गढ़वा में धड़ल्ले से हो रहा कोयले का काला खेल, ट्रक चालक और बिचौलिये कर रहे लाखों रुपये की हेरफेर
Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 08 Dec 2022 10:14 AM
गढ़वा जिले में एक भी कोयला खदान नहीं है, जहां वैद्य रूप से कोयला का उत्खनन किया जाता हो, लेकिन इसके बावजूद यहां लाखो रुपये के कोयले की हेरफेर प्रतिदिन हो रही है. कोयले की हेरफेर कोयला ढोनेवाले ट्रक चालक स्थानीय लोगों के साथ मिलकर कर रहे हैं.
Garhwa News: गढ़वा जिले में कोयले का काला कारोबार काफी फलफूल रहा है. वैसे तो गढ़वा जिले में एक भी कोयला खदान नहीं है, जहां वैद्य रूप से कोयला का उत्खनन किया जाता हो, लेकिन इसके बावजूद यहां लाखो रुपये के कोयले की हेरफेर प्रतिदिन हो रही है. कोयले की हेरफेर कोयला ढोनेवाले ट्रक चालक स्थानीय लोगों के साथ मिलकर कर रहे हैं. वैद्य रूप से गढ़वा जिले में कोयले को उसके गुणवता के हिसाब से 10 से 15 हजार रूपये प्रति टन के हिसाब से बेची जाती है. लेकिन अवैध कारोबारी पांच से सात हजार रूपये टन में ही इसे उपलब्ध करा देते हैं.
जानकार बताते हैं कि एनएच-75 में गढ़वा शहर से लेकर यूपी सीमा विंढमगंज (47 किमी) के बीच प्रतिदिन कम से कम 15 से 20 लाख रूपये के कोयले ट्रकों से गायब किये जा रहे हैं. यह कारोबार रात के अंधेरों के अलावे दिन में भी हो रही है. लेकिन इसकी रोकथाम के लिये न तो कभी खनन विभाग की ओर से कोई सार्थक प्रयास किया गया और न ही पुलिस प्रशासन इसको लेकर कभी सक्रिय रही है. गढ़वा जिले में कोयले की खपत मुख्य रूप से ईंट भट्ठों एवं होटलों में होती है. कम मात्रा में कोयले का उपयोग घरेलू ईंधन के रूप में भी किया जाता है.
जानकारों के अनुसार गढ़वा जिले में प्रतिदिन एक हजार टन कोयले की खपत है. गढ़वा जिले में वर्तमान में 132 वैद्य सरकारी ईंट भट्ठे हैं. जबकि अवैध रूप से ईंट भट्ठों की संख्या भी 100 के आसपास है. बड़ी मात्रा में पीएम आवास बनाये जाने की वजह से पिछले पांच-सात सालों से जिले में वैद्य एवं अवैध दोनों प्रकार के ईंट भट्ठो की संख्या तेजी से बढ़ी है. गढ़वा जिले में झाखंड के लातेहार व चतरा जिले के मगध, आमप्राली, तेतरियाखांड़, चमातू, सिकनी के अलावे मध्यप्रदेश के निगाही, गुरबी, जयंत, यूपी के बिना, खड़िया, कंकरी, कृष्णशीला, छतीसगढ़ के दिपिका, गेवरा, महान आदि खदानों से इस रूट से कोयला ट्रकों के माध्यम से ढोये जाते हैं.
गढ़वा जिले में ट्रक चालक व कोयले के कालाबाजारी मिले हुये हैं. कालाबाजारी में मुख्य रूप से लाईन होटल, तौल कांटा घर आदि से संबंधित लोग ही संलिप्त है़ं दिन में कोयले के ग्राहकों से पैसे लेकर उनके पते एकत्र किये जाते हैं. रात में गढ़वा शहर से लेकर विंढमगंज के बीच लाईन होटल एवं तौल कांटा घर के पास ट्रक को रोका जाता है. यहां ट्रक से कोयले को उतारकर उसे पिकअप में लोड किया जाता है और फिर उसे संबंधित क्षेत्रों के लिये भेज दिया जाता है. बताया गया कि ट्रक में कोयला पहले से ही ओवरलोडेड लाया जाता है और उसे इसी क्षेत्र में खपत किया जाता है. इसके अलावे कोयले में पानी डालकर भी उसका वजन बढ़ाया जाता है. इसकी व्यवस्था भी लाईन होटल व तौलकांटा घर वाले करते हैं. ट्रक चालक तीन से चार हजार रुपये टन के हिसाब से कोयले उतारते हैं और उसे बिचौलिये छह से सात हजार रुपये टन के हिसाब से ईंट भट्ठों तक पहुंचाते हैं.
रिपोर्ट : पीयूष तिवारी, गढ़वा.
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