फ्रांस में बेकाबू हुए हालात: 143 साल पुरानी बिल्डिंग आग के हवाले, सड़क पर उतरी लाखों की भीड़
फ्रांस में लाखों लोग सड़कों पर, फोटो - सोशल मीडिया
फ्रांस में महंगाई और सरकारी नीतियों के खिलाफ बड़े पैमाने पर प्रदर्शन हिंसक हो गए. पेरिस सहित कई शहरों में आगजनी, लूटपाट और गिरफ्तारियां हुईं, 150 पुलिसकर्मी घायल हो गए हैं.
France Protest : पेरिस समेत कई शहरों में आंसू गैस के गोले छोड़े गए, गाड़ियों और इमारतों में आग लगाई गई और दुकानों में लूटपाट हुई. फ्रांस के गृह मंत्री लॉरेंट नुनेज के मुताबिक, देशभर में करीब 5.5 लाख लोग सड़कों पर उतरे, जिनमें 1.10 लाख प्रदर्शनकारी पेरिस में थे. हिंसा के दौरान 1,200 से अधिक लोगों को गिरफ्तार किया गया है.
पेरिस में आगजनी, दुकानों में तोड़फोड़
पेरिस में दिन के समय मुख्य मार्च काफी हद तक शांतिपूर्ण रहा, लेकिन शाम होते-होते हालात बिगड़ने लगे. प्रदर्शनकारियों के समूहों ने सड़कों पर आग लगाई, गाड़ियों को निशाना बनाया और पुलिस के साथ झड़प की. लिमोज शहर में स्थित 143 साल पुरानी बिल्डिंग को लोगों ने आग के हवाले कर दिया. पुलिस ने भीड़ को नियंत्रित करने के लिए आंसू गैस और वाटर कैनन का इस्तेमाल किया. कई जगह दुकानों में तोड़फोड़ और लूटपाट की खबरें सामने आईं.
लुई वितों स्टोर से लेकर ऐतिहासिक इमारतों तक नुकसान
बीबीसी की रिपोर्ट के मुताबिक हिंसा का असर राजधानी से बाहर भी दिखा. बोर्डो में लुई वितों के स्टोर में लूटपाट हुई, जबकि लिली में एप्पल स्टोर को निशाना बनाया गया. लियोन में शहर के पर्यटन कार्यालय की इमारत में आग लग गई. मेयर ग्रेगरी दुसे ने इसे दुखद घटना बताया. लिमोज में टाउन हॉल में लगी आग के कारण इमारत की छत का एक हिस्सा ढह गया. कई अन्य शहरों में भी इमारतों को नुकसान पहुंचने की खबरें आईं.
150 पुलिसकर्मी घायल, कार्रवाई का राष्ट्रपति ने किया ऐलान
प्रधानमंत्री सेबास्टियन लेकोर्नू ने बताया कि झड़पों में 150 पुलिसकर्मी घायल हुए हैं. राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने आगजनी, लूटपाट और सरकारी इमारतों पर हमले करने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की चेतावनी दी. उन्होंने कहा कि कारोबारियों और सरकारी संस्थानों को निशाना बनाने वालों को अभियोजन और सजा का सामना करना पड़ेगा.
स्कूलों की बदहाली और महंगाई से बढ़ा असंतोष
प्रदर्शनों की शुरुआत स्कूलों में कर्मचारियों की कमी और खराब सुविधाओं को लेकर छात्रों की नाराजगी से हुई थी. बाद में बढ़ती महंगाई और सार्वजनिक सेवाओं की स्थिति से परेशान दूसरे समूह भी आंदोलन में शामिल हो गए. ट्रेड यूनियनों और येलो वेस्ट आंदोलन से जुड़े लोगों ने भी प्रदर्शन को समर्थन दिया.
राष्ट्रपति चुनाव से पहले बढ़ी राजनीतिक हलचल
अगले साल होने वाले राष्ट्रपति चुनाव से पहले हिंसा ने फ्रांस में राजनीतिक तनाव बढ़ा दिया है. विपक्षी नेताओं ने प्रदर्शनों और पुलिस की कार्रवाई को लेकर अलग-अलग आरोप लगाए हैं. वहीं, पुलिस की कार्यशैली पर भी सवाल उठ रहे हैं. पुलिस निगरानी संस्था हिंसा और कथित पुलिस ज्यादती से जुड़ी शिकायतों की जांच कर रही है.
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