पीओके के रास्ते चीन-पाकिस्तान के बीच रेल सेवा!

Updated at : 29 Jun 2014 11:55 AM (IST)
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पीओके के रास्ते चीन-पाकिस्तान के बीच रेल सेवा!

एक तरफ ‘पंचशील’ समझौते की 60वीं वर्षगांठ समारोह के उपलक्ष्य में बीजिंग में बैठक चल रही है, जहां भारत-चीन बेहतर रिश्ते बनाने की बात कह रहे हैं. दूसरी तरफ चीन अपने पड़ोसी धर्म का उल्लंघन कर रहा है. लद्दाख क्षेत्र में चीनी सैनिकों की कथित घुसपैठ के बीच खबर है कि चीन और पाकिस्तान की […]

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एक तरफ ‘पंचशील’ समझौते की 60वीं वर्षगांठ समारोह के उपलक्ष्य में बीजिंग में बैठक चल रही है, जहां भारत-चीन बेहतर रिश्ते बनाने की बात कह रहे हैं. दूसरी तरफ चीन अपने पड़ोसी धर्म का उल्लंघन कर रहा है. लद्दाख क्षेत्र में चीनी सैनिकों की कथित घुसपैठ के बीच खबर है कि चीन और पाकिस्तान की बीच रेल पटरी बिछेगी, जो पाक अधिकृत कश्मीर से होकर गुजरेगी. परियोजना के अध्ययन के लिए धन भी आवंटित किया जा चुका है, पर भारत को इसके लिए विश्वास में नहीं लिया गया, जबकि भारत पीओके को अपना हिस्सा मानता है.

चीन के काशगर से पाकिस्तान के ग्वादार बंदरगाह के बीच रेल लाइन
चीन ने अंतरराष्ट्रीय रेल लाइन से अपने सीमावर्ती प्रांत शिनजिआंग को पाकिस्तान से जोड़ने को लेकर कथित तौर पर शुरुआती शोध अध्ययन पर कार्य शुरू किया है. आश्चर्य की बात है कि यह रेल लाइन पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (पीओके) से होकर गुजरेगी. इस परियोजना को लेकर भारत को एतराज हो सकता है. चीन ने अपने पश्चिमी शहर शिनजिआंग के काशगर से पाकिस्तान के ग्वादार बंदरगाह को जोड़ने वाली रेल लाइन के निर्माण के लिए शुरुआती अध्ययन कराने को लेकर कोष आवंटित किया है. समाचार पत्र चाइना डेली ने शिनजिआंग के क्षेत्रीय विकास तथा सुधार आयोग झांग चुनलिन के हवाले से यह खबर दी है. -इस बीच शिनजिआंग की राजधानी यरुमक्वी में ‘सिल्क रोड इकोनामिक बेल्ट’ पर आयोजित अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में झांग ने कहा कि 1,800 किलोमीटर चीन-पाकिस्तान रेलवे लाइन पाकिस्तान की राजधानी इसलामाबाद तथा कराची के रास्ते गुजारने की भी योजना है. पाकिस्तान में चरमपंथियों के हमलों का हवाला देते हुए कहा कि प्रतिकूल माहौल व जटिल भौगोलिक स्थिति के कारण लाइन के निर्माण की लागत ऊंची है, लेकिन अध्ययन पहले ही शुरू किया जा चुका है.

भारतीय सैनिकों ने धकेला पीछे
चीन की सेना द्वारा भारतीय क्षेत्र में कथित तौर पर घुसपैठ करने का मामला सामने आया है. हालांकि, भारतीय सैनिकों ने उन्हें वापस जाने के लिए मजूबर दिया. एक अंगरेजी दैनिक की रिपोर्ट के मुताबिक 24 जून को चीन की पीपुल्स लिब्रेशन आर्मी के जवान भारतीय सीमा में साढ़े पांच किलोमीटर अंदर घुस आये. चीनी सैनिकों ने यह घुसपैठ खारे पानी की झील पेंगोंग के माध्यम से की. वे झील के भारतीय क्षेत्र में घुसते चले आये. उल्लेखनीय है कि चीन इस जल क्षेत्र पर अपना दावा करता रहा है. झील का बड़ा हिस्सा चीनी नियंत्रण वाले तिब्बत इलाके में आता है. रिपोर्ट के मुताबिक चीनी सैनिक बोट पर सवार होकर आये थे. चीनी सैनिक हाई स्पीड इंटरसेप्टर बोट्स में सवार थे. बाद में इंटरसेप्टर बोट्स में सवार भारतीय सेना की टुकड़ी ने उन्हें पीछे जाने को विवश किया.

हमारे साझा हितों का वजन मतभेदों से ज्यादा : उप राष्ट्रपति
उप राष्ट्रपति हामिद अंसारी ने कहा है कि भारत और चीन को शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व के पांच सिद्धांतों ‘पंचशील’ की क्षमता का दोहन करते हुए मतभेदों को कम करना होगा. एकजुटता की बुनियाद पर रिश्तों का निर्माण होगा. शनिवार को ‘पंचशील’ की 60वीं वर्षगांठ की स्मृति बैठक को संबोधित करते हुए अंसारी ने कहा कि हमारे द्विपक्षीय संबंधों में साझा हितों का हमारे मतभेदों से कहीं ज्यादा वजन है. आगे बढ़ने के लिए हमें एकजुटता के बुनियाद पर रिश्तों का निर्माण और मतभेदों को दूर करना होगा. पंचशील सहयोग तथा लोगों के जीवन को सुधार के लिए नवोन्मेशी कदम उठाने के लिए इस क्षमता का दोहन करने में मदद कर सकता है. बैठक में चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग और उनके म्यामां के समकक्ष थेन सीन भी शामिल हुए. पंचशील की शुरुआत पूर्व प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरु तथा उनके तत्कालीन चीन समकक्ष चाउ एनलाई ने की थी. इसमें म्यामां भी भागीदार रहा है.

इतिहास से सबक लेकर सीमा सुरक्षा को बनाएं मजबूत
चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने सेना से कहा कि देश की भूमि और जल सीमा की सुरक्षा के लिए वह एक मजबूत और अटूट तंत्र बनाये ताकि विदेशी ताकतों की ‘धमकियों’ का प्रतिरोध किया जा सके. शी ने कहा कि हम चीन के आधुनिक इतिहास के उस दौर को भूल नहीं सकते जब देश दीन-हीन और कमजोर था. हर कोई धमकाने का प्रयास करता था. विदेशी आक्रांताओं ने चीन की भूमि और समुद्री सुरक्षा का सैकड़ों बार अतिक्रमण कर चीन को दुखों के रसातल में भेजा है. हमें एक मजबूत सीमा सुरक्षा तैयार करना है. वर्तमान में चीन पूर्व चीन सागर में जापान के साथ और दक्षिण चीन सागर में वियतनाम, फिलीपीन, मलेशिया और ब्रुनेई के साथ समुद्री विवादों में उलझा हुआ है. एक चीनी अधिकारी के अनुसार चीन ने अपने 14 पड़ोसियों में से 12 के साथ सीमा विवाद को सुलझा लिया है सिवाय भारत और भूटान के.

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