सिलीगुड़ी : शुरू हो गयी है ई-कार्ड से निमंत्रण की परंपरा

Updated at : 13 Feb 2019 1:42 AM (IST)
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सिलीगुड़ी :  शुरू हो गयी है ई-कार्ड से निमंत्रण की परंपरा

सिलीगुड़ी : देर से ही निमंत्रण पत्र व्हाट्सएप से आने की शुरुआत हो चुकी है. निश्चित रूप से पर्यावरण की दृष्टि से यह एक बहुत ही नेक एवं सराहनीय कदम है. इससे से दिखावे में आकर अनाप-शनाप खर्च में भी कमी आयेगी. शादी, सालगिरह, जन्मदिन, 25वी वर्षगांठ, 50वी वर्षगांठ आदि अवसरों पर निमंत्रण कार्ड की […]

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सिलीगुड़ी : देर से ही निमंत्रण पत्र व्हाट्सएप से आने की शुरुआत हो चुकी है. निश्चित रूप से पर्यावरण की दृष्टि से यह एक बहुत ही नेक एवं सराहनीय कदम है. इससे से दिखावे में आकर अनाप-शनाप खर्च में भी कमी आयेगी. शादी, सालगिरह, जन्मदिन, 25वी वर्षगांठ, 50वी वर्षगांठ आदि अवसरों पर निमंत्रण कार्ड की साइज और वजन लगातार बढ़ने लगे हैं.
शादी या अन्य अवसरों पर मिलने वाले इन अनगिनत कार्डों को निपटाना भी एक समस्या है. यह बातें सिलीगुड़ी के प्रमुख समाजसेवी और चिंतक अशोक अग्रवाल ने कही. वह हमारे संवाददाता से विशेष बातचीत कर रहे थे. उन्होंने कहा कि कई बार तो देवी देवताओं के चित्रों से भरपूर यह कार्ड कूड़े के ढेर में देखने को मिलते हैं .
इसके अलावा काफी लोग इन कार्डों को थैले में डालकर महानंदा नदी में विसर्जन करते हुए देखे जाते है, जो पर्यावरण की दृष्टि से कदापि सही नहीं है. सूचना एवं तकनीक के इस युग में व्हाट्सएप जैसे माध्यमों से निमंत्रण पत्रों का भेजना समाज में एक क्रांतिकारी कदम है. वे सभी लोग बधाई के पात्र है, जिन्होंने यह कदम उठाने का साहस दिखाया.
श्री अग्रवाल ने व्हाट्सएप से निमंत्रण कार्ड भेजने को लेकर कई महत्वपूर्ण सुझाव भी दिये. उन्होंने कहा निमंत्रण का इ-कार्ड किसी भी व्हाट्सएप ग्रुप में पोस्ट न करें. अनजाने में आप उस ग्रुप के सैकड़ो लोगो को निमंत्रण दे चुके होते हैं. जबकि आप चाहते होंगे किसी एक व्यक्ति विशेष को निमंत्रण करना. जिनको आप निमंत्रण देना चाहते हैं उनके व्यक्तिगत नंबर पर मैसेज भेजें.
इसके साथ ही व्हाट्सएप से इ-कार्ड भेजकर फोन पर निमंत्रण देना आवश्यक है. परम्परागत तरीके से आये हुए कार्ड सामने दिखते हैं, हमे समारोह की तारीख याद रहती है. जबकि मोबाइल में आये हुए कार्ड की तारीख भूल जाना स्वाभाविक है. इतना ही नहीं शुभ अवसर के एक- दो दिन पहले फिर से याद दिलाने के लिए मैसेज भेजना जरुरी है. श्री अग्रवाल ने आगे कहा कि इस बदलाव के दौर में समाज के बुजुर्ग लोगों को मानसिक रूप से इन इ-कार्ड को अपनाने में थोड़ा वक़्त लग सकता है.
अभी भी काफी मेहमान, विशेष रुप से बुजुर्ग स्मार्टफोन व्यवहार नहीं करते है एवं कई बार उन्हें यह निमंत्रण नहीं मिल पाता. जबकि शादी जैसे समारोहों में विशेष रुप से बुजुर्गों का ही शामिल होना जरुरी है. इस पक्ष को ध्यान में रखते हुए ऐसे निमंत्रण बुजुर्गों के परिवार के दूसरे सदस्यों के नंबर में भेजकर फोन करने की आवश्यकता है.
आखिर में एक मैसेज जोड़ा जा सकता है कि समाज सुधार कार्यक्रम के तहत यह निमंत्रण मैं व्हाट्सएप्प के जरिये इ-कार्ड के माध्यम से भेज रहा हूं. कृपया इसे मेरे व्यक्तिगत निमंत्रण के रूप में स्वीकार करें.
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