एप्पल के सीइओ ने स्टीव की तीसरी पुण्यतिथि पर सहयोगियों को भेजा भावुक इ-मेल
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Published at :05 Oct 2014 4:42 PM (IST)
विज्ञापन

एप्पल के सह संस्थापक स्टीव जॉब्स की पांच अक्तूबर को तीसरी बरसी है. उनकी तीसरी पुण्यतिथि के एक दिन पूर्व एप्पल के सीइओ टिम कुक ने कंपनी के सभी कर्मियों को एक मेल भेज कर इस दुनिया को बदलने में उनके तकनीकी आविष्कारों को याद किया है. शनिवार को भेजे अपने मेल में टिम ने […]
विज्ञापन
एप्पल के सह संस्थापक स्टीव जॉब्स की पांच अक्तूबर को तीसरी बरसी है. उनकी तीसरी पुण्यतिथि के एक दिन पूर्व एप्पल के सीइओ टिम कुक ने कंपनी के सभी कर्मियों को एक मेल भेज कर इस दुनिया को बदलने में उनके तकनीकी आविष्कारों को याद किया है.
शनिवार को भेजे अपने मेल में टिम ने लिखा है – साथियों, रविवार को स्टीव की तीसरी पुण्यतिथि है. उस दिन आप में से बहुत सारे लोग उनके बारे में सोच रहे होंगे. मेरे ख्याल से आप इस दुनिया को बेहतर बनाने के लिए स्टीव के योगदानों के बारे में सोचने के लिए कुछ क्षण भी लेंगे. उन्होंने जिन उत्पादों के सपने देखे उनसे बच्चे नये तरीके से सीख रहे हैं. इस धरती के सबसे रचनात्मक लोग अपनी रचना, गीत, पॉप सांग तैयार करने के लिए उनके द्वारा तैयार उपकरणों का इस्तेमाल करते हैं. स्टीव ने जीवन में ऐसा कैनवास तैयार करने के लिए कार्य किया, जिस पर अब कलाकार खूबसूरत कृतियां बना रहे हैं. स्टीव समय के पार देखने में समर्थ थे, उन्होंने एप्पल के लिए जो मूल्य स्थापित किया उस पर ही हम हमेशा आगे बढ़ते रहेंगे. उनकी मृत्यु के बाद बहुत सारे आइडिया व प्रोजेक्ट पर काम करना हमने शुरू किया है, पर उनका प्रभाव हम उन पर व अपने आप पर साफ-साफ महसूस करते हैं. आपलोगों सप्ताहांत का मजा लें और भविष्य में स्टीव के विरासत को आगे ले जाने में अपना योगदान दें.
एप्पल के सीइओ के अपने सह कर्मियों को भेजे इस भावुक संदेश ने एक बार दुनिया का ध्यान उस महान वैज्ञानिक को ओर खींचा है, जिसने अपने आविष्कारों व सोच से 21 सदी की दुनिया को बदलने में बहुत बड़ा योगदान दिया है.
सिलिकन वैली के एक गैरेज में एप्पल कंपनी की स्थापना करने वाले स्टीव ने दुनिया का पहला पर्सनल कंप्यूटर बाजार में उतारा था. उन्होंने आइफोन, आइपैड जैसे उपकरण बनाये. 24 फरवरी 1955 में अमेरिका के कैलिफोर्निया में जन्मे जॉब्स ऐसे मां-पिता की संतान थे, जिन्होंने शादी नहीं की थी और उनकी मां पढ़ाई ही कर रही थीं. ऐसे में उनकी सामाजिक स्वीकार्यता का सवाल भी उठ खड़ा हुआ था. ऐसे में रेनहोल्ड जॉब्स व क्लॉरा जॉब्स ने उन्हें गोद ले लिया. जॉब्स जब पोर्टलैंड के रीड कॉलेज में पढ़ते थे, तो उन्हें पढ़ाई इसलिए छोड़नी पड़ी, क्योंकि उनके मां-बाप के पास पर्याप्त पैसे नहीं थे. पढ़ाई के दौरान उन्हें दोस्त के कमरे में जमीन में सोना पड़ता था. वे पढ़ाई के दिनों में पार्ट टाइम काम किया करते और गरमी की छुट्टी के दिनों में पूरे समय काम करते थे.
भारत से अटूट आध्यात्मिक लगाव रखने वाले जॉब ने जवानी के दिनों में ही बौद्ध धर्म अपना लिया और उसी समय सात महीने यहां आकर रहे थे. वे हिंदुस्तान कई प्रतिष्ठित संतों से मिले. 70 के दशक में तो ऐसे संत से मिलने भारत आये थे, जिनका पहले ही निधन हो चुका था. आध्यात्मिक शांति के लिए उन्हें भारत हमेशा आकर्षित करता था.
एप्पल के सह संस्थापक व मुख्य कार्यकारी रहे स्टीव जॉब्स पिक्सर एनीमेशन स्टूडियोज के भी सीइओ थे. वे दी वाल्ट डिज्नी कंपनी के भी निदेशक मंडल के सदस्य भी थे. अद्भुत प्रतिभा के धनी जॉब्स फिल्म टॉय स्टोरी के निर्माता भी थे. 1973 में जॉब्स ने एक टेक्नीशियन के रूप में काम प्रारंभ किया. 1976 में जॉब्स ने वोजनियाक के साथ मिलकर एप्पल कंपनी की स्थापना की. उन्होंने इस कार्य के लिए पैसों का प्रबंध भी बाहर से किया. एप्पल से इस्तीफा देने के बाद उन्होंने नेक्स्ट इंक की स्थापना की.
प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी
विज्ञापन
लेखक के बारे में
By Prabhat Khabar Digital Desk
यह प्रभात खबर का डिजिटल न्यूज डेस्क है। इसमें प्रभात खबर के डिजिटल टीम के साथियों की रूटीन खबरें प्रकाशित होती हैं।
Prabhat Khabar App :
देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए
विज्ञापन










