आर्थिक जगत के दिग्‍गजों ने जताया मोदी पर भरोसा, चीन को पीछे छोड़ेगा भारत

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मुंबई : आने वाले समय में भारतीय अर्थव्‍यवस्‍था की वृद्घि दर दुनिया में सबसे तेज होने की उम्‍मीदें लगायी जा रही हैं. अर्थव्‍यवस्‍था पर काम करने वाली विभिन्‍न रेटिंग एजेंसियों की ओर से भी अच्‍छे संकेत आ रहे हैं. एक कार्यक्रम में रिलायंस इंडस्‍ट्रीज के चेयरमैन मुकेश अंबानी ने कहा है कि आने वाले 2 […]

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मुंबई : आने वाले समय में भारतीय अर्थव्‍यवस्‍था की वृद्घि दर दुनिया में सबसे तेज होने की उम्‍मीदें लगायी जा रही हैं. अर्थव्‍यवस्‍था पर काम करने वाली विभिन्‍न रेटिंग एजेंसियों की ओर से भी अच्‍छे संकेत आ रहे हैं. एक कार्यक्रम में रिलायंस इंडस्‍ट्रीज के चेयरमैन मुकेश अंबानी ने कहा है कि आने वाले 2 सालों में भारतीय अर्थव्‍यवस्‍था दुनिया की सबसे तेज रफ्तार से वृद्धि करने वाली अर्थव्‍यवस्‍था होगी.

अंबानी ने कहा कि ग्रोथ के मामले में चीन भी हमसे पीछे रह जाएगा. मुकेश अंबानी ने ये बात ब्राउन यूनिवर्सिटी के एक आयोजन में कही. अंबानी के मुताबिक 2014 देश के लिए ऐतिहासिक साल था. देश में 30 सालों बाद एक पार्टी की सरकार बनी है और इस राजनीतिक स्थिरता का बड़ा फायदा मिलेगा. वहीं कच्चे तेल में नरमी भी इकोनॉमी के लिए वरदान साबित होगी. कच्चा तेल 60-70 डॉलर के आसपास रहने की उम्मीद है.

इसी कार्यक्रम में बैंक ऑफ अमेरिका के चेयरमैन ब्रायन मोयनीहान का भी मानना है कि मोदी सरकार के आने के बाद निवेशकों के रूझानों में बड़ा सुधार आया है. ब्रायन मोयनीहान के मुताबिक भारत में तेज रफ्तार से आगे बढ़ने की सारी संभावनाएं मौजूद हैं. सबसे बड़े शेयर कारोबारी राकेश झुनझुनवाला ने भी भारतीय अर्थव्‍यवस्‍था में तेजी के संकेत दिये हैं. उन्‍होंने कहा कि अगर अगले 10 सालों तक भारत में मोदी का शासन नहीं रहेगा तो यह अर्थव्‍यवस्‍था के लिए नुकसानदेह हो सकता है.

मोदी से भी मिले मोयनिहान कहा – भारतीय अर्थव्‍यवस्‍था व‍ृद्धि दर तेज रहने का अनुमान

बैंक आफ अमेरिका (बोफा) ने आज कहा कि वह भारत में अपने बैंकिंग परिचालन के विस्तार की योजना बना रहा है जिसके तहत बुनियादी ढांचे व उर्जा क्षेत्रों पर विशेष रुप से ध्यान दिया जाएगा. बोफा के चेयरमैन व सीईओ ब्रायन मोयनिहान ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात के दौरान यह बात कही.

एक बयान के अनुसार बैंक भारत में अपनी गतिविधियों का विस्तार करेगा और पूंजी बाजारों में अपनी उपस्थिति बढाएगा विशेषकर बुनियादी ढांचा व उर्जा क्षेत्र निवेश पर ध्यान केंद्रित करेगा. बातचीत के दौरान मोयनिहान ने कहा कि उन्हें भारतीय अर्थव्यवस्था की वृद्धि दर तेज रहने का अनुमान है. उन्होंने कहा, दुनिया ने भारत के प्रति अपनी धारणा बदली है. बैंक आफ अमेरिका का मुंबई, नयी दिल्ली, कोलकाता, चेन्नई व बेंगलूरु में शाखा है.

विदेशी शासकों ने भी जताया भारतीय अर्थव्‍यवस्‍था पर भरोसा

नरेंद्र मोदी की सरकार बनने के बाद उनकी नीतियों से प्रभावित होकर विभिन्‍न देशों के राष्‍ट्राध्‍यक्षों नें भारतीय अर्थवयवस्‍था पर भरोसा जताया है. हाल के दिनों में अमेरिका के साथ-साथ जापान, चीन और ब्रिटेन तैसे बड़े अर्थव्‍यव्‍स्‍था वाले देशों को आर्थिक संकट के दौर से गुजरना पड़ रहा है. ऐसे में तमाम विश्‍लेषकों की ओर से भारतीय अर्थव्‍यवस्‍था के वृद्धि के आसार के बीच इन देशों ने यहा निवेश को सुरक्षित और अपने देश के लिए हितकर माना है. जापान और चीन ने आर्थिक संकट से निपटने के लिए भारत में निवेश को बेहतर बताया है. अमेरिका ने भी भारत में निवेश की वकालत की है और इसे सुरक्षित भी बताया है. ये सारे संकेत भारतीय अर्थव्‍यवस्‍था के लिए काफी अच्‍छे संकेत हैं.

मोदी के ‘मेक इन इंडिया’ का चमत्‍कारिक असर

पेट्रोलियम मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने कल एक बयान में कहा था कि हमारी सरकार को विरासत में गिरी हुई अर्थव्‍यवस्‍था मिली थी. इसको सुधारने के लिए सरकार कई बड़े फैसले लेगी. शुरुआत से ही नरेंद्र मोदी सरकार ने चुनौति के रूप में अर्थव्‍यवस्‍था को सुधारने के लिए ठोस कदम उठाने शुरू कर दिये. अन सब के बीच नरेंद्र मोदी ने प्रधानमंत्री जन-धन योजना और मेक इन इंडिया जैसे कार्यक्रमों की शुरुआत की और विदेशी निवेशकों को आकर्षित करने का काम किया.

इतना ही नहीं नरेंद्र मोदी ने देश-विदेश का दौरा कर वहां के उद्योपत्तियों से बातचीत की और उन्‍हें भारत में निवेश के लिए प्रेरित किया. मोदी ने अप्रवासी भारतीय उद्योगपत्तियों को भी अपने बातों से इतना प्रभावित किया कि वे भारत में निवेश के लिए सहर्ष तैयार हो गये. यहां तक की मेक इन इंडिया के कार्यक्रम के तुरंत बाद ही चीन की ओर से भी मेक इन चाइना की घोषणा की गयी थी.

जानें भारतीय अर्थव्‍यवस्‍था पर रेटिंग एजेंसियों का बयान

स्टैंडर्ड ऐंड पुअर्स : एसएंडपी ने भारतीय अर्थव्यवस्था में सुधार के संकेत देते हुए उसकी रेटिंग को नकारात्मक (बीबीबी माइनस) से बढ़ाकर ‘स्थिर’ कर दिया है. एजेंसी ने कहा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार को मिला भारी बहुमत उसे राजकोषीय और आर्थिक सुधारों को लागू करने में मदद करेगा. वर्ष 2012 के अप्रैल में एसएंडपी ने भारत की रेटिंग घटाकर ‘नकारात्मक’ कर दी थी. इसे निवेशकों में भारत के प्रति विश्वास की कमी के रूप में देखा गया. एक बयान में एसएंडपी ने कहा, "रेटिंग में यह संशोधन दिखाता है कि वर्तमान सरकार को मिला भारी बहुमत शासकीय, राजकोषीय और आर्थिक सुधारों को लागू करने में मददगार साबित होगा."

फिच :अंतरराष्‍ट्रीय रेटिंग एजेंसी फिच ने गुरुवार को कहा कि अगले दो साल में देश की आर्थिक गतिविधि में तेजी आने की उम्मीद है और इससे विकास दर बढ़ सकती है. अमेरिकी निवेशकों द्वारा उभरते बाजारों के बैंकों के वित्तीय स्वास्थ्य के बारे में पूछे जाने पर फिच ने यह बयान दिया है. फिच ने कहा, "(भारतीय) बैंकिंग प्रणाली के समक्ष दो प्रमुख चुनौतियां हैं-संपत्ति की गुणवत्ता और पूंजीकरण और सबसे बड़ा मुद्दा सरकारी बैंकों के साथ है." एजेंसी के मुताबिक, भारत में आर्थिक तेजी का लाभ उठाने के लिए निजी क्षेत्र के बैंक बेहतर स्थिति में हैं, क्योंकि उनकी संपत्ति की गुणवत्ता अपेक्षाकृत बेहतर है और समुचित पूंजीकरण है. साथ ही उनका कारोबार अधिक व्यापक है.

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