छह महीने बाद भी सिलीगुड़ी में फेल है साइबर थाना

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सिलीगुड़ी़ तामझाम के साथ करीब छह महीने पहले शुरू हुआ उत्तर बंगाल का एकमात्र साइबर थाना अपने मकसद में कामयाब नहीं हो पाया है़ सिलीगुड़ी में साइबर क्राइम से निपटने के लिए इस थाने की शुरूआत हुई थी़ लेकिन आज के दिन स्थिति यह है कि जागरूकता के अभाव में साइबर अपराध से जुड़े मामले […]

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सिलीगुड़ी़ तामझाम के साथ करीब छह महीने पहले शुरू हुआ उत्तर बंगाल का एकमात्र साइबर थाना अपने मकसद में कामयाब नहीं हो पाया है़ सिलीगुड़ी में साइबर क्राइम से निपटने के लिए इस थाने की शुरूआत हुई थी़ लेकिन आज के दिन स्थिति यह है कि जागरूकता के अभाव में साइबर अपराध से जुड़े मामले ही यहां दर्ज नहीं हो रहे है़ं छह महीने से भी अधिक समय बीत जाने के बाद भी यहां अब तक करीब 30 मामले दर्ज हुए है़ं .

पुलिस सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार आम लोगों में जागरूकता की कमी की वजह से कम शिकायतें दर्ज हो रही है़ं सिर्फ इतना ही नहीं, बेहद कम मामला दर्ज होने के बाद भी पुलिस 50 प्रतिशत से अधिक मामलों का निपटारा नहीं कर पायी है़ सिलीगुड़ी के मेयर तथा पूर्व मंत्री अशोक भट्टाचार्य ने भी काफी पहले अपने खाते से रकम उड़ा लेने का एक मामला इसी साइबर थाने में दर्ज कराया था़ अब तक इस मामले की जांच की जा रही है और अशोक भट्टाचार्य बदमाशों के पकड़े जाने तथा अपने पैसे वापस पाने का इंतजार कर रहे है़ं कमोबेश अन्य मामलों की भी यही स्थिति है़ पुलिस सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार फेशबुक पर आपत्तिजनक पोस्ट करने से लेकर लॉटरी निकलने के नाम पर ठगी करने, क्रेडिट अथवा डेविट कार्ड से एटीएम पिन लेकर पैसे उड़ा देने आदि जैसे मामले की जांच साइबर क्राइम सेल द्वारा की जाती है़ उत्तर बंगाल के आठ जिलों में कहीं भी अलग से साइबर थाने की स्थापना नहीं की गई थी़ इस बीच, साइबर अपराध में लगातार वृद्धि होती गई़ सिलीगुड़ी पुलिस कमिश्नरेट के गठन होने के बाद यहां साइबर थाना बनाने का निर्णय लिया गया था़ इसी क्रम में करीब छह महीने पहले यहां साइबर थाने की शुरूआत हुई़ उत्तर बंगाल के किसी भी स्थान में साइबर अपराध से जुड़े मामले इस थाने में दर्ज कराये जा सकते है़ं कहा जाता है कि आम लोगों में जागरूकता की वजह से मामले दर्ज नहीं हो रहे है़ं:

हालांकि आरोप यह भी है कि पुलिस मामला दर्ज ही नहीं करती है़ ऐसा ही मामला सिलीगुड़ी देवीडांगा के रहने वाले शंकर कुमार का है़ शंकर कुमार का कहना है कि 11 जून 2015 को उन्होंने ठगी से संबंधित एक मामले की शिकायत सिलीगुड़ी के साइबर थाने में की थी़ उन्होंने आरोप लगाते हुए कहा कि एडपोस्टिंग का रोजगार देने के नाम पर ग्लोबल टेक इंडिया प्राइवेट लिमिटेड नामक एक कंपनी ने उनके साथ ठगी की़ उन्होंने कंपनी के कहने पर काफी दिनों तक एडपोस्टिंग का काम भी किया़ बाद में फोन कर उन्हें बताया गया कि उनके खाते में 81 हजार रुपये जमा कराये जायेंगे़ प्रोसेसिंग फीस के नाम पर 1550 रुपये की मांग की गई़ उन्होंने यह रकम कंपनी द्वारा बताये गये खाते में जमा भी करा दी़ राजीव रंजन नामक एक व्यक्ति ने फिर से इतनी ही रकम की मांग की़ तब उन्हें शक हुआ और उन्होंने और रकम जमा कराने इंकार कर दिया़ उसके बाद राजीव रंजन नामक शख्स ने उन्हें धमकी देनी शुरू कर दी़ शंकर कुमार ने आरोप लगाते हुए कहा कि पहले वह इस ठगी के मामले की शिकायत दर्ज कराने प्रधाननगर थाना गये़ वहां से उन्हें साइबर थाना भेज दिया गया़ वहां तैनात अधिकारियों ने पहले तो शिकायत दर्ज करने में आनाकानी की़ बाद में काफी भाग-दौड़ करने के बाद आवेदन लेने के लिए तैयार हो गये़ साइबर थाने को ग्लोबल टेक इंडिया प्राइवेट लिमिटेड के साथ-साथ राजीव रंजन नामक शख्स की सारी जानकारी उन्होंने साइबर थाने को उपलब्ध करा दी है़ जिस टेलीफोन नंबर से फोन कर पैसे मांगे गये, वह नंबर भी उन्होंने उपलब्ध कराया़ उसके बाद भी जांच में कोई प्रगति नहीं हुई़

क्या कहते हैं अधिकारी
इस बीच, एडीसीपी अमलान घोष का इस संबंध में कहना है कि फेसबुक तथा अन्य सोशल साइट पर आपत्तिजनक पोस्ट किये जाने के कई मामलों की जांच की गई और अपराधियों को पकड़ा भी गया है़ बैंक फ्रॉड से संबंधित जांच के मामले में थोड़ी कठिनाई आ रही है़ जिस फोन नंबर से अपराधी फोन करते हैं उसकी भी जांच की गई है़ आमतौर पर देखा जा रहा है कि अपराधी सिम तो किसी अन्य राज्य से लेते हैं , लेकिन उसका प्रयोग किसी अन्य राज्य में करते है़ इसी वजह से जांच में परेशानी होती है़ उन्होंने आगे कहा कि साइबर क्राइम से संबंधित कई मामले अभी भी थाने में दर्ज कराये जा रहे है़ं सिलीगुड़ी के अलावा अन्य स्थानों पर जो साइबर अपराध होते हैं उसके मामले संबंधित थानों में दर्ज करायी जाती है़ सिलीगुड़ी की साइबर थाना पुलिस को जांच में मदद करती है़

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