इजरायल-ईरान जंग के बीच भारत की बड़ी चाल, कनाडा से यूरेनियम डील पक्की

India Canada Uranium Deal: प्रधानमंत्री Narendra Modi और कनाडा के प्रधानमंत्री Mark Carney के बीच बातचीत में कई अहम समझौते हुए. सबसे बड़ा समझौता 10 साल के परमाणु ऊर्जा सहयोग से जुड़ा है, जिसके तहत कनाडा भारत को लंबी अवधि तक यूरेनियम सप्लाई करेगा.
India Canada Uranium Deal: पश्चिम एशिया में इजरायल-ईरान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव के बीच भारत ने अपनी ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है. तेल आपूर्ति पर मंडराते खतरे और वैश्विक अनिश्चितता के माहौल में भारत ने कनाडा के साथ लंबी अवधि की यूरेनियम सप्लाई डील पक्की की है. इस समझौते को रणनीतिक रूप से अहम माना जा रहा है, क्योंकि यह न सिर्फ परमाणु ऊर्जा उत्पादन को मजबूती देगा, बल्कि तेल पर निर्भरता कम करने में भी मददगार साबित हो सकता है.
प्रधानमंत्री Narendra Modi और कनाडा के प्रधानमंत्री Mark Carney के बीच बातचीत में कई अहम समझौते हुए. सबसे बड़ा समझौता 10 साल के परमाणु ऊर्जा सहयोग से जुड़ा है, जिसके तहत कनाडा भारत को लंबी अवधि तक यूरेनियम सप्लाई करेगा. इसके अलावा टेक्नोलॉजी, क्रिटिकल मिनरल्स, अंतरिक्ष, रक्षा और शिक्षा जैसे क्षेत्रों में भी सहयोग बढ़ाने पर सहमति बनी है. दोनों देशों ने तय किया है कि वे 2026 के अंत तक एक फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) को अंतिम रूप देंगे.
परमाणु ऊर्जा और नई टेक्नोलॉजी पर फोकस
बैठक के बाद पीएम मोदी ने बताया कि सिविल न्यूक्लियर एनर्जी में यह एक ऐतिहासिक समझौता है. भारत और कनाडा छोटे मॉड्यूलर रिएक्टर (SMR) और एडवांस रिएक्टर टेक्नोलॉजी पर भी साथ काम करेंगे. भारत की बढ़ती ऊर्जा जरूरतों को देखते हुए यह डील काफी अहम मानी जा रही है. भारत फिलहाल अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए कोयला, तेल और गैस पर काफी निर्भर है.
ऐसे में परमाणु ऊर्जा एक स्थायी और कम कार्बन विकल्प बन सकती है. दोनों देशों ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), सुपरकंप्यूटिंग और सेमीकंडक्टर सेक्टर में भी सहयोग बढ़ाने की बात कही है. साथ ही, रिन्यूएबल एनर्जी समिट संयुक्त रूप से आयोजित करने की योजना है.
व्यापार बढ़ाने का लक्ष्य
- दोनों देशों ने आपसी व्यापार को 50 अरब डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा है. अभी व्यापार इससे काफी कम है, लेकिन संभावनाएं बड़ी हैं.
- कनाडा भारत को पोटाश, दालें और खनिज भेजता है, जबकि भारत से दवाइयां, टेक्नोलॉजी सेवाएं और मैन्युफैक्चरिंग प्रोडक्ट्स कनाडा जाते हैं.
- दोनों देश अमेरिकी टैरिफ दबाव से भी बचना चाहते हैं, इसलिए नए व्यापारिक साझेदार तलाशना उनके लिए रणनीतिक रूप से जरूरी है.
कैसे बिगड़े थे रिश्ते ?
भारत-कनाडा संबंध 2023 में गंभीर तनाव में आ गए थे, जब कनाडा के तत्कालीन प्रधानमंत्री Justin Trudeau ने आरोप लगाया था कि कनाडा में सिख अलगाववादी नेता Hardeep Singh Nijjar की हत्या में भारत का हाथ हो सकता है.भारत ने इन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया था. इसके बाद दोनों देशों ने एक-दूसरे के राजनयिकों को निष्कासित किया और वीजा सेवाएं भी प्रभावित हुईं. हालांकि, मार्क कार्नी के सत्ता में आने के बाद रिश्तों में धीरे-धीरे सुधार की कोशिश शुरू हुई.
क्यों जरूरी है यह नई साझेदारी ?
- विशेषज्ञों का मानना है कि मौजूदा वैश्विक हालात में यह कदम व्यावहारिक है.
- भारत अपने ऊर्जा स्रोतों में विविधता लाना चाहता है.
- कनाडा एशिया में नए बाजार और निवेश अवसर तलाश रहा है.
- दोनों देश चीन और रूस पर निर्भरता कम करना चाहते हैं.
- सर्वे बताते हैं कि कनाडा में भी बड़ी संख्या में लोग भारत के साथ रिश्ते बहाल करने के पक्ष में हैं.
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By अभिषेक पाण्डेय
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करियर की शुरुआत उन्होंने राजस्थान पत्रिका के साथ की, जहां उन्होंने डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को करीब से समझा। इसके बाद वे प्रभात खबर से जुड़े और पिछले तीन वर्षों से डिजिटल जर्नलिस्ट के रूप में काम कर रहे हैं।
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अभिषेक पाण्डेय ने माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय (MCU), भोपाल से पत्रकारिता एवं जनसंचार की पढ़ाई की है। यहां उन्होंने रिपोर्टिंग, डिजिटल मीडिया, न्यूज़ राइटिंग, वीडियो प्रोडक्शन और मल्टीमीडिया जर्नलिज्म की बारीकियां सीखीं, जिनका इस्तेमाल वे आज अपनी पत्रकारिता में कर रहे हैं।
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