इस्त्राइल : नेतन्याहू ने कट्टरपंथी सरकार के गठन के लिए समझौता किया
Updated at : 07 May 2015 6:21 PM (IST)
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यरुशलम : इस्राइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने कट्टरपंथी सरकार का गठन करने के लिए एक दक्षिणपंथी पार्टी के साथ आखिरी समय पर एक समझौता किया है, जो फलस्तीन के साथ शांति वार्ता में गतिरोध तोडने की किसी वैश्विक पहल को एक बडी चुनौती पेश करेगी. कट्टरपंथियों के रुप में पहचाने जाने वाली बयीत हयेहुदी (ज्यूविश […]
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यरुशलम : इस्राइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने कट्टरपंथी सरकार का गठन करने के लिए एक दक्षिणपंथी पार्टी के साथ आखिरी समय पर एक समझौता किया है, जो फलस्तीन के साथ शांति वार्ता में गतिरोध तोडने की किसी वैश्विक पहल को एक बडी चुनौती पेश करेगी. कट्टरपंथियों के रुप में पहचाने जाने वाली बयीत हयेहुदी (ज्यूविश होम) पार्टी के साथ गठबंधन वार्ता देर शाम तक चलती रही और मध्यरात्रि की समय सीमा से महज 90 मिनट पहले एक समझौते पर सहमति बनी.
प्रधानमंत्री नेतन्याहू ने 120 सदस्यीय इस्त्राइली संसद नेसेट में 61 सदस्यों के मामूली बहुमत सुनिश्चित करने के लिए बडी रियायत दी. नेतन्याहू ने कहा, 61 अच्छी संख्या है और 61 प्लस एक बेहतर संख्या है. उन्होंने बताया, लेकिन यह 61 पर शुरु हुआ और हम शुरु होंगे. हमारे सामने काफी काम है. ‘ज्यूविश होम’ के समर्थन के बदले में नेतन्याहू न्यायमंत्री के पद की मांग के आगे झुक गए. यह पद कैबिनेट से मंजूरी प्राप्त विधेयक की संसद में अभिपुष्टि के लिहाज से अहम होगा.
नेतन्याहू ने राष्ट्रपति रेवेन रिवलिन से कहा, मैं आपको यह सूचना देते हुए सम्मानित महसूस कर रहा हूं कि मैं सरकार गठन में सफल हो गया हूं जिसे यथाशीघ्र संसद में पेश करना चाहूंगा. राष्ट्रपति रेवेन रिवलिन ने नेतन्याहू को दो हफ्ते का विस्तारित समय दिया था. दरअसल, 28 दिनों की दी गई समय सीमा में गठबंधन करने में नाकाम रहे थे. वहीं निर्वाचित सदस्यों में अधिकांश ने अगली सरकार का नेतृत्व करने के लिए उन्हें समर्थन दिया था. नेतन्याहू की सत्तारुढ लिकुड पार्टी 17 मार्च के चुनाव में 30 सीटें जीत कर सबसे बडी पार्टी के रुप में उभरी थी.
अपने चुनाव प्रचार के दौरान उन्होंने अल्पसंख्यक अरब आबादी पर हमला बोलते हुए कहा था कि वे लोग उन्हें सत्ता से बाहर रखने के लिए मतदान कर रहे हैं. नयी सरकार में सिर्फ दक्षिणपंथी पार्टियों के शामिल होने से अमेरिका के साथ गतिरोध की आशंका है जिसने नेतन्याहू से द्विराष्ट्र के सिद्धांत के लिए ठोस प्रतिबद्धताओं की मांग की थी.
नये गठबंधन में शामिल दक्षिण पंथी पार्टियां पश्चिमी तट पर यहूदी बस्तियां बसाने में सहयोग बढाने की हिमायत करती हैं और फलस्तीन के साथ शांति कदमों का विरोध करती हैं. यह कुछ ऐसी चीज है जो अंतरराष्ट्रीय समुदाय में इस्राइल को अलग-थलग कर सकती है क्योंकि कई यूरोपीय राष्ट्रों ने फलस्तीन को मान्यता देना शुरु कर दिया है.
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