क्या सऊदी-पाकिस्तान-तुर्की रक्षा डील भारत के लिए खतरा? जयशंकर ने दिया जवाब, कहा- दिल्ली के दुश्मनों पर पैनी निगाह

Updated:
विज्ञापन

भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर (बांए), मक्का समझौते पर साइन करने के बाद तुर्की, सऊदी अरब और पाकिस्तान के नेता. फोटो- एक्स.

पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्की के बीच हुए मक्का डिफेंस पैक्ट पर भारत की कड़ी नजर है. विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने पहली बार इस समझौते पर सार्वजनिक रूप से प्रतिक्रिया देते हुए साफ किया कि नई दिल्ली उन सभी घटनाक्रमों को अपने रणनीतिक आकलन में शामिल करती है, जिनमें ऐसे देश शामिल हों जो भारत के प्रति अनुकूल रुख नहीं रखते.

विज्ञापन

Mecca Defence Pact: पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्की के बीच हुए मक्का डिफेंस पैक्ट पर भारत की नजर है. विदेश मंत्री एस जयशंकर ने पहली बार इस समझौते पर सार्वजनिक रूप से प्रतिक्रिया देते हुए साफ किया कि नई दिल्ली उन सभी घटनाक्रमों को अपने रणनीतिक आकलन में शामिल करती है, जिनमें ऐसे देश शामिल हों जो भारत के प्रति अनुकूल रुख नहीं रखते.

विज्ञापन

जयशंकर ने उठाया मक्का समझौते की उपयोगिता का मुद्दा

शनिवार को द इकोनॉमिक टाइम्स के एक कार्यक्रम में जयशंकर से इस समझौते को लेकर सवाल किया गया. उनसे पूछा गया कि भारत और पाकिस्तान के बीच हालिया सैन्य तनाव के बीच हुआ यह रक्षा समझौता क्या नई दिल्ली के लिए चिंता का विषय है.

जयशंकर ने सीधे तौर पर इसे लेकर चिंता जताने के बजाय समझौते की व्यावहारिक उपयोगिता पर सवाल खड़ा किया. उन्होंने कहा कि इस समझौते पर हस्ताक्षर करने वाले देशों के सामने पहले से ही वास्तविक सुरक्षा और सैन्य चुनौतियां मौजूद हैं. उन्होंने कहा, 'आप इसे रक्षा समझौता कह रहे हैं. इसके सभी सिग्नेटरी (साइन करने वाले) के सामने वास्तविक सैन्य परिस्थितियां हैं. ऐसे में मक्का समझौते ने उनके जवाब में क्या किया है?'

जब इंटरव्यूअर ने कहा कि ऐसा जरूरी नहीं है कि समझौते पर हस्ताक्षर करने वाले देश हर परिस्थिति में एक-दूसरे की मदद के लिए आगे आए हों, तो जयशंकर ने जवाब दिया, 'मुझे लगता है कि आपने अपने सवाल का जवाब खुद दे दिया.'

भारत हर घटनाक्रम को अपने हिसाब से आंकता है

कार्यक्रम के दौरान जयशंकर से तुर्की और चीन के बीच संभावित तकनीकी सहयोग को लेकर भी सवाल किया गया. उनसे पूछा गया कि क्या इस तरह का सहयोग भारत के सामने अतिरिक्त रणनीतिक चुनौतियां पैदा कर सकता है. 

विदेश मंत्री ने कहा कि नई दिल्ली हर ऐसे कदम को अपने रणनीतिक आकलन का हिस्सा बनाती है. जयशंकर ने कहा कि ऐसा नहीं है. उनके आकलन में हर चीज मायने रखती है. हर चीज का अपना महत्व है. विदेश मंत्री ने आगे समझाया कि भारत किसी भी ऐसे देश या पक्ष की गतिविधियों को नजरअंदाज नहीं करता, जिसका रुख नई दिल्ली के प्रति अनुकूल नहीं है.

उन्होंने कहा, 'मेरे लिए जो भी देश अच्छी भावना नहीं रखता, उसकी हर गतिविधि मेरे आकलन का हिस्सा होती है. अगर ऐसे कई देश हैं और वे आपस में कोई कदम उठाते हैं, तो क्या मैं उसे ध्यान में रखता हूं? बिल्कुल रखता हूं. लेकिन क्या इसके बाद मैं आपके सामने और बाकी सभी लोगों के सामने अपनी सारी रणनीति खोल दूंगा? बिल्कुल नहीं.'

जयशंकर के इस जवाब से यह संकेत साफ था कि भारत मक्का समझौते जैसे क्षेत्रीय घटनाक्रमों को बारीकी से देखता है, लेकिन अपनी रणनीतिक सोच और आकलन को सार्वजनिक करने से बचता है.

ये भी पढ़ें:- पाकिस्तान के बलूचिस्तान में हिंदू व्यापारी की गोली मारकर हत्या, दुकान में घुसकर हमलावरों ने किया हमला

आतंकवाद के मुद्दे पर पाकिस्तान को जयशंकर ने बताया ‘अलग तरह का’ देश

इसी कार्यक्रम में विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने पाकिस्तान और अमेरिका के संबंधों पर भी खुलकर बात की. पाकिस्तान की आतंकवाद नीति पर निशाना साधते हुए उन्होंने उसे 'अलग तरह का' देश बताया. उन्होंने कहा कि वॉशिंगटन और इस्लामाबाद के बीच लंबे समय से संबंध रहे हैं, लेकिन भारत ने भी अमेरिका के साथ अपने संबंध स्वतंत्र रूप से और अपने हितों के आधार पर विकसित किए हैं.

पड़ोसी होना पाकिस्तान को अलग नहीं बनाता

जयशंकर ने कहा कि पाकिस्तान के अलग होने की वजह सिर्फ यह नहीं है कि वह भारत का पड़ोसी देश है. भारत के और भी पड़ोसी हैं और कई देशों के बीच आपसी विवाद भी हैं.

उन्होंने कहा, 'पाकिस्तान इसलिए अलग नहीं है क्योंकि वह भारत का पड़ोसी है. हमारे दूसरे पड़ोसी भी हैं. ऐसे दूसरे देश भी हैं, जिनके बीच आपसी समस्याएं हैं.' विदेश मंत्री ने कहा, 'यह इसलिए अलग है क्योंकि आज के दौर में कोई दूसरा देश ऐसा नहीं है, जो किसी दूसरे पड़ोसी देश पर हमला करने और उस पर दबाव बनाने के लिए इतनी व्यवस्थित और लगातार आतंकवाद का इस्तेमाल करता हो. और इसका असर इस देश की जनमत पर भी पड़ता है.'

क्या है मक्का डिफेंस पैक्ट?

सऊदी अरब, पाकिस्तान और तुर्की ने इसी महीने मक्का में इस रक्षा समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं. इसका उद्देश्य तीनों देशों के बीच सैन्य सहयोग के लिए एक औपचारिक ढांचा तैयार करना है. समझौते के तहत प्रावधान है कि यदि तीनों में से किसी एक देश पर सशस्त्र हमला होता है, तो उसे तीनों देशों पर हमला माना जाएगा.

यही प्रावधान इस समझौते को खास बनाता है और भारत में भी इस पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है. भारत की चिंता का एक प्रमुख कारण इसमें पाकिस्तान की भागीदारी है. इसके अलावा तुर्की और पाकिस्तान के बीच लंबे समय से मजबूत रक्षा और कूटनीतिक संबंध भी रहे हैं.

ये भी पढ़ें:- 26 साल का कार सेल्समैन बना राजकुमार, खुला बेल्जियम के शाही परिवार का पुराना राज


विज्ञापन

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन
Sponsored Linksby Taboola