अफगानिस्तान से निकलने के बाद भारत-पाक को आतंकवाद बढ़ने का डर: अमेरिका

Updated at :31 Jul 2013 11:30 AM
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अफगानिस्तान से निकलने के बाद भारत-पाक को आतंकवाद बढ़ने का डर: अमेरिका

वाशिंगटन : अमेरिका के एक शीर्ष अधिकारी का कहना है कि भारत और पाकिस्तान दोनों को ही भय है कि युद्ध प्रभावित अफगानिस्तान से अमेरिकी सेनाओं के निकलने के बाद वहां आई अस्थिरता से दोनों देशों में आतंकवाद बढ़ सकता है.अधिकारी के अनुसार, अमेरिका का मानना है कि आने वाले वर्षों में अफगानिस्तान में भारत […]

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वाशिंगटन : अमेरिका के एक शीर्ष अधिकारी का कहना है कि भारत और पाकिस्तान दोनों को ही भय है कि युद्ध प्रभावित अफगानिस्तान से अमेरिकी सेनाओं के निकलने के बाद वहां आई अस्थिरता से दोनों देशों में आतंकवाद बढ़ सकता है.अधिकारी के अनुसार, अमेरिका का मानना है कि आने वाले वर्षों में अफगानिस्तान में भारत और पाकिस्तान अहम भूमिका निभा सकते हैं.

एशिया प्रशांत मामलों के वर्तमान उप रक्षामंत्री पीटर लेवॉय ने कहा, मुझे लगता है कि पाकिस्तान और भारत भविष्य में अफगानिस्तान में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे. लेवॉय ने कहा, ‘‘भारत को यह भय है कि अफगानिस्तान में आई कुछ अस्थिरता के बाद आतंकवाद में बढ़ोतरी हो सकती है. उसे भय है कि अस्थिरता की स्थिति पैदा होने पर ये आतंकी भला कहां जाएंगे ? क्या वे भारत को निशाना बनाएंगे ? लेवॉय ने कहा कि ऐसा ही डर पाकिस्तान में भी है.उन्होंने कहा, ये देश और अफगानिस्तान के पड़ोसी तथा आसपास के अन्य देश अफगानिस्तान में सुरक्षा स्थितियों से प्रभावित हैं.

इस क्षेत्र के देशों को एक दूसरे पर निर्भर बताते हुए लेवॉय ने कहा, दुनिया के इस भाग में सीमाएं बहुत पोरस हैं और इन देशों पर इसका प्रभाव पड़ता है. इसके बदले में वे अफगानिस्तान के सुरक्षा और राजनीतिक घटनाक्रमों को प्रभावित करते हैं.

उन्होंने कहा, आज इस पूरे क्षेत्र में असुरक्षा की भावना बढ़ रही है. यह भावना मध्य एशिया, उत्तरी हिस्से, रुस और चीन के अन्य हिस्सों में भी है. लेकिन सबसे ज्यादा असुरक्षा की भावना भारत और पाकिस्तान में है.उन्होंने कहा, पाकिस्तान अपने देश में अत्यधिक उग्रवाद का सामना कर रहा है. पश्चिमी पाकिस्तान में लगभग डेढ़ लाख सैनिक इस आतंकवाद से लड़ रहे हैं.

लेवॉय ने कहा, उन्हें चिंता है कि यदि अफगानिस्तान में आगे भी अस्थिरता बनी रहती है तो इससे आतंकवाद बढ़ सकता है और सुरक्षित पनाह लेने के लिए विद्रोही पाकिस्तान आ सकते हैं. उन्होंने कहा कि अमेरिकी कूटनीतिज्ञ इस क्षेत्र के देशों की नीतियों में परस्पर सद्भाव लाने की कोशिश कर रहे हैं ताकि अफगानिस्तान और पूरे क्षेत्र में शांति एवं स्थिरता का एक साझा लक्ष्य हासिल किया जा सके.लेवॉय ने आगे कहा कि इस क्षेत्र के देशों को आपसी संबंधों पर गौर करना होगा.

उन्होंने कहा, ये वे देश हैं जो सीधे तौर पर सबसे ज्यादा प्रभावित हैं. कश्मीर की स्थिति को हम भारत और पाकिस्तान के बीच द्विपक्षीय मामले के रुप में देखते हैं और उन्हीं को इसका समाधान करना है.लेवाय ने कहा, अफसोस है कि कश्मीर में नियंत्रण रेखा के आसपास कई दशकों से हिंसा जारी है. यह अफसोसजनक है. उन्होंने कहा कि अमेरिका का मानना है कि पाकिस्तान में प्रधानमंत्री के रुप में नवाज शरीफ का चुना जाना पाकिस्तानियों की ओर से भारत को संबंध बढ़ाने, आर्थिक स्थितियों को सामान्य करने और राजनीतिक समझदारी हासिल करने का इशारा है.लेवॉय ने कहा, अमेरिकी सरकार इन प्रयासों का समर्थन करती है.

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