कच्चे तेल में लगातार गिरावट, $88 से नीचे आया ब्रेंट, जानिए क्यों नरम पड़ा ऑयल मार्केट

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ब्रेंट और WTI में गिरावट दर्ज की गई. जानिए अमेरिका-ईरान बातचीत, स्ट्रेट ऑफ होर्मुज और बढ़ती सप्लाई से मार्केट का रुख कैसे बदला.

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इंटरनेशनल मार्केट में कच्चे तेल की कीमतों में मंगलवार को भी तेज गिरावट जारी रही. ब्रेंट क्रूड 88 डॉलर प्रति बैरल से नीचे फिसल गया, जबकि WTI क्रूड करीब 82 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार करता दिखा. इस गिरावट की सबसे बड़ी वजह अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत की उम्मीदें हैं, जिससे ग्लोबल सप्लाई को लेकर बनी चिंता कम हुई है.

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सोमवार को भी ब्रेंट क्रूड में 8.7% की बड़ी गिरावट दर्ज की गई थी. यह पिछले तीन महीने से ज्यादा समय की सबसे बड़ी एक दिन की गिरावट मानी जा रही है. इससे पहले पश्चिम एशिया में बढ़े तनाव के कारण कच्चे तेल की कीमतें तेजी से चढ़ी थीं, लेकिन अब मार्केट से वह अतिरिक्त जोखिम वाला प्रीमियम धीरे-धीरे निकलता दिख रहा है.

अमेरिका-ईरान की बातचीत का क्या असर पड़ा?

मार्केट का रुख तब बदला, जब अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि वॉशिंगटन और तेहरान के बीच पश्चिम एशिया में जारी तनाव खत्म करने को लेकर बातचीत चल रही है. रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रंप ने ईरान पर आगे हमले रोकने का फैसला किया ताकि बातचीत को एक और मौका मिल सके. हालांकि, अभी यह साफ नहीं है कि दोनों देशों के बीच कोई ठोस समझौता हुआ है या नहीं.

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज क्यों है इतना अहम?

दुनिया की नजर अब ईरान और ओमान के बीच चल रही बातचीत पर भी है. दोनों देश स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से व्यावसायिक जहाजों की आवाजाही फिर से सामान्य करने की कोशिश कर रहे हैं.

इस समुद्री रास्ते की अहमियत इसलिए ज्यादा है क्योंकि:

  • दुनिया के रोजाना सप्लाई होने वाले करीब 20% कच्चे तेल की आवाजाही इसी रास्ते से होती है.
  • अगर यहां शिपिंग पूरी तरह सामान्य हो जाती है, तो ग्लोबल तेल सप्लाई को लेकर चिंता और कम हो सकती है.
  • हालांकि, अभी भी इस मार्ग पर जहाजों की आवाजाही पूरी तरह सामान्य नहीं हुई है, इसलिए कारोबारी सतर्क बने हुए हैं.

सप्लाई बढ़ने के और क्या संकेत मिले?

मार्केट को राहत देने वाली एक और खबर कजाकिस्तान से आई. यूक्रेन के ड्रोन हमलों के कारण प्रभावित हुआ वहां का प्रमुख क्रूड एक्सपोर्ट टर्मिनल फिर से चालू हो गया है. कैस्पियन पाइपलाइन कंसोर्टियम (CPC) टर्मिनल पर दोबारा लोडिंग शुरू होने से ग्लोबल मार्केट में सप्लाई बेहतर होने की उम्मीद बढ़ी है. इससे भी कच्चे तेल की कीमतों पर दबाव देखने को मिला.

आगे मार्केट की नजर किस पर रहेगी?

ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक, मैक्वेरी ग्रुप के विश्लेषकों का मानना है कि अगर अमेरिका-ईरान के बीच तनाव कम हो जाता है और बातचीत सफल रहती है, तो साल के आखिर तक ऑइल मार्केट में जरूरत से ज्यादा सप्लाई हो सकती है.

ब्रोकरेज का अनुमान है कि इस साल की चौथी तिमाही में मार्केट में करीब 20 लाख बैरल प्रतिदिन का अतिरिक्त तेल उपलब्ध हो सकता है. ऐसा हुआ तो हाल के हफ्तों में सप्लाई को लेकर जो चिंता बनी हुई थी, उसकी जगह ओवरसप्लाई की स्थिति बन सकती है और कच्चे तेल की कीमतों पर आगे भी दबाव बना रह सकता है.

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