नयी दिल्ली : प्रधानमंत्री बनने के बाद नरेंद्र मोदी ने फरमान जारी किया था कि यूपीए काल का कोई भी अफसर या कर्मचारी मौजूदा सरकार प्रणाली का हिस्सा नहीं बनेगा, लेकिन दो माह के भीतर ही अपने दो मंत्रियों के लिए मोदी ने अपने आदेश में बदलाव कर दिया. पहले फरमान ने देश के गृह मंत्री से उनका सचिव छीन लिया, तो दूसरे फरमान ने वित्त मंत्री को अपना सचिव रखने पर राहत दे दी.
10 जून को पीएम मोदी ने आदेश दिया था कि यूपीए सरकार के दौर के नौकरशाहों को मोदी सरकार में न रखा जाये. इसका असर भी हुआ. कई मंत्रियो को अपने सेक्रेटरी तक को बदलना पड़ा. गृह मंत्री राजनाथ सिंह भी अपने चहेते नौकरशाह को नहीं रख पाये, लेकिन आठ जुलाई को जारी निर्देश में कहा गया कि यूपीए सरकार में लोकसभा और राज्यसभा में विपक्ष के नेताओं पर पहलेवाला फरमान लागू नहीं होता है.
* क्यों पड़ी जरूरत
इस नियम में सुधार की जरूरत क्यों पड़ी यह भी सस्पेंस है. हालांकि, राजनीतिक गलियारे में माना जा रहा है कि जेटली अपने पुराने सचिव को साथ रखना चाहते थे, तो पुराने फरमान को बदलना पड़ा. वैसे इससे कुछ लाभ उन मंत्रियो को भी हो गया, जिन्हें पहले फरमान के बाद ड्राइवर और चपरासी तक को बदलना पड़ रहा था.