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Share Market: शेयर बाजार में तीन दिन से जारी तेजी थमी, सेंसेक्स में 16 अंक की मामूली गिरावट

Updated at : 08 Nov 2023 6:26 AM (IST)
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Share Market: शेयर बाजार में तीन दिन से जारी तेजी थमी, सेंसेक्स में 16 अंक की मामूली गिरावट

Share Market: बीएसई सेंसेक्स में मामूली 16 अंक की गिरावट रही. एशिया और यूरोपीय बाजारों में कमजोर रुख के बीच विदेशी संस्थागत निवेशकों की पूंजी निकासी जारी रहने से बाजार नुकसान में रहा.

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Share Market: स्थानीय शेयर बाजारों में पिछले तीन कारोबारी सत्रों से जारी तेजी पर मंगलवार को विराम लगा और बीएसई सेंसेक्स में मामूली 16 अंक की गिरावट रही. एशिया और यूरोपीय बाजारों में कमजोर रुख के बीच विदेशी संस्थागत निवेशकों की पूंजी निकासी जारी रहने से बाजार नुकसान में रहा. तीस शेयरों पर आधारित बीएसई सेंसेक्स 16.29 अंक यानी 0.03 प्रतिशत की गिरावट के साथ 64,942.40 अंक पर बंद हुआ. कारोबार के दौरान एक समय यह 320.59 अंक तक नीचे चला गया था. नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी भी 5.05 अंक यानी 0.03 प्रतिशत की हल्की गिरावट के साथ 19,406.70 अंक पर बंद हुआ. सेंसेक्स की कंपनियों में बजाज फाइनेंस, जेएसडबल्यू स्टील, रिलायंस इंडस्ट्रीज, महिंद्रा एंड महिंद्रा, आईटीसी, टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज, विप्रो, एचडीएफसी बैंक, लार्सन एंड टुब्रो और भारती एयरटेल प्रमुख रूप से नुकसान में रहीं. दूसरी तरफ लाभ में रहने वाले शेयरों में सन फार्मा, एनटीपीसी, भारतीय स्टेट बैंक, इंडसइंड बैंक और एक्सिस बैंक शामिल हैं.

चीन के कारण वैश्विक बाजार पर असर

जियोजीत फाइनेंशियल सर्विसेज के शोध प्रमुख विनोद नायर ने कहा कि बाजार को उच्चस्तर पर कुछ प्रतिरोध का सामना करना पड़ा. इसका कारण कुछ प्रमुख राज्यों में चुनाव शुरू होना है. इसके अलावा, चीन के निर्यात में उम्मीद से कहीं अधिक गिरावट के साथ वैश्विक बाजारों में नकारात्मक रुख का भी असर पड़ा. चीनी निर्यात में गिरावट वैश्विक व्यापार में लगातार नरमी को दर्शाती है. उन्होंने कहा कि सऊदी अरब और रूस के आपूर्ति कटौती की अवधि बढ़ाये जाने के निर्णय के बावजूद कच्चे तेल के दाम में नरमी आई है. यह वैश्विक स्तर पर जारी तनाव के बीच भारत के लिये अच्छा संकेत है. इसके साथ, अमेरिकी बॉन्ड प्रतिफल में नरमी और कंपनियों के बेहतर तिमाही परिणाम से दीर्घकालीन रिटर्न को समर्थन मिलने की उम्मीद है.

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बीएसई मिडकैप और स्मॉलकैप में मिला लाभ

बीएसई मिडकैप सूचकांक 0.53 प्रतिशत और स्मॉलकैप 0.38 प्रतिशत के लाभ में रहा. एशिया के अन्य बाजारों में दक्षिण कोरिया का कॉस्पी, जापान का निक्की, चीन का शंघाई कम्पोजिट और हांगकांग का हैंगसेंग नुकसान में रहे. यूरोप के प्रमुख बाजारों में ज्यादातर में शुरुआती कारोबार में गिरावट का रुख रहा. अमेरिकी बाजार सोमवार को बढ़त में रहे थे. वैश्विक तेल मानक ब्रेंट क्रूड 2.12 प्रतिशत की गिरावट के साथ 83.37 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया. शेयर बाजार के आंकड़ों के अनुसार, विदेशी संस्थागत निवेशकों ने सोमवार को 549.37 करोड़ रुपये मूल्य के शेयर बेचे.

रुपया पांच पैसे टूटकर 83.26 प्रति डॉलर पर

रुपया मंगलवार को सीमित दायरे में कारोबार के दौरान अमेरिकी डॉलर के मुकाबले पांच पैसे टूटकर 83.26 (अस्थायी) पर बंद हुआ. विदेश में अमेरिकी मुद्रा की मजबूती और विदेशी कोषों की निकासी जारी रहने से भारतीय मुद्रा कमजोर हुई. विदेशी मुद्रा कारोबारियों ने कहा कि घरेलू शेयरों में नकारात्मक रुख का भी स्थानीय मुद्रा पर असर पड़ा. दूसरी ओर कच्चे तेल की कीमतों में सुधार से रुपये की गिरावट सीमित रही. अंतरबैंक विदेशी मुद्रा विनिमय बाजार में अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपया 83.23 पर खुला और 83.27 के निचले स्तर को छूने के बाद अंत में 83.26 (अस्थायी) पर बंद हुआ. इस तरह डॉलर के मुकाबले रुपये में पांच पैसे की कमजोरी आई. रुपया सोमवार को 83.21 प्रति डॉलर पर बंद हुआ था. विदेशी मुद्रा कारोबारियों ने कहा कि रुपये में एक सीमित दायरे में कारोबार होने की उम्मीद है. इस बीच, छह प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले अमेरिकी डॉलर की स्थिति को दर्शाने वाला डॉलर सूचकांक 0.37 प्रतिशत बढ़कर 105.60 के स्तर पर पहुंच गया.

कच्चे तेल में आयी नरमी

वैश्विक तेल मानक ब्रेंट क्रूड वायदा 1.78 प्रतिशत गिरकर 83.66 डॉलर प्रति बैरल के भाव पर था. घरेलू शेयर बाजारों में सेंसेक्स 16.29 अंक या 0.03 प्रतिशत गिरकर 64,942.40 पर, निफ्टी 5.05 अंक या 0.03 प्रतिशत गिरकर 19,406.70 अंक पर बंद हुआ. बीएनपी पारिबा बाय शेयरखान के संयुक्त उपाध्यक्ष प्रवीण सिंह ने कहा कि अमेरिकी फेडरल बैंक के एक अधिकारी ने मुद्रास्फीति को नियंत्रित करने के लिए ब्याज दरों में बढ़ोतरी का संकेत दिया है, जिससे डॉलर में तेजी आई. उन्होंने कहा कि कारोबारियों को अब इस बात का इंतजार है कि क्या अमेरिकी फेडरल रिजर्व के चेयरमैन कठोर रुख का समर्थन करेंगे. उन्होंने कहा कि आरबीआई पिछले दो महीनों से अमेरिकी डॉलर बेच रहा है, जिससे रुपये पर नियंत्रण रखा जा सके. शेयर बाजार के आंकड़ों के मुताबिक, विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) ने सोमवार को 549.37 करोड़ रुपये के शेयर बेचे.

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