नोटबंदी. लाइन में लगने के बाद भी खाली हाथ लौट रहे हैं किसान, कोऑपरेटिव बैंकों की हालत खराब

Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 23 Nov 2016 7:21 AM

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मालदा: पैसे के अभाव में मालदा जिला केन्द्रीय कॉपरेटिव बैंक की हालत काफी खराब है. आलम यह है कि इस बैंक के ग्राहक अपने बचत खाते से भी पैसे नहीं निकाल पा रहे हैं. ग्राहकों को मात्र 500 तथा 1000 रुपये ही दिये जा रहे हैं, वह भी कुछ ही ग्राहकों को. किसानों की हालत […]

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मालदा: पैसे के अभाव में मालदा जिला केन्द्रीय कॉपरेटिव बैंक की हालत काफी खराब है. आलम यह है कि इस बैंक के ग्राहक अपने बचत खाते से भी पैसे नहीं निकाल पा रहे हैं. ग्राहकों को मात्र 500 तथा 1000 रुपये ही दिये जा रहे हैं, वह भी कुछ ही ग्राहकों को. किसानों की हालत तो और भी खराब है. बैंक खाते में पैसे रहने के बाद भी खेती के लिए पैसे नहीं निकाल पा रहे हैं. अभी बोरो धान तथा आलू की खेती का मौसम है. ऐसे में किसान लाचार होकर बैठे हुए हैं.

कॉपरेटिव बैंक की ओर से साफ बता दिया गया है कि वह इस मामले में कुछ भी नहीं कर सकते. रिजर्व बैंक की ओर से पर्याप्त मात्रा में कैश उपलब्ध नहीं कराया जा रहा है. सोमवार से ही बैंक जाकर खाली हाथ लौट रहे हैं रहमान शेख नामक एक आलू किसान. 50 वर्षीय यह किसान अपनी पांच बीघा जमीन पर आलू की खेती करना चाहते हैं. इसके लिए बीज, खाद तथा अन्य सामग्रियों की खरीद के लिए 15000 रुपये चाहिए. चांचल केन्द्रीय कॉपरेटिव बैंक ने साफ कह दिया है कि उनके पास 15000 रुपये देने के लिए नहीं हैं. बैंक से लोन लेने की बात तो दूर, ऊपर से अपना ही पैसा नहीं मिलने से रहमान शेख काफी परेशान हैं. उन्होंने कहा कि यदि सात दिनों के अंदर पैसे नहीं मिले, तो आलू की खेती नहीं कर पायेंगे. आलू की बुआई का मौसम तेजी से खत्म हो रहा है. गाजल ब्लॉक के शहजादपुर गांव के रहने वाले किसान अनिल बर्मन की भी कमोबेश यही स्थिति है. उनका कहना है कि पैसे की कमी से वह धान की खेती नहीं कर पा रहे हैं. वर्तमान में बोरो धान की बुवाई का मौसम है. वह तीन बीघा जमीन पर बोरो धान की खेती करना चाहते हैं और इसके लिए उन्हें 10000 रुपये की आवश्यकता है. महाजन भी ज्यादा ब्याज लेकर भी पैसे नहीं दे पा रहे हैं. उनके पास भी पैसा नहीं है. आखिर वह भी पैसे कहां से देंगे. समय पर पैसा नहीं मिलने से किसानों को भारी नुकसान होगा. किसानों की इस परेशानी की बात को बैंक के सीईओ अमिय राय ने भी स्वीकार कर लिया है.

उन्होंने कहा है कि केन्द्र सरकार के इस निर्णय से खेती को काफी नुकसान होगा. मालदा जिले में कॉपरेटिव बैंक की 16 शाखाएं हैं. इसके अलावा 151 कृषि कॉपरेटिव समिति भी है. यह लोग किसानों से धन संग्रह कर उन्हें समय पर लोन भी देते हैं. कृषि कॉपरेटिव समिति के माध्यम से करीब 260 करोड़ रुपये का जमा होता है. 1000 तथा 500 के नोट रद्द होने के बाद से किसान इस बैंक से पैसा नहीं निकाल पा रहे हैं. बैंक कर्मचारियों के सामने भी काफी विकट स्थिति है. इन लोगों को किसानों के गुस्से का शिकार होना पड़ता है. उन्होंने आरोप लगाते हुए कि रिजर्व बैंक ने कॉपरेटिव बैंकों को एक तरह से तहस-नहस करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है. मालदा जिले में आरबीआई के निर्देश पर स्टेट बैंक तथा यूबीआई बैंक द्वारा कॉपरेटिव बैंकों को पैसे दिये जाते हैं. 11 नवंबर से ही इन दोनों बैंकों द्वारा पर्याप्त मात्रा में कैश नहीं दिये जाने की वजह से काफी समस्या हो रही है.
हर तरफ नकदी की समस्या
कैश की समस्या यहां के अन्य बैंकों की भी है. एक सरकारी बैंक के मैनेजर रविन्द्र नाथ शर्मा ने बताया है कि हालत काफी खराब है. यदि एक-दो दिनों में पैसे के अभाव में बैंक बंद हो जाये, तो इसमें आश्चर्य कुछ भी नहीं है. जिले में सरकारी बैंकों की 232 शाखाएं हैं. सभी शाखाओं में पैसे का अभाव है. उच्चाधिकारियों को इसकी जानकारी देने के बाद भी कोई लाभ नहीं हो रहा है. ग्रामीण इलाकों की हालत तो और भी खराब है. पैसे नहीं मिलेंगे तो किसान कहां से खेती करेंगे.
xहर दिन दो करोड़ रुपये की आवश्यकता
कॉपरेटिव बैंकों को अपना काम-काज चलाने के लिए प्रतिदिन दो करोड़ रुपये की आवश्यकता होती है. लेकिन पांच से दस लाख रुपये ही दिये जा रहे हैं. इससे वह लोग ग्राहकों के बचत खाते का पैसा देंगे या किसानों को लोन देंगे. कुछ समझ में नहीं आ रहा है. श्री राय ने आगे बताया कि उनके ब्रांचों में सरकारी बैंकों से भी ज्यादा बचत खाते हैं. मालदा जिले में कॉपरेटिव बैंकों में खाता धारकों की संख्या करीब एक लाख 81 हजार है. इसके अलावा 161 कॉपरेटिव समिति भी काम कर रहे हैं. यहां भी खाताधारकों की संख्या दो लाख से ऊपर है. केन्द्र सरकार किसानों को 50 हजार रुपये तक लोन देने की सिर्फ बात कर रही है. लोन तो कॉपरेटिव बैंकों को देना है. रिजर्व बैंक की ओर से कॉपरेटिव बैंकों को यदि पैसे ही नहीं मिलेंगे, तो वह लोग किसानों को कहां से पैसे देंगे.
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