नेपाल से प्रभात खबर की ग्राउंड जीरो रिपोर्ट: हर उड़ते हेलिकॉप्टर से जागती है एक आस, फिर मायूस लौट आती हैं पथरायीं आंखें

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रेस्क्यू ऑपरेशन में जुटी टीम, अपनों को तलाशते परिजन, फोटो प्रभात खबर

Nepal Flash Floods: भीषण बाढ़ के बाद नुवाकोट स्थित बट्टार का ‘श्री नं. 1 सैन्य प्रशिक्षण केंद्र’ दुखों और उम्मीदों का केंद्र बन गया है. गुरुवार सुबह से ही इस सैन्य अड्डे के बाहर बड़ी संख्या में लोग अपने लापता परिजनों की तलाश में एक-एक पल काट रहे हैं.

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बट्टार (नेपाल) से मनोज गुप्ता की रिपोर्ट Nepal Flash Floods: रसुवा के बाढ़ग्रस्त इलाकों से राहत और बचाव कार्य कर जैसे ही कोई सैन्य हेलिकॉप्टर प्रशिक्षण केंद्र के परिसर में उतरता है, सड़क किनारे खड़ी बदहवास भीड़ एक उम्मीद के साथ उसकी ओर दौड़ पड़ती है. लेकिन, अपनों का कोई अता-पता न मिलने पर लोग फिर से मायूस होकर पीछे लौट आते हैं.

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सविता की उम्मीद, शायद वे सुरंग में सुरक्षित हों

इन्हीं गमगीन चेहरों के बीच सविता अधिकारी भी अपने पति की तलाश में घंटों से टकटकी लगाये बैठी हैं. त्रिशूली हाइड्रो प्रोजेक्ट में कार्यरत उनके पति बाढ़ आने के बाद से ही संपर्कविहीन हैं. सविता को यह नहीं पता कि उनके पति बाढ़ के तेज बहाव में बह गये हैं या कहीं सुरक्षित स्थान पर फंसे हैं.

सविता को जानकारी मिली थी कि त्रिशूली हाइड्रो के कुछ कर्मचारी और कंपनी के मालिक सुरंग के भीतर चले गये थे और सेना वहां बचाव अभियान चला रही है. स्थिति की सच्चाई जानने के लिए सविता रोते-बिलखते सैन्य केंद्र के गेट पर पहुंचीं और अधिकारियों से गुहार लगायी. बाद में उन्हें एक रिश्तेदार के साथ भीतर जाने की अनुमति मिली. सविता ने सजल आंखों से कहा, संभव है मेरे पति सुरंग के भीतर सुरक्षित हों और इसी वजह से नेटवर्क न होने के कारण संपर्क नहीं हो पा रहा है. मुझे पूरा यकीन है कि सेना उन्हें जल्द बाहर निकाल लेगी.

74 वर्ष की सजल आंखें और अंतहीन इंतजार

74 वर्षीय पदम बहादुर कंडेल भी अपने रिश्तेदार की खोज में बट्टार पहुंचे हैं. लगातार बहते आंसुओं के बीच उनकी वृद्ध आंखें हर आते-जाते हेलिकॉप्टर को निहारती हैं. रसुवा बाढ़ में उनके रिश्तेदार खलप्रसाद तिमिल्सिना फंसे हुए हैं. रुंधे गले से पदम बहादुर कहते हैं, हेलिकॉप्टर तो लगातार मंडरा रहे हैं, पर उसमें हमारा अपना कोई नहीं उतर रहा. नुवाकोट के तादी से आये बासुदेव रिजाल अपने भांजे की तलाश में भटक रहे हैं. सूर्यगढ़ी-5 निवासी उनका भांजा अपने 11 साथियों के साथ गोसाइंकुंड ट्रेकिंग के लिए निकला था.

बेत्रावती के समीप उनकी बस अचानक उफनती बाढ़ की चपेट में आ गयी. भांजा और उसका एक साथी अपनी जान बचाने के लिए पास के एक मकान की छत पर चढ़ने में सफल रहे थे. उन्होंने रोते हुए घर पर फोन कर कहा था, अगर यह घर टिका रहा तो हम बच जाएंगे. लेकिन, कुछ ही पलों बाद नदी का प्रचंड वेग पूरे मकान के साथ उन दोनों को भी बहा ले गया. बासुदेव ने बताया कि उन्होंने पूरी जानकारी सेना और पुलिस को सौंप दी है. अब परिवार की बस इतनी ही गुहार है कि कम से कम भांजे का पार्थिव शरीर मिल जाये, ताकि वे उसे अंतिम विदाई दे सकें.

बाढ़ में अटका जीवन : स्कूली बच्चे भी फंसे

आपदा का असर बट्टार के स्थानीय जीवन पर भी बुरी तरह पड़ा है. यह क्षेत्र स्वयं बाढ़ से ग्रस्त हुआ है और नदी की दोनों ओर कई लोग फंसे हुए हैं. पंचलिंगे माध्यमिक विद्यालय के कई छात्र फुटसल (खेल) खेलने के लिए विदुर आए थे, लेकिन अचानक आयी प्राकृतिक तबाही के कारण सड़क मार्ग ठप हो गया और वे घर नहीं लौट सके. विद्यार्थियों ने बताया कि उन्होंने पूरी रात दहशत के साए में गुजारी. उनके घर वाले भी बेहद चिंतित हैं.

फिलहाल सेना हेलिकॉप्टर के माध्यम से इन विद्यार्थियों को सुरक्षित उनके घर पहुंचाने का प्रयास कर रही है. बट्टार में गूंजती हेलिकॉप्टरों की हर आवाज के साथ लोगों की धड़कनें तेज हो जाती हैं. कोई अपने प्रियजन के सकुशल लौटने की प्रार्थना कर रहा है, तो कोई कम-से-कम उनका अंतिम दर्शन पाने की प्रतीक्षा में खड़ा है. रसुवा की बाढ़ ने यहां सिर्फ तबाही के निशान नहीं छोड़े हैं, बल्कि सैकड़ों परिवारों की जिंदगी को अनिश्चितता और असहनीय पीड़ा के बीच लाकर खड़ा कर दिया है.


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आंखों देखी : जिंदगी में ऐसी भयावह तबाही कभी नहीं देखी, नदी में तैर रहे थे शवों के टुकड़े

झारखंड के हजारीबाग निवासी नारायण महतो इन दिनों देवघाट के पास हाइड्रो पावर प्रोजेक्ट में काम कर रहे हैं. उन्होंने बाढ़ के दौरान हुई भयावह त्रासदी को अपनी आंखों से देखा. घटना के बाद उन्होंने बताया कि अपने जीवन में उन्होंने ऐसी भयानक स्थिति पहले कभी नहीं देखी थी. नारायण महतो ने बताया कि बाढ़ का पानी अपने साथ इंसानों के शवों के टुकड़े, वाहनों का सामान और कई तरह की वस्तुएं बहाकर ला रहा था. नदी का पानी इतना काला और गंदा हो गया था कि स्थिति देखकर डर लग रहा था.

उन्होंने कहा कि बाढ़ की तेज धारा और गंदे पानी के कारण मछलियां भी अपनी जान बचाने के लिए नदी से बाहर निकलने की कोशिश कर रही थीं. यह दृश्य बेहद भयावह था.बाढ़ के दौरान वहां बना सब-सेक्शन ब्रिज भी बुरी तरह हिल रहा था. पुल की स्थिति देखकर वहां मौजूद लोगों में दहशत फैल गयी थी.हर पल जान का खतरा महसूस हो रहा था. हालांकि, नारायण महतो और उनके साथ काम करने वाले अन्य लोग सुरक्षित हैं. उन्होंने अपने परिवार को फोन कर सुरक्षित होने की जानकारी दी, जिसके बाद घरवालों ने राहत की सांस ली. उन्होंने कहा कि इस त्रासदी की भयावह तस्वीरें लंबे समय तक उनके जेहन में रहेंगी.


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