8th Pay Commission Fitment Factor 4.0: अगर फिटमेंट फैक्टर 4.0 लागू हुआ तो 18000 वाली बेसिक सैलरी हो जाएगी 72000, इतनी बढ़ेगी सैलरी

Updated:
विज्ञापन

8वां वेतन आयोग अगर फिटमेंट फैक्टर 4.0 की सिफारिश. फोटो- AI

भारतीय प्रतिरक्षा मजदूर संघ (BPMS) 8वें वेतन आयोग में 4.0 फिटमेंट फैक्टर और ₹72,000 न्यूनतम वेतन की मांग कर रहा है. जानिए इस मांग के पीछे महंगाई, प्रति व्यक्ति आय में वृद्धि और परिवार के आकार जैसे कौन से तर्क दिए गए हैं.

विज्ञापन

8वें वेतन आयोग को लेकर केंद्रीय कर्मचारियों के बीच फिटमेंट फैक्टर सबसे बड़ा मुद्दा बना हुआ है. अलग-अलग कर्मचारी संगठनों ने अलग-अलग फिटमेंट फैक्टर की मांग की है. इनमें सबसे ज्यादा 4.0 फिटमेंट फैक्टर की मांग भारतीय प्रतिरक्षा मजदूर संघ (BPMS) ने रखी है. संगठन ने आयोग के सामने न्यूनतम बेसिक पे को मौजूदा ₹18,000 से बढ़ाकर ₹72,000 करने का प्रस्ताव दिया है.

विज्ञापन

BPMS ने 4.0 फिटमेंट फैक्टर की मांग क्यों की? आय वृद्धि और देश की आर्थिक तरक्की का तर्क

BPMS का तर्क सिर्फ महंगाई तक सीमित नहीं है. संगठन अपनी मांग के समर्थन में देश की प्रति व्यक्ति आय में हुई बढ़ोतरी को आधार बना रहा है. प्रस्ताव में सरकारी आंकड़ों के अनुसार कहा गया है कि 2016-17 में जहां देश की औसत आय ₹1,03,219 थी, वहीं 2024-25 में यह बढ़कर ₹1,92,774 हो गई है. यानी इस अवधि में करीब 86.76 फीसदी की बढ़ोतरी हुई. संगठन का कहना है कि कर्मचारियों की आय में भी देश की आर्थिक प्रगति के अनुरूप संशोधन होना चाहिए.

महंगाई की मार और DA का असर: वेतन बढ़ोतरी की जरूरत पर BPMS का तर्क

BPMS के अनुसार मौजूदा ₹18,000 का न्यूनतम बेसिक वेतन आज की महंगाई और बढ़ती जीवन-यापन लागत के हिसाब से पर्याप्त नहीं है. संगठन ने महंगाई भत्ते (DA) के असर और असल वेतन में बढ़ोतरी की जरूरत को भी अपनी मांग से जोड़ा है. प्रस्ताव में यह तर्क दिया गया है कि DA महंगाई की भरपाई करता है, लेकिन कर्मचारियों की असल आय बढ़ाने के लिए वेतन और सालाना इंक्रीमेंट में पर्याप्त बढ़ोतरी जरूरी है.

3 सदस्यों की जगह 5 सदस्य का परिवार

BPMS ने वेतन तय करने के लिए परिवार की इकाई को भी बदलने की मांग की है. संगठन का कहना है कि मौजूदा गणना में तीन यूनिट का परिवार माना जाता है, जबकि भारतीय परिस्थितियों में कर्मचारी पर आश्रित माता-पिता की जिम्मेदारी भी होती है. इसलिए परिवार की गणना को बढ़ाकर 5 यूनिट किया जाना चाहिए. संगठन के प्रस्ताव के अनुसार इस गणना से जरूरत के हिसाब से न्यूनतम वेतन ₹88,500 के आसपास बैठता है.

फिर ₹72,000 ही क्यों?

दिलचस्प बात यह है कि BPMS की अपनी गणना में न्यूनतम वेतन ₹88,500 के आसपास आता है, लेकिन संगठन ने सरकार पर वित्तीय बोझ को देखते हुए अपनी मांग को ₹72,000 पर सीमित किया है. BPMS ने इसे कर्मचारियों की जरूरत और सरकार की वित्तीय क्षमता के बीच संतुलित आंकड़ा बताया है. इसी ₹72,000 के लक्ष्य तक पहुंचने के लिए संगठन ने 4.0 फिटमेंट फैक्टर की मांग रखी है.

₹18,000 का बेसिक सीधे ₹72,000 हो जाएगा?

अगर भविष्य में 8वां वेतन आयोग वाकई 4.0 फिटमेंट फैक्टर की सिफारिश करता है और सरकार उसे उसी रूप में लागू करती है, तो मौजूदा ₹18,000 बेसिक का गणित ₹18,000 × 4 = ₹72,000 होगा. लेकिन अभी इसे अंतिम वेतन मानना सही नहीं है. 4.0 केवल BPMS की मांग है और 8वें वेतन आयोग ने अभी फिटमेंट फैक्टर को अंतिम रूप नहीं दिया है.

दूसरे संगठनों की मांग कितनी है?

फिटमेंट फैक्टर को लेकर कर्मचारी संगठनों की मांग अलग-अलग है. राष्ट्रीय संयुक्त सलाहकार तंत्र (NC-JCM) के स्टाफ साइड ने करीब 3.833 फिटमेंट फैक्टर और लगभग ₹69,000 न्यूनतम वेतन का प्रस्ताव दिया है. वहीं फेडरेशन ऑफ नेशनल पोस्टल ऑर्गेनाइजेशंस (FNPO) ने 3.0 से 3.25 के बीच फिटमेंट फैक्टर की मांग की है. ऐसे में 4.0 की मांग फिलहाल सबसे ऊंची प्रमुख मांगों में शामिल है.

अभी कर्मचारियों को कितना इंतजार करना होगा?

8वें वेतन आयोग की प्रक्रिया अभी जारी है और कर्मचारी संगठनों से सुझाव एवं मांगें ली जा रही हैं. इसलिए ₹72,000 न्यूनतम बेसिक पे या 4.0 फिटमेंट फैक्टर को अभी तय वेतन नहीं माना जा सकता. यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि आयोग की सिफारिशें और सरकार का निर्णय कर्मचारियों की उम्मीदों पर कितना खरा उतरता है.

विज्ञापन

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन
Sponsored Linksby Taboola