चार अरब आबादी घरों में कैद, लॉकडाउन से यूरोप में बची 59,000 लोगों की जान

Updated at : 04 Apr 2020 3:23 AM (IST)
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चार अरब आबादी घरों में कैद, लॉकडाउन से यूरोप में बची 59,000 लोगों की जान

विश्व भर में तबाही मचा रहे घातक कोरोना वायरस संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए भारत समेत कई देशों में सख्ती से लॉकडाउन लागू किया गया है. इसके कारण दुनिया की करीब चार अरब आबादी को घरों में कैद है.

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नई दिल्ली. विश्व भर में तबाही मचा रहे घातक कोरोना वायरस संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए भारत समेत कई देशों में सख्ती से लॉकडाउन लागू किया गया है. इसके कारण दुनिया की करीब चार अरब आबादी को घरों में कैद है. ब्रिटेन में विशेषज्ञों का कहना है कि कोरोना को फैलने से रोकने के लिए संघर्ष कर रहे 11 यूरोपीय देशों में सख्ती से लागू किये गये प्रतिबंधों के कारण संभवत: 59,000 लोगों की जान बच गयी है. ‘इम्पिरियल कॉलेज लंदन’ के शोधकर्ताओं ने कोविड-19 से सर्वाधिक संक्रमित इटली और स्पेन जैसे देशों के अनुभव का इस्तेमाल किया. अध्ययन में के मुताबिक, लॉकडाउन के कारण 11 देशों में 31 मार्च तक 59,000 लोगों की मौत टाली जा सकी है.

कहां कितनी जानें बचीं

देश जीवन बचे

स्पेन 16,000

फ्रांस 2,500

बेल्जियम 560

जर्मनी 550

ब्रिटेन 370

स्विट्जरलैंड 340

ऑस्ट्रिया 140

स्वीडन 82

डेनमार्क 69

नॉर्वे 10

उत्तर कोरिया, यमन समेत दुनिया के 15 देशों में कोरोना नहींअमेरिका की जॉन हॉपकिन्स यूनिवर्सिटी ने कोरोना के अपडेट के लिए दुनिया का सबसे बड़ा डेटाबेस तैयार किया है. यूनिवर्सिटी के 31 मार्च तक के डेटा के अनुसार, अफ्रीका महाद्वीप में कई ऐसे देश हैं, जहां अब तक कोरोना का एक भी केस सामने नहीं आया है.

ऐसे देश हैं जहां अब तक कोरोना का एक भी केस नहीं आया

ये देश बोत्सवाना, तुर्कमेनिस्तान, ताजिकिस्तान, यमन, कोमोरोस, मलावी, साओ तोमे एंड प्रिंसिपी, दक्षिण सुडान हैं. इसके अलावा, कुछ छोटे आइलैंड भी हैं, जहां कोरोना अब तक नहीं पहुंचा है. इनमें सोलोमन आइसलैंड, वानूआतू हैं. उत्तर कोरिया में भी एक भी केस सामने नहीं आया है.

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Pritish Sahay

लेखक के बारे में

By Pritish Sahay

12 वर्षों से टीवी पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सेवाएं दे रहा हूं. रांची विश्वविद्यालय के पत्रकारिता विभाग से पढ़ाई की है. राजनीतिक, अंतरराष्ट्रीय विषयों के साथ-साथ विज्ञान और ब्रह्मांड विषयों पर रुचि है. बीते छह वर्षों से प्रभात खबर.कॉम के लिए काम कर रहा हूं. इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में काम करने के बाद डिजिटल जर्नलिज्म का अनुभव काफी अच्छा रहा है.

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