीमा से जुड़े मुद्दों पर भी मंथन हुआ.

शी जिनपिंग ने जोर दिया कि भारत और चीन एक-दूसरे की क्षमताओं का लाभ उठाकर साझा प्रगति का मार्ग प्रशस्त कर सकते हैं. उन्होंने ब्रिक्स के दायरे में आपसी तालमेल बढ़ाने पर भी बल दिया. यह बातचीत ऐसे नाजुक मोड़ पर हुई है जब दोनों पक्ष सीमा पर तनाव घटाकर रिश्ते सामान्य करने के प्रयासों में जुटे हैं.


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पुतिन से हाई लेबल टॉक: 2030 तक 100 अरब डॉलर के व्यापार का रोडमैप

प्रधानमंत्री मोदी और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के बीच हुई बैठक में यूक्रेन संकट, पश्चिम एशिया के हालात और वैश्विक समुद्री गलियारों पर पड़ रहे प्रभावों पर गहन विचार-विमर्श हुआ. भारत ने दोहराया कि किसी भी विवाद का स्थायी हल केवल कूटनीति और संवाद से ही संभव है. बातचीत में ब्लैक सी (काला सागर) क्षेत्र में फंसे भारतीय नाविकों की सुरक्षा का मुद्दा भी प्रमुखता से उठा. आर्थिक मोर्चे पर दोनों देशों ने 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को 100 अरब डॉलर तक पहुंचाने का संकल्प लिया. इस दौरान राष्ट्रपति पुतिन ने पीएम मोदी को रूस यात्रा का न्योता भी दिया.


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कार का सफर और सांस्कृतिक सेतु: मोदी-पुतिन की खास केमिस्ट्री

सम्मेलन के दौरान दोनों नेताओं की एक ही वाहन में साथ यात्रा खासी सुर्खियों में रही. भारत मंडपम परिसर में ब्रिक्स बिजनेस फोरम के कार्यक्रम में दोनों का एक साथ पहुंचना मौजूदा जियोपोलिटिक्स (भू-राजनीतिक) तनाव के बीच भारत-रूस के मजबूत संबंध का स्पष्ट संकेत था. इसी मौके पर प्रधानमंत्री ने पुतिन को तमिल संत तिरुवल्लुवर के ग्रंथ 'तिरुक्कुरल' का रूसी अनुवाद भेंट किया, ताकि दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक और जनस्तरीय जुड़ाव को नया विस्तार मिल सके.

ईरानी राष्ट्रपति से संवाद: समुद्री सुरक्षा और क्षेत्रीय स्थिरता पर जोर

पीएम मोदी ने ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान के साथ द्विपक्षीय मसलों पर चर्चा की. इस दौरान भारत-ईरान साझेदारी, ब्रिक्स मंच पर तालमेल और पश्चिम एशिया में जारी अशांति पर बात हुई. भारत ने शांति बहाली के लिए राजनीतिक संवाद को जरूरी बताया. ऊर्जा आपूर्ति और समुद्री व्यापार को देखते हुए जहाजों व नाविकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने पर भी गंभीरता से विचार किया गया.

नई दिल्ली घोषणा पत्र: सीमा पार आतंकवाद पर सख्त रुख

शिखर सम्मेलन के पहले दिन का सबसे अहम कूटनीतिक पड़ाव 45 पृष्ठों और 140 बिंदुओं वाला 'नई दिल्ली घोषणा पत्र' रहा. इसमें आतंकवाद, वैश्विक व्यापार, पश्चिम एशिया, वित्तीय ढांचे और यूएन सुधारों पर सदस्य देशों ने एकीकृत दृष्टिकोण पेश किया. सभी प्रकार के आतंकवाद, उसकी फंडिंग और आतंकी सुरक्षित ठिकानों के खिलाफ कठोर कार्रवाई का संकल्प लिया गया. घोषणा पत्र में 22 अप्रैल 2025 के पहलगाम हमले (जिसमें 26 जानें गई थीं) की स्पष्ट निंदा करते हुए आतंकियों और उनके मददगारों के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाने पर सहमति बनी.

मध्य पूर्व संकट: संयम और दो-राष्ट्र समाधान की वकालत

घोषणा पत्र में पश्चिम एशिया के बिगड़ते हालात पर गंभीर चिंता व्यक्त करते हुए सभी पक्षों से अत्यधिक संयम बरतने का आह्वान किया गया. गाजा में निर्बाध मानवीय सहायता और आम नागरिकों की हिफाजत को प्राथमिकता दी गई. ब्रिक्स ने 1967 की सीमाओं के आधार पर संप्रभु फिलिस्तीनी राष्ट्र के निर्माण यानी दो-राष्ट्र समाधान के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई. बिना किसी देश का नाम लिए एकतरफा सैन्य कदमों की आलोचना की गई, जबकि शी जिनपिंग ने भी मंच से इस संघर्ष पर गहरी चिंता जाहिर की.

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एकतरफा व्यापारिक पाबंदियों और शुल्कों के खिलाफ साझा मोर्चा

दस्तावेज में बिना अंतरराष्ट्रीय सहमति के थोपे जाने वाले आर्थिक प्रतिबंधों और टैरिफ की कड़ी आलोचना की गई. ब्रिक्स देशों ने आगाह किया कि ऐसे मनमाने कदमों से वैश्विक विकास, स्वास्थ्य सेवाओं और खाद्य सुरक्षा को गंभीर खतरा पहुंचता है. सदस्य राष्ट्रों ने विश्व व्यापार संगठन (WTO) के नियमों पर आधारित स्वतंत्र, पारदर्शी और बहुपक्षीय व्यापार व्यवस्था के संरक्षण पर बल दिया.

वित्तीय लेनदेन में स्थानीय मुद्राओं को प्राथमिकता

डॉलर पर निर्भरता घटाने के क्रम में सदस्य देशों ने अपनी घरेलू मुद्राओं में व्यापार और लेनदेन को बढ़ावा देने का फैसला किया. इसका उद्देश्य सीमा पार भुगतानों को अधिक किफायती, तेज और सुरक्षित बनाना है. हालांकि साझा ब्रिक्स करेंसी का एलान नहीं हुआ, लेकिन देशों की आंतरिक बैंकिंग और मैसेजिंग प्रणालियों को आपस में जोड़ने के लिए 'ब्रिक्स पेमेंट टास्कफोर्स' के काम को गति दी गई.

यूएन सुरक्षा परिषद में सुधार और विकासशील देशों की आवाज

घोषणा पत्र में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के व्यापक पुनर्गठन की मांग दोहराई गई, ताकि अंतरराष्ट्रीय निर्णयों में विकासशील देशों को उचित प्रतिनिधित्व मिल सके. विशेष रूप से चीन और रूस ने संयुक्त राष्ट्र में भारत व ब्राजील की बड़ी भूमिका की आकांक्षाओं का समर्थन किया. पीएम मोदी ने रेखांकित किया कि वैश्विक संकटों का सबसे अधिक दंश झेलने वाले ग्लोबल साउथ को नीति-निर्धारण में बराबर का अधिकार मिलना चाहिए.

भविष्य की तकनीक: समावेशी एआई और साइबर सुरक्षा

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के नियमन को लेकर भी ब्रिक्स ने साझा सहमति बनाई. ग्लोबल साउथ की जरूरतों के अनुरूप सुरक्षित, उत्तरदायी और पारदर्शी एआई तकनीक के विकास पर बल दिया गया. भारत ने तर्क दिया कि एआई, अंतरिक्ष, साइबर सुरक्षा और बायोटेक्नोलॉजी जैसी उन्नत तकनीकें सिर्फ आर्थिक लाभ का माध्यम नहीं हैं, बल्कि भविष्य के वैश्विक मानक भी तय कर रही हैं, इसलिए इनमें सभी की समान भागीदारी जरूरी है.

भारत के डिजिटल मॉडल और औद्योगिक पहलों को स्वीकृति

घोषणा पत्र में भारत के 'डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर' (DPI) के प्रसार और अनुभव साझा करने पर सहमति बनी. स्वास्थ्य क्षेत्र में प्रशिक्षण केंद्रों और मानसिक स्वास्थ्य नेटवर्क की योजना बनाई गई. साथ ही, लघु उद्योगों और विनिर्माण क्षेत्र को आधुनिक तकनीक से लैस करने के उद्देश्य से भारत में 'ब्रिक्स औद्योगिक दक्षता केंद्र' की स्थापना का स्वागत किया गया.

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व्यावहारिक आर्थिक साझेदारी पर बिजनेस फोरम का ध्यान

ब्रिक्स बिजनेस फोरम को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि यह समूह विश्व की करीब 50% आबादी का प्रतिनिधित्व करता है, इसलिए इसे केवल संवाद तक सीमित न रखकर ठोस आर्थिक साझेदारी का जरिया बनाना होगा. कृषि, स्वच्छ ऊर्जा, एमएसएमई, बुनियादी ढांचे और स्वास्थ्य क्षेत्र में निवेश बढ़ाने के लिए कई ठोस प्रस्ताव रखे गए.

संधारणीय कृषि और स्मार्ट शहरी ढांचे की दिशा में कदम

कृषि को मजबूती देने के लिए प्राकृतिक खेती के सेंटर ऑफ एक्सीलेंस और डिजिटल एग्रीकल्चर नेटवर्क के विस्तार पर सहमति बनी. शहरीकरण की चुनौतियों से निपटने हेतु 'ब्रिक्स अर्बन मोबिलिटी हब' और जलवायु-अनुकूल इन्फ्रास्ट्रक्चर के निर्माण पर काम करने का फैसला हुआ. साथ ही युवाओं, महिला सशक्तिकरण और कौशल विकास को भी प्राथमिक एजेंडे में रखा गया.

भारत मंडपम में सांस्कृतिक संध्या और श्री अन्न का स्वाद

पहले दिन का समापन प्रधानमंत्री द्वारा आयोजित भव्य गाला डिनर के साथ हुआ. दुनिया भर से आए नेताओं का स्वागत भारतीय व्यंजनों और पौष्टिक मोटे अनाजों (श्री अन्न) से बने पकवानों के साथ किया गया. गंभीर राजनीतिक चर्चाओं के बीच इस आयोजन ने राष्ट्राध्यक्षों को भारत की समृद्ध संस्कृति से रूबरू होने और अनौपचारिक बातचीत का अवसर प्रदान किया.

बरगद रोपण: मजबूती और दीर्घकालिक सहयोग का प्रतीक

सम्मेलन स्थल पर सभी नेताओं ने संयुक्त रूप से बरगद का पौधा लगाया. बरगद की सुदृढ़ जड़ें और शाखाएं आपसी एकता, स्थिरता और निरंतरता की परिचायक बनीं. यह पहल 2026 में भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता के मूल मंत्र- लचीलापन, नवाचार और सतत विकास के अनुरूप एकजुटता का सशक्त संदेश देने वाली रही.

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2027 के लिए कमान: चीन को मिली 19वें शिखर सम्मेलन की जिम्मेदारी

शुरुआती सत्र में ही आगामी वर्ष के सम्मेलन की रूपरेखा तय हो गई. वर्ष 2027 में 19वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की अध्यक्षता चीन संभालेगा. शी जिनपिंग ने आश्वस्त किया कि उनका देश ब्रिक्स साझेदारों के साथ मिलकर पश्चिम एशिया और खाड़ी क्षेत्र में अमन-चैन बनाए रखने में सकारात्मक भूमिका निभाएगा.

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