न्यू इयर पर पब्स में सुरक्षा को तैनात होंगी फीमेल बाउंसर्स, जिन्हें महिलाओं से बदतमीजी बर्दाश्त नहीं
Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 01 Jan 2019 5:38 AM
पुणे : नये साल पर पूरे देश में जहां हर ओर लोग जश्न के लिए रेस्त्रां, पब या बार की ओर रुख कर रहे हैं. इस बीच उनकी सुरक्षा की जिम्मेदारी भी अहम मसला है. इस साल पुणे के तमाम रेस्त्रां और बार में महिलाओं की सुरक्षा महिला बांउंसरों के जिम्मे है. अमूमन पुरुष बाउंसर्स […]
पुणे : नये साल पर पूरे देश में जहां हर ओर लोग जश्न के लिए रेस्त्रां, पब या बार की ओर रुख कर रहे हैं. इस बीच उनकी सुरक्षा की जिम्मेदारी भी अहम मसला है. इस साल पुणे के तमाम रेस्त्रां और बार में महिलाओं की सुरक्षा महिला बांउंसरों के जिम्मे है.
अमूमन पुरुष बाउंसर्स के साथ व्यवस्था को सुचारु रूप से चलाने वाले कई बार मैनेजरों ने इस बार पुणे की स्वामिनी लेडी बाउंसर्स कंपनी फर्म को सुरक्षा का कामकाज सौंपा है. सुरक्षा के लिहाज से नियुक्त की गयी एजेंसी में तमाम ऐसी घरेलू महिलाओं ने भी बाउंसर के रूप में नौकरी शुरू की है, जो कि अब तक पारिवारिक वजहों से घर के बाहर काम करने में कतराती थीं. स्वामिनी लेडी बाउंसर्स (एसएलबी) नाम की इस फर्म की शुरुआत पुणे में रहने वाली एक ब्यूटिशियन अमिता कदम ने की है.
दो साल पहले शुरू हुई इस कंपनी ने पांच कर्मचारियों के साथ शुरू हुए अपने स्टार्टअप में अब तक कुल 50 महिलाओं को बाउंसर के रूप में रोजगार दिया है. इस फर्म की तमाम महिला बाउंसर अब पुणे शहर के पब्स, होटेल और रेस्त्रां में काम करती हैं. अमिता कदम का कहना है कि उन्होंने अपने स्टार्टअप के जरिये न सिर्फ इन घरेलू महिलाओं को रोजगार दिया है, बल्कि उन्हें सेल्फ डिफेंस, प्रबंधन और कम्युनिकेशन की ट्रेनिंग दे कर आत्मनिर्भर भी बनाया है.
महिलाओं से बदतमीजी बर्दाश्त नहीं
एसएलबी को स्टार्ट करनेवाली अमिता का कहना है कि वह महिलाओं को हिंसा के लिए प्रेरित नहीं करतीं, लेकिन अगर कोई महिला से बदतमीजी करता है तो एसएलबी की बाउंसर्स इसका विरोध करती हैं. कदम का कहना है कि एसएलबी की महिला सदस्य शाम की शिफ्ट में होटेल्स और पब्स के लिए काम करती हैं, जबकि दिन में खाली समय के लिए उन्होंने दूसरी नौकरी को चुन रखा है. एसएलबी की सदस्य कालंदी यहां एक स्कूल बस अटेंडेंट के तौर पर काम करती हैं.
नौकरी के लिए परिवार को राजी करना मुश्किल
कंपनी में काम करने वाली आरती का कहना है कि महिला बाउंसर के रूप में नौकरी शुरू करने से पहले उनके पति इसके लिए राजी नहीं थे. लेकिन जब उन्होंने नौकरी करने की इच्छा जाहिर की तो अमिता कदम ने खुद घर जाकर उनके पति को इसके लिए राजी किया. आरती के मुताबिक, अमिता ने इस मुलाकात के दौरान उनके ससुराल के लोगों को भी इस काम के महत्व को बताया और उनकी पूरी सुरक्षा की जिम्मेदारी भी ली.
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