पत्नी मिली, वो भी तोहफ़े में!

Updated at : 20 Jun 2014 1:57 PM (IST)
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पत्नी मिली, वो भी तोहफ़े में!

दक्षिण अफ्रीका में एक अनूठा मामला सामने आया है. आरोप है कि देश के सरकारी प्रसारणकर्ता- साउथ अफ्रीका ब्रॉडकास्टिंग कॉर्पोरेशन (एसएबीसी) के प्रमुख को एक पत्नी तोहफ़े के तौर पर दी गई है. अब इस मामले की पड़ताल की जा रही है. देश के ‘जेंडर इक्वालिटी कमीशन’ का कहना है कि उसे एसएबीसी के प्रमुख […]

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दक्षिण अफ्रीका में एक अनूठा मामला सामने आया है. आरोप है कि देश के सरकारी प्रसारणकर्ता- साउथ अफ्रीका ब्रॉडकास्टिंग कॉर्पोरेशन (एसएबीसी) के प्रमुख को एक पत्नी तोहफ़े के तौर पर दी गई है. अब इस मामले की पड़ताल की जा रही है.

देश के ‘जेंडर इक्वालिटी कमीशन’ का कहना है कि उसे एसएबीसी के प्रमुख मोत्सोएनेंग के ख़िलाफ़ इस संबंध में एक शिक़ायत मिली है.

सरकार ने जहां ऐसे किसी बर्ताव पर खेद जताया है वहीं मोत्सोएनेंग ने इस बारे में कोई टिप्पणी नहीं की है.

‘माता-पिता राज़ी’

बताया जाता है कि मोत्सोएनेंग हाल के दिनों में देश के उत्तरी प्रांत लिम्पोपो के दौरे पर गए थे.

वहां मोत्सोएनेंग और एसएबीसी के अन्य अधिकारियों की मुलाक़ात उस समूह से हुई जो वेंडा भाषा में अधिक से अधिक कार्यक्रमों का प्रसारण चाहते थे.

दक्षिण अफ्रीका के अख़बार सोवेटन में छपी ख़बर के मुताबिक, वहां मोत्सोएनेंग को लगभग दस लड़कियां दिखाई गईं और उन्हें एक लड़की पसंद भी आई.

ख़बर में कहा गया है, ”सभी लड़कियां अपने माता-पिता के साथ थीं. माता-पिता जानते थे कि क्या हो रहा है और वह इसके लिए राज़ी थे.”

लड़की, गाय और बछड़ा

सोवेटन के मुताबिक़, मोत्सोएनेंग को 23 साल की एक लड़की पसंद आई जो मानव संसाधन प्रबंधन की छात्रा है.

ख़बर में यह भी कहा गया है कि मोत्सोएनेंग को लड़की के अलावा एक गाय और बछड़ा भी दिया गया.

दक्षिण अफ्रीका के महिला मंत्रालय का कहना है कि उसकी नज़र में यह सांस्कृतिक मूल्यों के दुरुपयोग का मामला है.

मंत्रालय की ओर से जारी एक बयान में कहा गया है, ”किसी महिला का तोहफ़े के तौर पर इस्तेमाल किया जाना लोकतंत्र, आज़ादी और ख़ासतौर पर महिलाओं के योगदान का अपमान है.”

एसएबीसी के प्रवक्ता ने बीबीसी को बताया कि उन्हें इस मामले में किसी तरह की जांच की कोई जानकारी नहीं है और ऐसा कोई मामला हुआ तो उसे संबंधित वेंडा भाषा समूह के साथ उठाया जाएगा.

लेकिन ‘जेंडर इक्वालिटी कमीशन’ की प्रवक्ता ने बीबीसी को बताया है कि उन सभी लोगों को पत्र भेजे गए हैं जो इस शिक़ायत में शामिल हैं और अगले महीने इस संबंध में कुछ सिफ़ारिशें की जाएंगी.

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