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जादुई कलम : पहले लिखें, फिर मिट्टी में रोपें, उगेगा पैधा

Updated at : 28 Jan 2020 2:16 AM (IST)
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जादुई कलम : पहले लिखें, फिर मिट्टी में रोपें, उगेगा पैधा

विशाल गोस्वामी, सिलीगुड़ी : कलम की क्रांतिकारी भूमिका से हर कोई वाकिफ है. शहर के कंचनजंघा स्टेडियम में आयोजित सरस मेले में स्वनिर्भर गोष्ठी की महिलाओं द्वारा निर्मित कलम पर्यावरण को प्रदुषण मुक्त करने में भी अपनी अहम भूमिका निभा रहा है. कागज से तैयार किये गये इस कलम में अलग-अलग प्रकार के फलों के […]

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विशाल गोस्वामी, सिलीगुड़ी : कलम की क्रांतिकारी भूमिका से हर कोई वाकिफ है. शहर के कंचनजंघा स्टेडियम में आयोजित सरस मेले में स्वनिर्भर गोष्ठी की महिलाओं द्वारा निर्मित कलम पर्यावरण को प्रदुषण मुक्त करने में भी अपनी अहम भूमिका निभा रहा है. कागज से तैयार किये गये इस कलम में अलग-अलग प्रकार के फलों के बीजों को रखा जाता है. कलम का इस्तेमाल समाप्त होने के बाद उसे कूड़े में फेंकने के बजाय मिट्टी में दबा देने पर नया पौधा तैयार होता है. इस तरह के कलम बनाने का लक्ष्य पर्यावरण को बचाना है.

सरस मेले में दक्षिण बंगाल के पुरुलिया जिले से आये आनंद धारा स्वनिर्भर गोष्ठी की महिलाओं द्वारा निर्मित यह कलम सभी के आकर्षण का केंद्र बना हुआ है. जहां एक तरफ बाजार में पांच रुपये से लेकर पांच सौ रुपये मूल्य तक के कलम उपलब्ध हैं. अधिकतर कलम प्लास्टिक से तैयार किये जाते हैं. जो बाद में किसी काम का नहीं रह जाता है. इस्तेमाल के बाद उसे कूड़े में फेंक दिया जाता है.
इससे पर्यावरण को नुकसान के सिवा कुछ हासिल नहीं होता. मगर इस स्वनिर्भर गोष्ठी महिलाओं द्वारा तैयार कागज का कलम भविष्य में पर्यावरण संरक्षण को लेकर क्रांतिकारी भूमिका निभा सकता है. इस कलम को पुरूलिया जिले से आयी आनंद धारा स्वनिर्भर गोष्ठी की दो महिलाएं सुनीता गोप मंडल तथा सुजिता मंडल सिलीगुड़ी के सरस मेले में लेकर आयी है.
दोनों महिलाएं पिछले दो वर्षों से इस काम को कर रही है. इस काम के लिए राज्य सरकार की ओर से उन्हें प्रशिक्षण देने के साथ लोन की भी व्यवस्था की जाती है. केवल वे ही नहीं, उन जैसे सैकड़ों महिलाएं इस कलम तथा इस जैसे कई सामानों को तैयार कर आर्थिक हालात को बदलने की कवायद में लगी हुई है.
मात्र 10 रुपये में मिल रही कलम
एक कलम का दाम मात्र 10 रुपये रखा गया है. सामानों के दाम, किराया व श्रमिक खर्च को जोड़ने पर एक कलम पर उन्हें तीन से चार रुपये का लाभ होता है. हाल ही मे कोलकाता में आयोजित सरस मेला में ये कलम लोगों द्वारा काफी सराहा गया था. सुनीता गोप मंडल भी चाहती है कि लोगों तक पर्यावरण के संरक्षण को लेकर इसका व्यापक प्रचार-प्रसार हो.
परिवर्तन लाने के लिए किया गया प्रयास
इस संबंध में सुनीता गोप मंडल ने बताया कि कागज की कलम से पर्यावरण संरक्षण की दिशा में परिवर्तन लाने का प्रयास किया जा रहा है. उन्होंने बताया कि हर व्यक्ति कलम का उपयोग करता है. कलम का इस्तमाल खत्म हो जाने के बाद उसे कूड़े में फेंक दिया जाता है. जिसे ध्यान में रखते हुए उन लोगों ने कलम को कागज से तैयार किया है.
उसके बाद उसमें लीड डालकर कलम के भीतर ही फलों के बीज को रखा जाता है. कलम मिट्टी के संपर्क में आने के बाद गल जायेगा. बाद में बीज पेड़ का रूप धारण कर लेगा. उन्होंने बताया कि कलम का आकार छोटा होने के कारण वे इसमें बड़े बीज नहीं डाल सकते.
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