Guru Gobind Singh Jayanti 2022: 9 साल की उम्र में उठाई थी गुरु पद की जिम्मेदारी, पंच ककार बताए
Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 08 Jan 2022 5:49 AM
10वें सिख गुरु गोबिंद सिंह की जयंती इस साल 09 जनवरी, 2022 को मनाई जाएगी. 2022 में गुरु गोबिंद सिंह की 355वीं जयंती है, जो सिखों के दसवें गुरु, आध्यात्मिक गुरु, योद्धा, कवि और दार्शनिक थे.
गुरु गोबिंद सिंह के दिन को प्रकाश पर्व भी कहा जाता है, सिखों के नानकशाही कैलेंडर के आधार पर हर साल अलग-अलग तिथियों पर पड़ता है. पंचांग के अनुसार, गुरु गोबिंद सिंह का जन्म पौष माह, शुक्ल पक्ष, 1723 विक्रम संवत की सप्तमी तिथि को हुआ था. गुरु गोबिंद सिंह ने गुरु ग्रंथ साहिब को सिखों का गुरु घोषित करते हुए गुरु परंपरा को खत्म किया था. इसके लिए साल 1699 में उन्होंने खालसा पंथ की स्थापना की थी. सिखों के लिए ये घटना सबसे महत्वपूर्ण मानी जाती है. वहीं सिख समुदाय के लोग गुरु गोबिंद सिंह की जयंती को बड़े पर्व की तरह मनाते हैं. इस दिन को प्रकाश पर्व भी कहा जाता है.
गुरु गोबिंद सिंह का जन्म पटना के पटना साहिब नामक जगह में हुआ था. बचपन में उनका नाम गोविंद राय था. उनके पिता का नाम गुरु तेग बहादुर था. उन दिनों मुगलों का शासन था और गद्दी पर औरंगजेब बैठा था. औरंगजेब के शासन में इस्लाम को राजधर्म घोषित किया गया था. वह जबरन हिंदुओं को इस्लाम धर्म मामने के लिए मजबूर कर रहा था. औरंगजेब से प्रताड़ित लोग गुरु तेग बहादुर के पास फरियाद लेकर पहुंचे, लेकिन औरंगजेब ने दिल्ली के चांदनी चौक पर गुरु तेज बहादुर का सरेआम सिर कटवा दिया था.
पिता के निधन के समय गोबिंद की उम्र सिर्फ 9 साल थी. फिर भी उन्हें तुरंत गुरु बना दिया गया. 11 नवंबर 1675 को गुरु गोबिंद सिंह ने गुरु पद की जिम्मेदारी ली और उसके बाद से अपना पूरा जीवन लोगों की सेवा में गुजार दिया. गुरु गोबिंद ने ही गुरु प्रथा का अंत किया. उन्होंने खालसा पंथ की स्थापना की और गुरु ग्रंथ साहिब को ही सबसे बड़ा बताया. जिसके बाद सिख समुदाय गुरु ग्रंथ साहिब की पूजा करने लगे. गुरु गोबिंद बहुत ही बड़े योद्धा होने के साथ ही महान विद्धान भी थे. उन्हें संस्कृत, फारसी, पंजाबी और अरबी भाषाएं भी आती थीं. गुरु गोबिंद जी ने कई ग्रंथों की रचना की थी.
गुरु गोबिंद जी ने खालसा पंथ की स्थापना आनंदपुर साहिब में 1699 को बैसाखी के दिन की थी. उन्होंने खालसा वाणी भी दी, जिसमें ‘वाहेगुरु जी का खालसा, वाहेगुरु जी की फतेह’ कहा गया. उन्होंने पांच प्यारों को अमृत पान करवाकर खालसा बनाया और खुद भी उनके हाथों से अमृत पान किया था.
गुरु गोबिंद सिंह जी ने खालसा पंथ में जीवन के पांच सिद्धांत बताए हैं, जिन्हें पंच ककार के नाम से जाना जाता है. ये ‘क’ शब्द से शुरु होने वाले पांच सिद्धांत हैं, जिनका अनुसरण करना हर खालसा सिख के लिए अनिवार्य है. ये पांच ककार हैं- केश, कड़ा, कृपाण, कंघा और कच्छा.
धर्म, सच्चाई और सिखों की रक्षा करने वाले गुरु गोबिंद सिंह की लोकप्रियता बढ़ती ही जा रही थी शासक उनसे डरने लगे थे यही वजह थी कि औरंगजेब की मौत के बाद नवाब वजीत खां ने धोखे से गुरु गोबिंद सिंह जी की हत्या करा दी थी.
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