बनारस व पूर्वाचल के लिए पीएम मोदी ने खोला अपना खजाना

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बडा लालपुर : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज दो दिवसीय दौरे पर अपने संसदीय क्षेत्र वाराणसी पहुंचे. हवाई अड्डे पर राज्यपाल राम नाइक व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने उनका स्वागत किया. वहां से मुख्यमंत्री बडा लालपुर गांव गये. पीएम ने वहां 50 करोड रुपये की लागत से बुनकरों के लिए शुरू किये गये व्यापार सुविधा केंद्र […]

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बडा लालपुर : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज दो दिवसीय दौरे पर अपने संसदीय क्षेत्र वाराणसी पहुंचे. हवाई अड्डे पर राज्यपाल राम नाइक व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने उनका स्वागत किया. वहां से मुख्यमंत्री बडा लालपुर गांव गये. पीएम ने वहां 50 करोड रुपये की लागत से बुनकरों के लिए शुरू किये गये व्यापार सुविधा केंद्र का उद्घाटन किया. इसके साथ ही उन्होंने विद्युत करघा केंद्र का भी उद्घाटन किया. अगले डेढ दो साल में इस प्रोजेक्ट में डेढ से दो सौ करोड रुपये लगाये जायेंगे.
प्रधानमंत्री मोदी ने शिलान्यास के बाद लोगों को संबोधित करते हुए कहा कि आज मैं अपनों के बीच आया हूं. मुङो बनारस ने अपना बना लिया है. अपनों के बीच आने का आनंद अलग होता है. उन्होंने कहा कि बीच में मैं आना चाहता था, लेकिन आंध्र के तूफान के कारण नहीं आ सका. मैं दो दिन तक आपके प्रतिनिधि, सुख दुख के साथी व सेवक के रूप में आज आपके बीच हूं.
पीएम ने इस दौरान कहा कि कि भारत में कृषि के बाद बुनकरी का पेशा सर्वाधिक रोजगार देने वाला क्षेत्र हैं. उन्होंने कहा कि इस पेशे को नयी जरूरतों के हिसाब से बदलना जरूरी है और आज उसकी शुरुआत बनारस से हो रही है. उन्होंने कहा कि सिर्फ रुपये पैसे से यह काम व बैंक के लोन से होने वाला नहीं है. इसलिए आवश्यक है कि हर छोटे विषय को कैसे डेवलप किया जाये. पीएम ने कहा कि हम इस क्षेत्र में तकनीक को प्रयोग कैसे करे इस पर विचार करेंगे. उन्होंने कहा कि हस्तकरघा चलाने वालों के लिए यह जरूरी नहीं है कि वे बडे संस्थान में पढ कर आयें. सरकार की कोशिश है कि डिजाइनिंग क्षेत्र में इस काम से जुडे नीचले तबके के लोग भी जुट जाते हैं, तो उन्हें इसका लाभ होता है. इससे प्रोडक्शन, डिजाइनिंग, तकनीक में लाभ होता है.
पीएम मोदी ने कहा कि तकनीक का आधुनिकीकरण इस प्रकार से किया जाये कि हम दुनिया का मुकाबला कर सकें. उस दिशा में सरकार ने कदम उठाया है. दूसरा मानव संसाधन का विकास. इस कार्य में लगे मानव श्रम को साइंसटिफिक तरीके से प्रशिक्षित किया जाये. उस काम को हम आगे बढाना चाहते हैं. तीसरी बात कि हमारी नयी पीढी इस क्षेत्र में मजबूरी नहीं गौरव के सात जुडे. यह संभव नहीं है कि उनका पेट भूखा रख कर उन्हें नयी नयी योजनाओं से जोडा जाये.
उन्होंने कहा कि आज हम यह समङों कि पूरे हिंदुस्तान में कोई ऐसी महिला नहीं होगी, जिसके कान में बनारसी साडी शब्द नहीं पडा हो. हमारे पूर्वज ने इस काम को जिस साधना व पवित्रता के साथ किया. हर मां का सपना होता है कि मेरी बेटी शादी में बनारसी साडी पहने. हम इस प्रोडक्शन को इतना बढायें कि भारत का हर परिवार में जितनी बेटियां हैं, उतनी बनारसी साडी खरीदें. उनहोंने कहा कि इस उद्योग के विकास से विदेशी पर्यटक भी इस साडी व यहां के कपडे को खरीदेंगे. उन्होंने इस दौरान पूर्वाचल के कोऑपरेटिव बैंकों के लिए भी आर्थिक सहायता देने का एलान किया.
उन्होंने कहा कि मैं एक बार सालों पहले बोस्टन गया था. मुङो एक गली में ले गये, जो बहुत चौडी नहीं पतली थी, उस गली में मुङो ले गये. यह गली बनारस गली के नाम से जाने जाते हैं. मुङो बताया कि इस गली का नाम बनारस गली है. वह इसलिए क्योंकि विश्वविद्यालय के सारे प्रोफेसर इसी गली में रहते हैं. उन्होंने कहा कि कला, संस्कृति, अध्यात्मक तमाम विविधताएं बनारस के पास हैं.
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