एक साथ की पढ़ाई, एक साथ दूसरे प्रयास में क्रैक किया NEET, नवादा के भाई-बहन की कहानी
रितेश और ऋचा
Brother Sister NEET Success Story: नवादा के रितेश और ऋचा ने साबित किया कि जब भाई-बहन एक-दूसरे की ताकत बन जाएं तो सपनों को पूरा किया जा सकता है. दोनों ने साथ पढ़ाई की और नीट के दूसरे प्रयास में साथ में सफलता हासिल की. इस भाई-बहन की कहानी दिखाती है कि रिश्ते में प्यार और मजबूती हो तो साथ-साथ बहुत कुछ हासिल किया जा सकता है.
Brother Sister NEET Success Story: भाई-बहन का रिश्ता साथ, प्यार, नोकझोंक के लिए जाना जाता है. लेकिन अगर भाई-बहन चाह लें तो साथ मिलकर सपनों को पूरा किया जा सकता है. बिहार के नवादा जिले के रितेश कुमार और उनकी बहन ऋचा ने कुछ ऐसा ही कर दिखाया है. दोनों भाई-बहन ने अपने दूसरे प्रयास में एक साथ NEET UG परीक्षा क्रैक कर परिवार का नाम रोशन किया है. दोनों ने साथ पढ़ाई की, एक-दूसरे का हौसला बढाया और आखिरकार उनकी मेहनत रंग लाई. रक्षा बंधन स्पेशल (Raksha Bandhan Special) सीरिज के एपिसोड -3 में आज इन नीट टॉप (NEET Topper Brother Sister) करने वाले भाई-बहन की स्टोरी जानेंगे.
भाई ने 655 तो बहन ने हासिल किए 622 मार्क्स
नवादा जिले के पकरीबरावां थाना क्षेत्र के बाजितपुर गांव के रहने वाले रितेश कुमार ने NEET में 655 अंक हासिल किए हैं. उनकी ऑल इंडिया रैंक 1160 रही. वहीं उनकी बहन ऋचा ने 622 अंक हासिल कर AIR 4685 प्राप्त की है.
दोनों भाई-बहन ने NEET की तैयारी राजस्थान के कोटा में रहकर की. यह उनका दूसरा प्रयास था और इस बार दोनों ने एक साथ मेडिकल प्रवेश परीक्षा में सफलता हासिल कर ली.
छठी कक्षा से कोटा में रहकर की पढ़ाई
रितेश और ऋचा ने छठी कक्षा से ही कोटा में रहकर पढ़ाई शुरू कर दी थी. बच्चों की पढ़ाई के लिए परिवार ने भी पूरा साथ दिया. उनकी मां और दादा बच्चों के साथ कोटा में रहते थे, जबकि पिता बिहार में रहकर अपना बिजनेस संभालते थे.
परिवार से दूर रहकर बच्चों की पढाई आसान नहीं थी, लेकिन माता-पिता ने उनके सपने को पूरा करने के लिए हर संभव कोशिश की. आज जब दोनों भाई-बहन ने NEETमें सफलता हासिल की है तो परिवार की खुशी का ठिकाना नहीं है.
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भाई-बहन ने साथ बैठकर की 12-13 घंटे पढ़ाई
NEET की तैयारी के दौरान रितेश और ऋचा ने खूब मेहनत की. वे रोजाना करीब 12 से 13 घंटे पढाई करते थे. कोचिंग की क्लास के अलावा 6-7 घंटे सेल्फ स्टडी पर भी ध्यान देते थे. दोनों भाई-बहन साथ पढ़ते थे और तैयारी के दौरान एक-दूसरे का हौसला भी बढ़ाते थे. उन्होंने सोशल मीडिया से भी दूरी बनाकर रखी, ताकि पढ़ाई पर पूरा फोकस रहे.
दूसरे प्रयास में मिली सफलता
पहले प्रयास में मनचाही सफलता नहीं मिलने के बाद दोनों ने हार नहीं मानी. उन्होंने अपनी कमियों को समझा और दूसरे प्रयास में और बेहतर तैयारी के साथ परीक्षा दी. साल 2026 में दोनों नीट यूजी परीक्षा में सफलता हासिल की.
भाई-बहन का साथ बना सबसे बड़ी ताकत
रितेश और ऋचा की कहानी सिर्फ NEET में सफलता की कहानी नहीं है. यह उस भाई-बहन के रिश्ते की कहानी भी है, जहां दोनों ने एक-दूसरे का साथ दिया और मुश्किल समय में हिम्मत बढाई. साथ पढ़े, साथ मेहनत की और अब साथ ही सफलता का जश्न मना रहे हैं.
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