फिर उठी गोरखालैंड की मांग
Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 28 Jul 2014 5:13 AM
दार्जिलिंग: गोरखा जनमुक्ति मोरचा (गोजमुमो) सुप्रीमो विमल गुरुंग ने एक बार फिर अलग गोरखालैंड राज्य के निर्माण की मांग दोहरायी है. वह यहां शहीद दिवस पर आयोजित समारोह को संबोधित कर रहे थे. श्री गुरुंग ने राज्य सरकार पर गोरखालैंड आंदोलन को दबाने का आरोप लगाते हुए कहा कि राज्य सरकार चाहे जितनी कोशिश कर […]
दार्जिलिंग: गोरखा जनमुक्ति मोरचा (गोजमुमो) सुप्रीमो विमल गुरुंग ने एक बार फिर अलग गोरखालैंड राज्य के निर्माण की मांग दोहरायी है. वह यहां शहीद दिवस पर आयोजित समारोह को संबोधित कर रहे थे.
श्री गुरुंग ने राज्य सरकार पर गोरखालैंड आंदोलन को दबाने का आरोप लगाते हुए कहा कि राज्य सरकार चाहे जितनी कोशिश कर ले, गोरखालैंड की आवाज को दबाना अब संभव नहीं है. उन्होंने राज्य सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा कि गोरखालैंड की आवाज को दबाने के लिए राज्य सरकार मेरे विरुद्ध बदले की कार्रवाई कर सकती है, लेकिन हम इस कार्रवाई से डर कर अपनी आवाज बंद करनेवाले नहीं है. राज्य सरकार यदि सोचती है कि सीआरपीएफ और गोली-बंदूक का भय दिखा कर गोरखालैंड के आंदोलन को कुचला जा सकता है, तो यह राज्य सरकार की गलत सोच है. जितना ही इस आंदोलन को दबाने की कोशिश की जायेगी, आंदोलन उतना ही उग्र होता जायेगा. उन्होंने कहा कि पहले और अब के गोरखालैंड आंदोलन में काफी फर्क है.
16वीं लोकसभा चुनाव में दार्जिलिंग संसदीय क्षेत्र से भाजपा उम्मीदवार एसएस अहलुवालिया की जीत हुई है और केंद्र में नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में एनडीए की सरकार है. यदि राज्य सरकार बंदूक और गोली के दम पर गोरखालैंड आंदोलन की आवाज को कुचलना चाहेगी, तो केंद्र सरकार चुपचाप नहीं बैठ सकती. राज्य सरकार को गोरखालैंड समर्थकों पर गोली चलाने से पहले हजार बार सोचना पड़ेगा. उन्होंने गोरखा रंग मंच भवन के बाहर बने शहीद बेदी पर गोरखालैंड आंदोलन में शहीद लोगों को श्रद्धांजलि भी दी. उन्होंने आगे कहा कि शहीद होना गौरव की बात है. किस्मत वाले लोग ही देश के लिए शहीद होते हैं.
गोरखालैंड आंदोलन में जिन लोगों ने बलिदान दिया, उन सभी को दार्जिलिंग पर्वतीय क्षेत्र के लोग हमेशा याद रखेंगे. विमल गुरुंग के साथ ही गोजमुमो महासचिव रोशन गिरि, आरपी वाइबा, विधायक त्रिलोक कुमार देवान आदि ने भी शहीद बेदी पर माल्यार्पण कर शहीदों को श्रद्धांजलि दी. यहां उल्लेखनीय है कि 1986 में सुभाष घीसिंग के नेतृत्व में गोरखालैंड आंदोलन के दौरान करीब 200 लोग शहीद हो गये थे. वर्ष 2007 में जब विमल गुरुंग के नेतृत्व में गोरखालैंड आंदोलन की शुरूआत हुई, तब भी सात लोग मारे गये थे. पहाड़ के लोगों ने इन सभी लोगों को शहीद का दरजा दिया है और हर वर्ष ही आज के दिन शहीद दिवस का आयोजन किया जाता है.
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