Govardhan Puja: देश के इन 6 राज्यों में अलग-अलग अंदाज में मनाई जाती है गोवर्धन पूजा

Updated:
1 / 7
गोवर्धन पूजा देश के अलग-अलग राज्यों में अलग-अलग परंपराओं के साथ मनाई जाती है. कहीं गोबर से गोवर्धन पर्वत बनाया जाता है, तो कहीं अन्नकूट उत्सव और पशुधन की पूजा होती है. जानें 6 राज्यों में इस पर्व को मनाने का खास अंदाज.
फुल स्क्रीन में देखें

गोवर्धन पूजा देश के अलग-अलग राज्यों में अलग-अलग परंपराओं के साथ मनाई जाती है. कहीं गोबर से गोवर्धन पर्वत बनाया जाता है, तो कहीं अन्नकूट उत्सव और पशुधन की पूजा होती है. जानें 6 राज्यों में इस पर्व को मनाने का खास अंदाज.

WhatsApp चैनल से जुड़ेंगूगल पर प्रभात खबर चुनें
विज्ञापन
2 / 7
ब्रज की 21 किलोमीटर परिक्रमा
फुल स्क्रीन में देखें

गोवर्धन पूजा की इंफोग्राफिक्स प्रतीकात्मक तस्वीर (फोटो-एआई)

ब्रज की 21 किलोमीटर परिक्रमा

मथुरा, वृंदावन और गोवर्धन में गोवर्धन पूजा का विशेष महत्व है. इस अवसर पर देश के अलग-अलग हिस्सों से श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं और गोवर्धन पर्वत की करीब 21 किलोमीटर लंबी परिक्रमा करते हैं. मान्यता है कि गोवर्धन पर्वत की परिक्रमा करने से भगवान श्रीकृष्ण की कृपा प्राप्त होती है. श्रद्धालु दानघाटी मंदिर और मानसी गंगा जैसे प्रमुख धार्मिक स्थलों पर दर्शन भी करते हैं. इस दिन मंदिरों में अन्नकूट का भव्य आयोजन किया जाता है. भगवान श्रीकृष्ण को तरह-तरह के पकवानों और छप्पन भोग का प्रसाद अर्पित किया जाता है. इसके बाद भक्तों के बीच प्रसाद का वितरण होता है.

3 / 7
बिहार में गोबर से बनता है गोवर्धन
फुल स्क्रीन में देखें

गोवर्धन पूजा की इंफोग्राफिक्स प्रतीकात्मक तस्वीर (फोटो-एआई)

बिहार में गोबर से बनता है गोवर्धन

बिहार के कई ग्रामीण इलाकों में गोवर्धन पूजा की परंपरा बड़े उत्साह और श्रद्धा के साथ निभाई जाती है. इस दिन घर के आंगन में गोबर से गोवर्धन पर्वत की आकृति बनाई जाती है. इसे फूलों, पत्तियों और रंगों से सजाया जाता है. इसके बाद परिवार के लोग विधि-विधान से गोवर्धन भगवान की पूजा करते हैं और सुख-समृद्धि की कामना करते हैं. कई जगहों पर गाय-बैलों को भी नहलाकर सजाया जाता है और उनकी पूजा की जाती है. ग्रामीण जीवन में गाय और बैलों को खेती और आजीविका का महत्वपूर्ण आधार माना जाता है. इसलिए इस दिन पशुधन के प्रति आभार जताने की परंपरा भी देखने को मिलती है. कुछ इलाकों में महिलाएं और अन्य ग्रामीण पारंपरिक लोकगीत गाकर इस पर्व की खुशियां मनाते हैं. हालांकि, इन रीति-रिवाजों में क्षेत्र और परिवार के अनुसार अंतर हो सकता है.

4 / 7
झारखंड में पशुधन के प्रति आस्था
फुल स्क्रीन में देखें

गोवर्धन पूजा की इंफोग्राफिक्स प्रतीकात्मक तस्वीर (फोटो-एआई)

झारखंड में पशुधन के प्रति आस्था

झारखंड के कई ग्रामीण और कृषि आधारित इलाकों में गोवर्धन पूजा के अवसर पर पशुधन के प्रति सम्मान और आभार जताने की परंपरा देखने को मिलती है. ग्रामीण जीवन में गाय और बैलों को खेती-किसानी और आजीविका का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है. इस दिन कई जगहों पर पशुओं को नहलाकर साफ किया जाता है और उन्हें फूलों, रंगों तथा अन्य पारंपरिक तरीकों से सजाया जाता है. कुछ परिवार गाय-बैलों की पूजा कर उनके अच्छे स्वास्थ्य और समृद्धि की कामना भी करते हैं. धार्मिक मान्यता के साथ-साथ यह परंपरा मनुष्य और पशुओं के बीच के संबंध को भी दर्शाती है. झारखंड के अलग-अलग क्षेत्रों और समुदायों में इन रीति-रिवाजों का स्वरूप अलग हो सकता है.

5 / 7
राजस्थान में अन्नकूट का खास आयोजन
फुल स्क्रीन में देखें

गोवर्धन पूजा की इंफोग्राफिक्स प्रतीकात्मक तस्वीर (फोटो-एआई)

राजस्थान में अन्नकूट का खास आयोजन

राजस्थान के राजसमंद जिले में स्थित नाथद्वारा के श्रीनाथजी मंदिर में गोवर्धन पूजा के अवसर पर अन्नकूट उत्सव बड़े धूमधाम से मनाया जाता है. इस दिन भगवान श्रीनाथजी को तरह-तरह के पकवान, मिठाइयां, सब्जियां, चावल और अन्य व्यंजनों का भोग अर्पित किया जाता है. अन्नकूट का अर्थ है अनाज और पकवानों का बड़ा समूह. इस परंपरा के पीछे भगवान श्रीकृष्ण की गोवर्धन लीला से जुड़ी मान्यता है. कहा जाता है कि भगवान श्रीकृष्ण ने गोवर्धन पर्वत उठाकर ब्रजवासियों को इंद्र के प्रकोप से बचाया था. इसके बाद लोगों ने आभार जताने के लिए उन्हें तरह-तरह के पकवानों का भोग लगाया. इसी परंपरा को अन्नकूट उत्सव के रूप में मनाया जाता है. पूजा के बाद श्रद्धालुओं के बीच प्रसाद वितरित किया जाता है.

6 / 7
गुजरात में इसी दिन नया साल
फुल स्क्रीन में देखें

गोवर्धन पूजा की इंफोग्राफिक्स प्रतीकात्मक तस्वीर (फोटो-एआई)

गुजरात में इसी दिन नया साल

गुजरात में गोवर्धन पूजा के दिन कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा को बेस्टु वर्ष यानी गुजराती नववर्ष मनाया जाता है. यहां दिवाली के अगले दिन से नए साल की शुरुआत मानी जाती है. इस अवसर पर लोग सुबह जल्दी उठकर स्नान करते हैं और नए कपड़े पहनते हैं. इसके बाद मंदिरों में जाकर भगवान के दर्शन करते हैं और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना करते हैं. लोग अपने घरों और दुकानों को सजाते हैं तथा बड़ों का आशीर्वाद लेते हैं. इस दिन एक-दूसरे को 'साल मुबारक' कहकर नए साल की शुभकामनाएं देने की परंपरा है. गुजरात के कई मंदिरों में अन्नकूट उत्सव भी आयोजित किया जाता है, जहां भगवान को तरह-तरह के पकवानों का भोग लगाया जाता है. इस तरह गुजरात में यह दिन धार्मिक आस्था के साथ नए साल के उत्साह का भी प्रतीक है.

7 / 7
महाराष्ट्र में राजा बलि की पूजा
फुल स्क्रीन में देखें

गोवर्धन पूजा की इंफोग्राफिक्स प्रतीकात्मक तस्वीर (फोटो-एआई)

महाराष्ट्र में राजा बलि की पूजा

महाराष्ट्र में गोवर्धन पूजा के दिन बलि प्रतिपदा या दिवाली पड़वा मनाने की परंपरा है. यह पर्व राजा बलि और भगवान विष्णु के वामन अवतार की पौराणिक कथा से जुड़ा हुआ है. धार्मिक मान्यता के अनुसार, राजा बलि ने भगवान वामन को तीन पग भूमि दान करने का वचन दिया था. भगवान ने अपने विराट रूप से दो पग में धरती और आकाश नाप लिया और तीसरा पग रखने के लिए राजा बलि ने अपना सिर आगे कर दिया. इस तरह भगवान ने उनकी दानशीलता से प्रसन्न होकर उन्हें विशेष वरदान दिया. महाराष्ट्र में इस दिन को समृद्धि और पारिवारिक प्रेम से भी जोड़कर देखा जाता है. कई परिवारों में पति-पत्नी एक-दूसरे की आरती उतारते हैं और उपहार देकर सम्मान जताते हैं. इस अवसर पर घरों में विशेष पकवान बनाए जाते हैं और परिवार के लोग मिलकर त्योहार मनाते हैं.

विज्ञापन
विज्ञापन

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन
Sponsored Linksby Taboola