गौरव क्षण : कारोबार सुगमता में भारत की सालभर में 23 पायदान की छलांग,77 वें पर पहुंचा, भारत चीन से पीछे पाकिस्तान से आगे

By Prabhat Khabar Digital Desk
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भारत के आर्थिक सुधारों पर वर्ल्ड बैंक की मुहर
वाशिंगटन : वर्ल्ड बैंक की कारोबार सुगमता रैंकिंग में भारत ने पिछले साल के मुकाबले 23 पायदान की ऊंची छलांग लगा कर 77वें स्थान पर पहुंच गया है. बुधवार को जारी रैकिंग से माना जा रहा है कि इससे भारत को अधिक विदेशी निवेश आकर्षित करने में मदद मिलेगी.
एक साल पहले भारत 190 देशों की सूची में 142 स्थान से 100वें स्थान पर आया था. यानि एक साल में भारत 42 पायदान की ऊंची छलांग लगायी थी. बैंकों के फंसे कर्ज की समस्या से निजात दिलाने के लिए शुरू की गयी दिवाला निपटान प्रक्रिया, कर सुधार जीएसटी और अर्थव्यवस्था के कुछ अन्य क्षेत्रों में सुधार से भारत कारोबार सुगमता के क्षेत्र में उल्लेखनीय सुधार कर पाया है. पिछले साल भारत 100वें स्थान था.
वर्ष 2014 में जब मोदी सरकार ने सत्ता संभाली थी तब भारत कारोबार सुगमता रैकिंग में 190देशों की सूची में 142वें स्थान पर था. भारत ने पिछले दो साल में अपनी रैंकिंग में 53 पायदान का सुधार किया है. 2014 के बाद से चार साल में भारत की स्थिति 65 स्थान सुधरी है. चार साल में भारत ने 65 पायदान की छलांग लगायी है. सरकार के लिए नयी रैंकिंग राहत दिलानेवाली है. अगले साल होनेवाले आम चुनाव से पहले सरकार को विभिन्न आर्थिक मुद्दों पर विपक्षी दलों के कड़े विरोध का सामना करना पड़ रहा है.
भारत को विदेशी निवेश हासिल करने में मिलेगी अधिक मदद
10 मानकों में छह में भारत ने अपनी स्थिति सुधारी
कारोबार शुरू करना
निर्माण परमिट
बिजली सुविधा प्राप्त करना
कर्ज प्राप्त करना
टैक्स भुगतान
सीमापार व्यापार
अनुबंध लागू करना
दिवाला प्रक्रिया
भारत चीन से पीछे पाकिस्तान से आगे
रैंकिंग की सूची में न्यूजीलैंड टॉप पर है. उसके बाद सिंगापुर, डेनमार्क और हांगकांग हैं. अमेरिका आठवें, चीन 46वें और पाकिस्तान 136 वें स्थान पर है.
भारत की रैंकिंग बढ़ने से प्रसन्न हूं. आर्थिक सुधारों के प्रति प्रतिबद्धता को लेकर हम दृढ़ हैं जो उद्योग, निवेश और अवसरों को बढ़ावा देनेवाला माहौल सुनिश्चित करेंगे.
नरेंद्र मोदी, प्रधानमंत्री
यदि अनुबंधों को अमल, कारोबार शुरू करने और रीयल एस्टेट के रजिस्ट्रेशन में में सुधार आये, तो देश रैंकिंग में शीर्ष 50 देशों में शामिल हो सकता है.
अरुण जेटली, वित्त मंत्री
एनपीए में 28 प्रतिशत की कमी
रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत में बिजनेस शुरू करने के लिए कई आवेदनों की जगह सिंगल कर दिया गया है. वैट के जीएसटी में बदलने से रजिस्ट्रेशन तेज हुआ है. भारत ने करों के भुगतान की लागत को भी कम किया है.
कंपनी आयकर की दर कम किया है. नियोक्ता द्वारा भुगतान किये जानेवाले कर्मचारी भविष्य निधि कोष योजना की दर भी कम की गयी है. भारत में दिवाला प्रक्रिया के लिए बेहतर ढांचा बनाया गया है. ऋण वसूली ट्रिब्यूनलों से एनपीए या डूबे कर्ज में 28 प्रतिशत कम हुई हैं.
बड़े कर्जों पर ब्याज दर कम किया गया है. ऋण वसूली के मामलों के तेजी से निपटान से कर्ज की लागत घटती है. भारत ने निर्यात और आयात की लागत और इसमें लगनेवाले समय को भी कम किया है. भारत ने बिल्डिंग के लिए परमिट प्रक्रिया तर्कसंगत, तेज और कम खर्चीला बनाया है.
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