मर्दानगी और महिलाओं पर अत्याचार के मामले में मानसिकता में बदलाव लाना होगा : शोभा डे
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Published at :25 Jan 2015 6:21 AM (IST)
विज्ञापन

जयपुर : जयपुर साहित्य महोत्सव के सत्र ‘‘डांस लाइक ए मैन: रिफिगरिंग मैस्क्यूलिनिटी’ में प्रख्यात लेखिका शोभा डे ने कहा कि ‘‘एक महिला को अपने आप को बचाने के लिए पुरुषों के समान क्यों होना पड़ता है.’’ शोभा डे ने मर्दानगी और महिलाओं के अत्याचार के संबंध में बात करते हुए कहा कि हमें मानसिकता […]
विज्ञापन
जयपुर : जयपुर साहित्य महोत्सव के सत्र ‘‘डांस लाइक ए मैन: रिफिगरिंग मैस्क्यूलिनिटी’ में प्रख्यात लेखिका शोभा डे ने कहा कि ‘‘एक महिला को अपने आप को बचाने के लिए पुरुषों के समान क्यों होना पड़ता है.’’ शोभा डे ने मर्दानगी और महिलाओं के अत्याचार के संबंध में बात करते हुए कहा कि हमें मानसिकता में बदलाव लाना चाहिए. महिलाओं के खिलाफ अत्याचार में मर्दानगी का दिखावा चिंताजनक विषय है और इस पर सबको सोचना होगा.
उन्होंने कहा कि समाज पुरुष और ताकत में एक तरह की समानता देखता है. लेखिका ने कहा, ‘‘हमें अपनी मानसिकता में बदलाव लाने की जरूरत है. पुरुषत्व और स्त्रीत्व का अहसास हमें अपने भीतर होना चाहिए.’’ उन्होंने युवाओं में बढ रहे खुलेपन पर चर्चा करते हुए कहा कि आज का युवा अधिक स्वतंत्र है और जो पसंद हो वैसा करने वाला है. यह बदलाव है और यह एक अच्छी बात है कि वह समाज से अपना स्थान पुन: निर्धारित करने आ रहे हैं.
उन्होंने कहा कि मैं नहीं सोचती कि आज के जमाने में कोई लड़का अपने माता-पिता से जीवन जीने के उस तौर तरीके के बारे में बात करने से नहीं ङिाझकेगा जिसकी मान्यता समाज नहीं देता है. वह यह कहने में भी नहीं ङिाझकेगा कि वह एक समलैंगिक है. मुङो लगता है कि युवा समाज में बातों की स्वीकारोक्ति को बढाने की दिशा में कार्य कर रहा है और इससे समाज में बदलाव आयेगा.
लेखिका शोभा डे ने कहा कि आज के युवा सलमान खान, शाहरुख खान जैसे बालीवुड अभिनेताओं की तरह डांस करना चाहते हैं. मैं मानती हूं कि व्यक्ति को उस तरह से अपना जीवन जीने की चेष्टा करनी चाहिए जिसमें स्वयं को आनंद मिले. चर्चा में लेखिका मुकुल देवा ने कहा कि घरेलू हिंसा की पीड़ित महिलाएं केवल भारत में नहीं बल्कि पूरे विश्व में हैं. उपन्यासकार क्रिसटोस ने कहा कि महिला और पुरुष के बीच का भेदभाव केवल शिक्षा दूर कर सकती है और यह शिक्षा स्कूलों के साथ घरों में भी होनी चाहिए.
एक अन्य सत्र ‘‘व्हाई ए लाइब्रेरी आफ क्लासिकल इंडियन लिटरेचर’’ में संस्कृत के विद्वान शेल्डोन पोलक ने कहा कि संस्कृत भाषाओं को और क्षेत्रों को मिलाने वाली भाषा है. उन्होंने कहा कि संस्कृत दक्षिण एशिया में क्षेत्रीय भाषाओं को जोड़ने का काम करती है. उन्होंने संस्कृत वाक्य ‘‘वसुधैव कुटुम्बकम’’ के बारे में चर्चा करते हुए इसके अर्थ और इसकी उत्पत्ति के बारे में बताया. फिल्म निर्माता गिरीश कर्नाड ने मूर्ति क्लासिकल लाइब्रेरी के बारे में चर्चा करते हुए क्लासिक लिटरेचर लाइब्रेरी के महत्व पर प्रकाश डाला.
प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी
विज्ञापन
लेखक के बारे में
By Prabhat Khabar Digital Desk
यह प्रभात खबर का डिजिटल न्यूज डेस्क है। इसमें प्रभात खबर के डिजिटल टीम के साथियों की रूटीन खबरें प्रकाशित होती हैं।
Prabhat Khabar App :
देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए
विज्ञापन










