सरकार के रुख से सुब्रमण्यम नाराज,कहा,सुप्रीम कोर्ट का जज नहीं बनना

Updated at : 25 Jun 2014 5:09 PM (IST)
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सरकार के रुख से सुब्रमण्यम नाराज,कहा,सुप्रीम कोर्ट का जज नहीं बनना

नयी दिल्लीः वरिष्ठ अधिवक्ता और भारत के पूर्व सॉलिसिटर जनरल गोपाल सुब्रह्मण्यम ने आज सुप्रीम कोर्ट का जज बनने से इनकार कर दिया. इन्होंने प्रधान न्यायाधीश से आग्रह किया कि उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश के तौर पर उनकी उम्मीदवारी की सिफारिश वापस ले ली जाए. उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश पद पर नियुक्ति की दौड से […]

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नयी दिल्लीः वरिष्ठ अधिवक्ता और भारत के पूर्व सॉलिसिटर जनरल गोपाल सुब्रह्मण्यम ने आज सुप्रीम कोर्ट का जज बनने से इनकार कर दिया. इन्होंने प्रधान न्यायाधीश से आग्रह किया कि उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश के तौर पर उनकी उम्मीदवारी की सिफारिश वापस ले ली जाए.

उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश पद पर नियुक्ति की दौड से हटने के बाद प्रमुख वकील गोपाल सुब्रमण्यम ने आज नरेन्द्र मोदी सरकार पर हमला बोला और आरोप लगाया कि उनकी नियुक्ति को निष्फल बनाने के लिये सरकार ने उनके खिलाफ ‘गंदगी’ खोजने का सीबीआई को आदेश दिया.

सोहराबुद्दीन शेख मुठभेड कांड में उच्चतम न्यायालय की मदद करने वाले सुब्रमण्यम ने कहा कि उनकी स्वतंत्रता और ईमानदारी की वजह से ही उन्हें ‘निशाना बनाया गया.

सुब्रह्मण्यम के कार्यालय ने बताया कि उन्होंने प्रधान न्यायाधीश आरएम लोढ़ा की अध्यक्षता वाले उच्चतम न्यायालय के कॉलेजियम को पत्र लिखकर उन्हें उच्चतम न्यायालय का न्यायाधीश बनाने के लिए की गयी सिफारिश वापस लेने का अनुरोध किया है.

पिछली यूपीए सरकार के कार्यकाल में 56 वर्षीय सुब्रह्मण्यम 2009-11 तक सॉलिसिटर जनरल रहे. उन्होंने वर्तमान एनडीए सरकार के उस फैसले पर निराशा व्यक्त की है जिसमें कॉलेजियम से उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश के तौर पर उनके नाम पर पुनर्विचार करने को कहा गया जबकि तीन और लोगों की उम्मीदवारी के प्रस्ताव मंजूर कर लिए गए हैं.

गौरतलब है कि कॉलेजियम की सिफारिश पर जजों की नियुक्ति जल्द ही राष्ट्रपति भवन से होने वाली है.

सुब्रह्मण्यम ने क्यों किया जज बनने से इनकार

जानकारी के मुताबिक गोपाल सुब्रमण्यम का नाम उस पैनल में था जिनसे सुप्रीम कोर्ट में जज नियुक्त किया जाना था. किन्तु एनडीए सरकार ने सत्ता में आते ही चीफ जस्टिस से सुब्रमण्यम के नाम पर दोबारा विचार करने के लिए कहा. सुब्रमण्यम की नियुक्ति यूपीए सरकार ने की थी, ऐसे में माना जा रहा है कि मोदी सरकार सुब्रमण्यम की नियुक्ति के पक्ष में नहीं है जबकि सरकार ने तीन अन्य नामों- कोलकाता हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस अरुण मिश्रा, उड़ीसा हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस आदर्श कुमार गोयल और सीनियर एडवोकेट रोहिंटन नारिमन पर अपनी सहमति दे दी.

मौजूदा सरकार को क्यों आपत्ति है सुब्रह्मण्यम के नाम पर

एनडीए सरकार गोपाल सुब्रमण्यम के नाम पर आपत्ति इसलिए कर रही है कि सोहराबुद्दीन फर्जी एनकाउंटर केस से उनका कुछ संबंध है. दरअसल, सुब्रमण्यम सोहराबुद्दीन फर्जी एनकाउंटर केस में एमिकस क्यूरी नियुक्त किए गये थे.

इस तरह के आरोप लगाये जाते हैं कि यूपीए सरकार के कहने पर सुब्रमण्यम ने ऐसी रिपोर्ट कोर्ट को सौंपी, जिससे कोर्ट ने सीबीआई जांच के आदेश दे दिए थे. इस मामले में नरेंद्र मोदी के सहयोगी रहे अमित शाह पर भी उंगलियां उठी थीं. एक रिपोर्ट के मुताबिक, 2जी स्पेक्ट्रम आवंटन मामले में सुब्रमण्यम के कुछ कंपनियों से भी पेशेवर रिश्ते थे, जबकि वे उस वक्त सरकार के अटार्नी नियुक्त थे.

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