हक की आवाज: राज्य अल्पसंख्यक आयोग में भी मिले प्रतिनिधित्व, बुद्धिस्ट विकास बोर्ड बनाने की मांग

सिलीगुड़ी: राज्य की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी द्वारा दार्जिलिंग पर्वतीय क्षेत्र में विभिन्न जातियों के लिए विकास बोर्ड बनाने की घोषणा के बाद से और भी कई जातियों द्वारा विकास बोर्ड बनाने की मांग तेज हो गयी है. मुख्यमंत्री ममता बनर्जी द्वारा दार्जिलिंग तथा तराई में अब तक करीब 15 जातियों के लिए विकास बोर्ड बनाये […]
इसी क्रम में उत्तर बंगाल के बौद्ध धर्मावलंबियों ने भी अपने लिए अलग से बुद्धिस्ट विकास बोर्ड बनाने की मांग की है. इतना ही नहीं, इन लोगों ने पश्चिम बंगाल अल्पसंख्यक आयोग में पहाड़ तथा तराई के दो प्रतिनिधियों को भी शामिल करने की मांग राज्य सरकार से की है. आने वाले दिनों में 18 सूत्री मांगों को लेकर इन लोगों आंदोलन की भी घोषणा की है.
ऑल बंगाल बुद्धिस्ट डेवलपमेंट कमेटी के महासचिव आकाश लामा ने सिलीगुड़ी जर्नलिस्ट क्लब में एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि राज्य की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी विभिन्न जातियों के लिए विकास बोर्ड बना रही हैं. उन्हें उम्मीद है कि वह बुद्धिस्ट विकास बोर्ड का भी गठन करेंगी. मुख्मयंत्री पिछले महीने 14 तारीख को कालिम्पोंग को अलग जिला बनाने के लिए पहाड़ दौरे पर आयी थीं, तो उन्होंने बुद्ध पूर्णिमा पर सरकारी छुट्टी घोषित करने की घोषणा की. उनके इस कदम से पूरे देश के बुद्धिस्ट काफी खुश हैं. उसके बाद भी बौद्धों की अपनी कई मांगें हैं जिसको पूरा किये जाने की जरूरत है. इसके लिए राज्य तथा केन्द्र सरकार दोनों को पहल करने की आवश्यकता है. उन्होंने आगे कहा कि बौद्ध धर्मावलंबियों का सबसे बड़ा तीर्थ बोधगया है. वहां प्रशासनिक बोर्ड का गठन अब तक नहीं हुआ है. केन्द्र सरकार को इस दिशा में पहल करनी चाहिए. श्री लामा ने केन्द्र सरकार के रेल मंत्रालय से बोधगया के लिए नियमित रूप से ट्रेन चलाने की भी मांग की. श्री लामा ने आगे कहा कि पहाड़ तथा तराई में बुद्धिस्ट यूनिवर्सिटी बनाने की मांग के साथ ही और भी कई मांगें सरकार के सामने रखी गई हैं. रेल मंत्रालय से गौतम बुद्ध एक्सप्रेस ट्रेन चलाने तथा सेंट्रल मेट्रो स्टेशन का नाम गौतम बुद्ध के नाम पर करने की मांग की गई है. इसके अलावा कोलकाता में बौद्ध अनुआयी तथा भारत के संविधान निर्माता बाबा साहब डॉ भीमराव अंबेदकर के नाम पर कोई भी सड़क नहीं है. कोलकाता में उनके नाम पर एक सड़क का नाम रखने की भी मांग की गई है. उन्होंने आगे कहा कि बौद्ध धर्म में हिंसा का कोई स्थान नहीं है. साथ ही वह लोग अपनी मांगों को लेकर किसी भी प्रकार के जोर-जबरदस्ती नहीं कर सकते. वह केन्द्र और राज्य सरकार से अपनी मांगों को लेकर अपील भर सर सकते हैं. वह लोग इस महीने की 19 तारीख को कालिम्पोंग में एक रैली निकालेंगे. यह एक शांति रैली होगी. इसमें मांगों को लेकर नारे तक नहीं लगाये जायेंगे. संवाददाता सम्मेलन में संगठन के उपाध्यक्ष सोनम भुटिया, आनंद तमू तथा कोषाध्यक्ष मनोज तामांग भी उपस्थित थे.
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