नौकरी है, जिंदगी नहीं ! क्यों जल्दी Job छोड़ रही है आज की Gen Z?
लैपटॉप लिए हुए लड़की की सांकेतिक तस्वीर , PC - AI
Why Gen Z Quits Jobs: आज की Gen Z नौकरी को सिर्फ सैलरी तक सीमित नहीं रखती. ग्रोथ, सम्मान और वर्क-लाइफ बैलेंस भी इनके लिए जरूरी हैं. आखिर क्यों यह पीढ़ी बेहतर मौके तलाशती है, आइए जानते हैं.
Why Gen Z Quits Jobs: बस 3 महीने ही तो हुए हैं… लेकिन अब रोज ऑफिस जाने का मन ही नहीं करता” अगर ये लाइन आज की Gen Z के मुंह से सुनकर आपको लगता है कि "भाई, इतनी जल्दी क्या है नौकरी छोड़ने की?" तो ठहरिए… मामला सिर्फ जल्दी हार मान लेने का नहीं है. आज की Gen Z का नौकरी को लेकर फंडा थोड़ा अलग है. इनके लिए "जॉब मिल गई, अब चाहे कुछ भी हो, सालों तक यहीं पड़े रहो" वाला सीन अब पुराना हो चुका है. काम अच्छा है तो ठीक, वरना "दूसरा ऑप्शन देखते हैं" वाला माइंडसेट ज्यादा कॉमन है. ऑफिस में हर दिन स्ट्रेस, बॉस का अननेसेसरी प्रेशर, ग्रोथ का कोई सीन नहीं और ऊपर से वर्क-लाइफ बैलेंस भी जीरो? फिर Gen Z का सीधा सवाल होता है- "भाई, क्यों झेलें?" पिछली पीढ़ी नौकरी छोड़ने से पहले दस बार सोचती थी- "अगली नौकरी मिलेगी भी या नहीं?" लेकिन Gen Z थोड़ा अलग सोचती है- "अगर यहां खुश ही नहीं हूं, तो कुछ बेहतर ढूंढने में प्रॉब्लम क्या है?" और यही चीज उन्हें "job hopper” से लेकर "impatient generation" तक के टैग दिला रही है. लेकिन क्या Gen Z सच में इतनी impatient है? या फिर इस पीढ़ी ने बस इतना समझ लिया है कि सैलरी जरूरी है, लेकिन मेंटल पीस के बदले नहीं? आखिर क्यों Gen Z नौकरी में टिके रहने से ज्यादा सही जगह पर काम करने को तवज्जो दे रही है, इसकी कहानी सिर्फ नखरों की नहीं, बल्कि बदलती सोच की है.
सिर्फ सैलरी नहीं, अब सुकून भी जरूरी है
Gen Z के लिए नौकरी का मतलब सिर्फ हर महीने खाते में पैसे आना नहीं है. ये जनरेशन ये भी देखती है कि काम करने के बाद उसके पास अपनी जिंदगी के लिए कितना वक्त और एनर्जी बच रही है. अगर रोज का काम इतना थका दे कि ऑफिस से घर पहुंचने के बाद किसी से बात करने या अपनी पसंद का काम करने का भी मन न करे, तो ऐसी नौकरी पर सवाल उठना लाजिमी है. यही वजह है कि आज की युवा पीढ़ी नौकरी चुनते समय सैलरी के साथ-साथ काम का माहौल, छुट्टियां, काम के घंटे और आगे बढ़ने के मौकों को भी काफी महत्व देती है.
"बस सहते रहो" वाला फंडा अब नहीं चलता
दिल्ली में एक मल्टीनेशनल कंपनी में काम करने वाली 24 साल की नंदिता ये बताती हैं कि पिछली पीढ़ी में नौकरी को लेकर एक सोच काफी आम थी- "हर ऑफिस में थोड़ी बहुत परेशानी होती है, एडजस्ट कर लो." बॉस का गुस्सा हो, ज्यादा काम हो या मनपसंद काम न मिले, लोग काफी समय तक उसे सहते रहते थे. नौकरी छोड़ना आखिरी विकल्प माना जाता था.
Gen Z इस सोच को थोड़ा अलग तरीके से देखती है. इनके लिए अगर किसी जगह पर लगातार परेशानी हो रही है और हालात बदलने की उम्मीद भी नहीं दिख रही, तो वहां सिर्फ इसलिए टिके रहना जरूरी नहीं कि लोग क्या कहेंगे. इनका फंडा काफी सीधा है- जहां सीखने, बढ़ने और ठीक से काम करने का मौका नहीं मिल रहा, वहां बदलाव क्यों न किया जाए?
काम के साथ अपनी जिंदगी भी चाहिए
सुबह ऑफिस, शाम तक काम और फिर घर आकर अगले दिन की चिंता- ये रुटीन Gen Z को ज्यादा लंबे समय तक पसंद नहीं आती. आज की युवा पीढ़ी चाहती है कि नौकरी के साथ उसके पास दोस्तों, परिवार, घूमने-फिरने, शौक और खुद के लिए भी समय हो. अगर नौकरी की वजह से पूरी जिंदगी सिर्फ ऑफिस और घर के बीच सिमट जाए, तो वे दूसरी जगह तलाशने के बारे में सोचने लगते हैं. यानी काम जिंदगी का हिस्सा है, पूरी जिंदगी नहीं.
बढ़ने का मौका नहीं मिला तो रास्ता बदल देंगे
Gen Z को एक ही जगह सालों तक काम करने से ज्यादा जरूरी लगता है कि वह कुछ नया सीख रही है या नहीं. मान लीजिए कोई व्यक्ति एक ही पद पर दो-तीन साल से काम कर रहा है. जिम्मेदारियां बढ़ती जा रही हैं, लेकिन पद, वेतन या सीखने के मौके में कोई खास बदलाव नहीं है. ऐसे में Gen Z के मन में सवाल आना स्वाभाविक है- “जब आगे कुछ दिख ही नहीं रहा तो यहां और कितना रुकना है?” यही सोच नौकरी बदलने की एक बड़ी वजह बन सकती है.
बॉस से डरकर काम करने का जमाना गया
पहले ऑफिस में बॉस की बात को चुनौती देना आसान नहीं माना जाता था. लेकिन आज की युवा पीढ़ी काम की जगह पर सम्मान और बातचीत को भी जरूरी मानती है. हर छोटी बात पर डांट पड़ना, बेवजह दबाव बनाना या कर्मचारी की बात को लगातार नजरअंदाज करना- ऐसा माहौल Gen Z को जल्दी परेशान कर सकता है. इनके लिए अच्छा बॉस वो नहीं जो सबसे ज्यादा डराए, बल्कि वो है जिसके साथ काम करते हुए कुछ सीखने को मिले.
नौकरी छोड़ना अब "बड़ी हार" नहीं लगता
पहले नौकरी छोड़ने के साथ कई तरह के डर जुड़े होते थे. परिवार क्या सोचेगा, लोग क्या कहेंगे और अगली नौकरी कब मिलेगी- इन सवालों की वजह से लोग खराब नौकरी में भी टिके रहते थे. अब हालात थोड़े बदले हैं. नौकरी के विकल्प बढ़े हैं, घर से काम करने के मौके हैं और अलग-अलग कंपनियों में काम करने का चलन भी बढ़ा है. इसलिए Gen Z के लिए नौकरी बदलना हमेशा असफलता का संकेत नहीं होता. कई बार इस्तीफा देना इनके लिए "मैं हार गया" नहीं, बल्कि "अब मुझे कुछ और बेहतर करना है" वाला फैसला होता है.
पैसे भी चाहिए और अपनी कीमत भी
ये कहना गलत होगा कि Gen Z को पैसे की परवाह नहीं होती. बिल्कुल होती है. बल्कि फाइनेंशियल इंडिपेंडेंस इनके लिए काफी जरुरी है. लेकिन सिर्फ पैसे के लिए खराब माहौल में टिके रहना इन्हें पसंद नहीं आता. अगर दूसरी जगह बेहतर वेतन के साथ सीखने और आगे बढ़ने का मौका मिल रहा है, तो नौकरी बदलने में इन्हें ज्यादा परेशानी नहीं होती. मतलब साफ है- "कमाई चाहिए, लेकिन अपनी वैल्यू से समझौता करके नहीं."
सोशल मीडिया ने भी सोच बदल दी है
Gen Z ने सोशल मीडिया के दौर में करियर की दुनिया को काफी करीब से देखा है. लोग अपनी नौकरी, कमाई, काम करने के तरीके और करियर की उपलब्धियां खुले तौर पर साझा करते हैं. इससे युवाओं को अलग-अलग करियर विकल्पों के बारे में पहले से ज्यादा जानकारी मिलती है. उन्हें पता चलता है कि एक ही तरह की नौकरी के अलावा भी कई रास्ते हो सकते हैं. यही चीज उन्हें बदलाव को लेकर थोड़ा ज्यादा सहज बनाती है.
लेकिन हर बार नौकरी छोड़ना सही फैसला नहीं
यहां एक बात समझना भी जरूरी है कि हर छोटी परेशानी पर नौकरी छोड़ देना समझदारी नहीं है. कभी-कभी नई जगह पर भी वही दिक्कतें सामने आ सकती हैं. इसलिए इस्तीफा देने से पहले अपनी आर्थिक स्थिति, अगली नौकरी, करियर की दिशा और असली परेशानी के बारे में सोचना जरूरी है. अगर समस्या सिर्फ किसी एक खराब दिन की है, तो थोड़ा इंतजार किया जा सकता है. लेकिन अगर महीनों से वही परेशानी बनी हुई है और सुधार की कोई उम्मीद नहीं है, तो बदलाव पर विचार करना गलत भी नहीं.
आखिर Gen Z इतनी जल्दी नौकरी क्यों छोड़ती है?
असल में बात सिर्फ "Gen Z में पेशेंस कम है" वाली नहीं है. इस जनरेशन की प्रायोरिटीज ही थोड़ी अलग हैं. इनके लिए नौकरी में पैसा जरूरी है, लेकिन उसके साथ सम्मान, सीखना, आगे बढ़ना, अपनी जिंदगी के लिए समय और मेंटल हेल्थ भी मायने रखता है. पिछली पीढ़ी ने मुश्किल हालात में टिके रहना सीखा था, जबकि Gen Z ने जरूरत पड़ने पर रास्ता बदलना सीखा है. और शायद इसी अंतर को समझे बिना Gen Z को सिर्फ "जल्दी नौकरी छोड़ने वाली पीढ़ी" कहना पूरी कहानी नहीं बताता. क्योंकि इनका फंडा आखिर में इतना ही है- "नौकरी मेरे लिए है, मैं सिर्फ नौकरी के लिए नहीं."
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