मुशर्रफ की मेडिकल रिपोर्ट विशेष अदालत में पेश की गई

Published at :24 Jan 2014 12:27 PM (IST)
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मुशर्रफ की मेडिकल रिपोर्ट विशेष अदालत में पेश की गई

इस्लामाबाद : पूर्व सैन्य शासक परवेज मुशर्रफ के खिलाफ राजद्रोह के मामले में सुनवाई कर रही विशेष अदालत के आदेश पर गठित मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट आज एक सीलबंद लिफाफे में विशेष अदालत में पेश की गई. विशेष अदालत ने 70 वर्षीय मुशर्रफ के स्वास्थ्य की जांच के लिए 16 जनवरी को आम्र्ड फोर्सेज इन्स्टीट्यूट […]

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इस्लामाबाद : पूर्व सैन्य शासक परवेज मुशर्रफ के खिलाफ राजद्रोह के मामले में सुनवाई कर रही विशेष अदालत के आदेश पर गठित मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट आज एक सीलबंद लिफाफे में विशेष अदालत में पेश की गई.

विशेष अदालत ने 70 वर्षीय मुशर्रफ के स्वास्थ्य की जांच के लिए 16 जनवरी को आम्र्ड फोर्सेज इन्स्टीट्यूट कार्डियोलॉजी :एएफआईसी: के वरिष्ठ डॉक्टरों का एक मेडिकल बोर्ड गठित करने का आदेश दिया था. विशेष अदालत ने आदेश में कहा था कि मेडिकल बोर्ड को अपनी रिपोर्ट आज 24 जनवरी को उसके समक्ष पेश करनी चाहिए.

अदालत ने मेडिकल बोर्ड को मुख्यत: तीन सवालों के जवाब देने को कहा था.मुशर्रफ के वकील अहमद रजा कसूरी ने पूर्व में बताया था कि इन सवालों में पहला सवाल यह पता लगाना था कि मुशर्रफ को सजर्री की जरुरत है या नहीं. दूसरा, मुशर्रफ को पूरी तरह स्वस्थ होने में कितना समय लगेगा.

इससे पहले मुशर्रफ के कानूनी दल ने उनके अमेरिका में रह रहे निजी डॉक्टर अजरुमन्द हाशमी का एक पत्र पेश किया था. पत्र में हाशमी ने कहा था कि पूर्व राष्ट्रपति को इलाज के लिए टैक्सास स्थित ‘‘पेरिस रीजनल मेडिकल सेंटर’’ भेजा जाना चाहिए.

वर्ष 2006 से मुशर्रफ का इलाज कर रहे डॉ हाशमी ने पत्र में लिखा था कि पूर्व राष्ट्रपति की मेडिकल रिपोर्ट उनकी मुख्य कोरोनरी धमनी में समस्या के बारे में बताती है जिसका नतीजा दिल के बड़े दौरे के रुप में मिल सकता है. अगर इस बीमारी का इलाज नहीं किया गया तो हृदय काम करना बंद कर सकता है.

मुशर्रफ को मामले की सुनवाई के लिए जाते समय अचानक चिकित्सा संबंधी समस्या उत्पन्न होने के बाद दो जनवरी को इलाज के लिए रावलपिंडी स्थित सैन्य अस्पताल ले जाया गया.

उन पर नवंबर 2007 में संविधान को निलंबित करने, उससे छेड़छाड़ करने और उसे निष्प्रभावी करने, आपातकाल लगाने तथा उंची अदालतों के न्यायाधीशों को गिरफ्तार करने के लिए राजद्रोह का मुकदमा चल रहा है.

पाकिस्तान के इतिहास में यह पहला मौका है जब किसी पूर्व सैन्य शासक के खिलाफ राजद्रोह का मुकदमा चल रहा है. इस मामले में दोषी साबित होने पर उम्र कैद की सजा हो सकती है.

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