Share Market Crash: भारतीय शेयर बाजार में हाहाकार, निफ्टी और सेंसेक्स में रिकॉर्ड गिरावट

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Share Market Crash Black Monday: बैंकिंग और बाजार विशेषज्ञ अजय बग्गा ने कहा कि यह गिरावट घरेलू कारणों से नहीं, बल्कि वैश्विक पूंजी प्रवाह की कड़ी में भारत के जुड़ाव के कारण हो रही है. उन्होंने सुझाव दिया कि भारत को मौद्रिक, वित्तीय और संरचनात्मक सुधारों का एक मजबूत पैकेज लाने की जरूरत है

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Share Market Crash today: दुनियाभर के शेयर बाजारों में मची उथल-पुथल का असर भारतीय बाजारों पर भी साफ नजर आया. सप्ताह के पहले ही कारोबारी दिन भारत के प्रमुख शेयर सूचकांक भारी बिकवाली के दबाव में खुले. निफ्टी 50 इंडेक्स में 5 प्रतिशत की जोरदार गिरावट दर्ज की गई, जो कोविड काल के बाद की सबसे बड़ी शुरुआती गिरावटों में से एक है. निफ्टी 21,758.40 अंकों पर खुला, जिसमें 1,146.05 अंकों की गिरावट रही. वहीं, बीएसई सेंसेक्स में भी 3,984.80 अंकों यानी 5.29 प्रतिशत की गिरावट आई और यह 71,379.8 अंकों पर खुला.

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विशेषज्ञों ने जताई आर्थिक सुधार पैकेज की जरूरत

बैंकिंग और बाजार विशेषज्ञ अजय बग्गा ने कहा कि यह गिरावट घरेलू कारणों से नहीं, बल्कि वैश्विक पूंजी प्रवाह की कड़ी में भारत के जुड़ाव के कारण हो रही है. उन्होंने सुझाव दिया कि भारत को मौद्रिक, वित्तीय और संरचनात्मक सुधारों का एक मजबूत पैकेज लाने की जरूरत है, ताकि वैश्विक मंदी के इस दौर में घरेलू अर्थव्यवस्था को संभाला जा सके.

ट्रंप की नीति से गहराया संकट

विशेषज्ञों का कहना है कि अमेरिका द्वारा लगाए गए सदी के सबसे बड़े टैरिफ का असर अब वैश्विक बाजारों पर दिखने लगा है. अमेरिकी बाजारों में दो दिन में 5.4 ट्रिलियन डॉलर की गिरावट के बाद एशियाई बाजारों में भी रिकॉर्ड गिरावट दर्ज की गई. ताइवान के बाजार में 20% की भारी गिरावट आई, जबकि हांगकांग में 10% की गिरावट दर्ज की गई. जापान का निक्केई 225 सूचकांक 5.79% गिरा, ताइवान का वेटेड इंडेक्स 9.61% फिसला, कोरिया का कोस्पी इंडेक्स 4.14% टूटा और चीन का शंघाई कंपोजिट 6.5% लुढ़का. ऑस्ट्रेलिया का S&P/ASX 200 भी 3.82% गिरा.

भारतीय बाजार में मंदी का संकेत

SEBI-पंजीकृत विश्लेषक सुनील गुर्जर के अनुसार, निफ्टी 50 में बड़ी लाल कैंडल बनी है, जो मंदड़ियों की ताकत को दर्शा रही है. कीमत एक प्रमुख समर्थन स्तर को तोड़ चुकी है और अब दूसरे सपोर्ट की ओर बढ़ रही है. अगर यह सपोर्ट भी टूटता है, तो गिरावट का सिलसिला और तेज हो सकता है.

कच्चे तेल की कीमतें भी फिसलीं

ब्रेंट क्रूड की कीमतें भी गिरकर 52 हफ्तों के निचले स्तर पर पहुंच गईं और रिपोर्ट लिखे जाने तक 63.97 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रही थीं.

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