JNU प्रोफेसर अंगोमचा बिमोल अकोइजम को हाईकोर्ट से राहत, बर्खास्तगी के आदेश पर लगी रोक, जानें पूरा मामला
जेएनयू प्रोफेसर अंगोमचा बिमोल अकोइजम और हाईकोर्ट की सांकेतिक तस्वीर.
JNU Professor Angomcha Bimol Akoijam: यौन उत्पीड़न की शिकायतों के बाद जेएनयू से बर्खास्त किए गए प्रोफेसर अंगोमचा बिमोल अकोइजम को दिल्ली हाईकोर्ट से राहत मिली है. कोर्ट ने बर्खास्तगी के आदेश पर रोक लगाते हुए विश्वविद्यालय से जवाब मांगा है.
JNU Professor Angomcha Bimol Akoijam: जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) के प्रोफेसर और कांग्रेस सांसद अंगोमचा बिमोल अकोइजम को दिल्ली हाईकोर्ट से बड़ी राहत मिली है. सोमवार, 2 नवंबर को अदालत ने यौन उत्पीड़न की शिकायतों के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से जारी उनके बर्खास्तगी आदेश पर रोक लगा दी. कोर्ट ने इस मामले में जेएनयू प्रशासन को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है. अब इस मामले की अगली सुनवाई जनवरी में होगी.
दिल्ली हाईकोर्ट ने जेएनयू प्रशासन से मांगा जवाब
न्यायमूर्ति अनूप जे. भंभानी की पीठ ने प्रोफेसर अकोइजम की याचिका पर सुनवाई करते हुए बर्खास्तगी के आदेश पर रोक लगाई. अकोइजम ने विश्वविद्यालय के इस फैसले को अदालत में चुनौती दी थी. कोर्ट ने जेएनयू को नोटिस जारी किया है और मामले को जनवरी में आगे की सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया है.
11 छात्राओं ने दर्ज कराई थीं शिकायतें
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, मई 2026 में कम से कम 11 छात्राओं ने प्रोफेसर अकोइजम के खिलाफ यौन उत्पीड़न की शिकायत दर्ज कराई थी. शिकायतकर्ताओं का आरोप था कि प्रोफेसर ने बैठक करने के बहाने छात्राओं को कैंपस में स्थित अपने आवास पर बुलाया और उनके साथ यौन उत्पीड़न करने की कोशिश की. कुछ छात्राओं ने कक्षा के दौरान अश्लील और अनुचित टिप्पणियां करने का भी आरोप लगाया था.
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9 अक्टूबर को जेएनयू ने किया था बर्खास्त
शिकायतों के बाद जेएनयू प्रशासन ने 9 अक्टूबर को प्रोफेसर अकोइजम को सेवा से बर्खास्त कर दिया था. विश्वविद्यालय की कुलपति शांतिश्री डी. पंडित के हस्ताक्षर वाले आदेश में कहा गया था कि आंतरिक शिकायत समिति (ICC) ने पूरे मामले की जांच की थी. समिति के निष्कर्षों के आधार पर अनुशासनात्मक कार्रवाई की सिफारिश की गई थी. इसके बाद विश्वविद्यालय ने बर्खास्तगी का फैसला लिया था.
कांग्रेस सांसद ने आरोपों को किया खारिज
अंगोमचा बिमोल अकोइजम इनर मणिपुर लोकसभा सीट से कांग्रेस के सांसद हैं. वह जेएनयू के सामाजिक विज्ञान संस्थान में प्रोफेसर के पद पर कार्यरत थे. उन्होंने अपने ऊपर लगाए गए सभी आरोपों को खारिज किया है. अब दिल्ली हाईकोर्ट के आदेश के बाद बर्खास्तगी से जुड़े इस मामले में आगे की कानूनी प्रक्रिया जनवरी में होने वाली सुनवाई के दौरान आगे बढ़ेगी.
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