रुपये में लगातार हो रही गिरावट, सही सेक्टर में करें निवेश

Updated at : 10 Sep 2018 6:38 AM (IST)
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रुपये में लगातार हो रही गिरावट, सही सेक्टर में करें निवेश

ललित त्रिपाठी, निदेशक, वेदांत एसेट्स रुपये का अवमूल्यन या गिरावट कभी भी शेयर बाजार के लिए अच्छा नहीं रहा है क्योंकि ऐसा देखा गया है कि जब भी रुपये का वैल्यू कम हुआ है, तब शेयर बाजार में रिटर्न निगेटिव या कम हो जाता है. इसकी वजह यह है कि विदेशी निवेशक बाजार से पैसा […]

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ललित त्रिपाठी, निदेशक, वेदांत एसेट्स

रुपये का अवमूल्यन या गिरावट कभी भी शेयर बाजार के लिए अच्छा नहीं रहा है क्योंकि ऐसा देखा गया है कि जब भी रुपये का वैल्यू कम हुआ है, तब शेयर बाजार में रिटर्न निगेटिव या कम हो जाता है. इसकी वजह यह है कि विदेशी निवेशक बाजार से पैसा निकालते हैं और बाजार में बिक्री का माहौल रहता है और इसके कारण मार्केट में गिरावट आती है. वहीं दूसरी ओर बहुत सारी भारतीय कंपनियां विदेशों से लोन लेते हैं और चूंकि उन्हें उसका भुगतान डॉलर में करना होता है और गिरते रुपये की वजह से इनके ब्याज का बोझ अधिक हो जाता है और इसका असर कंपनी के लाभ को प्रभावित करता है.

ऐसा नहीं है कि सारे सेक्टरों में इसका असर होता है बल्कि ऐसे भी सेक्टर हैं जो रुपये के अवमूल्यन होने के कारण फायदे में रहते हैं. जैसे आइटी सेक्टर, फार्मा सेक्टर या अन्य निर्यात आधारित फंड. इस समय इनमें निवेश करना फायदेमंद साबित होता है. इसलिए यह मान कर चलें कि रुपये की गिरती कीमतों की वजह से आनेवाले समय में भी शेयर मार्केट में गिरावट देखने को मिल सकती है. ऐसे में छोटे निवेशकों को अगले एक से डेढ वर्षों तक एसआइपी या एसटीपी के माध्यम से निवेश करना बेहतर रहेगा. इसके अलावा आईटी, फार्मा व निर्यात संबंधित फंडों में निवेश करना फायदेमंद व समझदारी भरा कदम होगा.

अगर रुपये के गिरते समय में जो निवेशक पहले से निवेश करते आ रहे हैं, उन्हें कुछ लाभ बुक कर लेना चाहिए और लिक्विड या डेब्ट फंड में बने रहना चाहिए. और जब भी बाजार में अच्छा करेक्शन मिले अगले एक से डेढ वर्षों के दरम्यान अपने जोखिम क्षमता के अनुसार निवेश करते रहना चाहिए.

होनेवाली सामान्य गलतियां

1. बाजार की तेजी या मंदी से प्रभावित होना : आमतौर पर बाजार में होनेवाली हलचलों और उसके प्रभाव का विश्लेषण आम निवेशक नहीं समझ पाते. वे बाजार की तेजी देखते ही ज्यादा लाभ कमाने के लिए निवेश करने चाहते हैं और जब बाजार में मंदी होती है, रिटर्न निगेटिव या कम दिखने लगता है तो वे निवेश बंद करने लगते हैं. यह कदम उनके लिए नुकसानदायक होता है. ऐसा कभी नहीं करना चाहिए.

2. एसआइपी में निगेटिव या कम रिटर्न देखकर उसे बंद करना : एसआइपी में निगेटिव रिटर्न को देखकर खुश होने की जरूरत है. यह निवेशकों को लाभ की स्थिति में लाता है क्योंकि निवेशकों को इस स्थिति में ज्यादा यूनिट्स प्राप्त होता है और रुपी कॉस्ट एवरेजिंग के कारण आगे चलकर बेहतर रिटर्न प्रदान करता है.

3. पिछला रिटर्न देखकर निवेश करना : किसी भी फंड के पिछले रिटर्न को देखकर निवेश नहीं करना चाहिए. पिछले कुछ वर्षों में मिड कैप और स्मॉल कैप की कंपनियों में अधिक रिटर्न मिला है. इसको देखकर निवेशक अपना पूरा पैसा इसी तरह के फंड में डाल देते हैं तो यह उनके लिए जोखिम भरा कदम होगा. हमेशा अपने पैसे को लांग टर्म में निवेश करें और सारे तरह के फंडों में निवेश करें.

4. एसेट एलोकेशन को फॉलो न करना : किसी एक सेक्टर में ही पूरा पैसा निवेश करना जोखिम भरा होता है. अत: हमेशा डायवर्सिफाइ तरीके से निवेशक करना चाहिए. मतलब पूरा पैसा इक्विटी में न लगा कर कुछ डेब्ट फंड में भी निवेश करते रहना चाहिए.

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