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पश्चिम बंगाल के नौ पर्वतारोहियों ने पीर पंजाल रेंज में गुप्त पर्वत को किया फतह

Updated at : 25 Jun 2024 11:51 PM (IST)
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पश्चिम बंगाल के नौ पर्वतारोहियों ने पीर पंजाल रेंज में गुप्त पर्वत को किया फतह

पश्चिम बंगाल के नौ पर्वतारोहियों की एक टीम ने मंगलवार को हिमाचल प्रदेश के लाहौल और स्पीति जिले के पीर पंजाल रेंज में 5,988 मीटर की ऊंचाई पर स्थित एक चोटी ‘गुप्त पर्वत’ को फतह किया. इस चोटी पर इससे पहले कोई भी पर्वतारोही पहुंचने में सफल नहीं हुआ था. पर्वतारोहण टीम के क्लब ने यह जानकारी दी. पर्वतारोहियों ने बताया कि इस पर्वत का नाम इसकी विशिष्ट भौगोलिक स्थिति के कारण पड़ा है. यह चोटी हिमालय पर्वतमाला की अन्य चोटियों के बीच अदृश्य है, जिसके कारण इसकी तस्वीर लेना भी लगभग असंभव है.

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कोलकाता.

पश्चिम बंगाल के नौ पर्वतारोहियों की एक टीम ने मंगलवार को हिमाचल प्रदेश के लाहौल और स्पीति जिले के पीर पंजाल रेंज में 5,988 मीटर की ऊंचाई पर स्थित एक चोटी ‘गुप्त पर्वत’ को फतह किया. इस चोटी पर इससे पहले कोई भी पर्वतारोही पहुंचने में सफल नहीं हुआ था. पर्वतारोहण टीम के क्लब ने यह जानकारी दी. पर्वतारोहियों ने बताया कि इस पर्वत का नाम इसकी विशिष्ट भौगोलिक स्थिति के कारण पड़ा है. यह चोटी हिमालय पर्वतमाला की अन्य चोटियों के बीच अदृश्य है, जिसके कारण इसकी तस्वीर लेना भी लगभग असंभव है.

कोलकाता के दक्षिण में बाहरी इलाके सोनारपुर में स्थित पर्वतारोहियों के क्लब सोनारपुर आरोही द्वारा संचालित तथा पर्वतारोही रुद्र प्रसाद हाल्दार के नेतृत्व में टीम लगभग आठ घंटे की चढ़ाई के बाद सुबह करीब 8.45 बजे गुप्त पर्वत की चोटी पर पहुंची. इस टीम में विश्व के सबसे युवा पर्वतारोही और प्रत्येक महाद्वीप की सात चोटियों और सात ज्वालामुखी चोटियों पर चढ़ने वाले भारत के पहले शख्स सत्यरूप सिद्धांत शामिल थे. इसमें एक महिला सदस्य दीपश्री पॉल भी शामिल थीं. यह टीम तीन जून को कोलकाता से माउंट शिकार बेह (6,200 मीटर) और गुप्त पर्वत की चोटी पर चढ़ने के दोहरे लक्ष्य के साथ रवाना हुई थी. लेकिन पता चला कि जब पर्वतारोही चोटी पर जाने के लिए रास्ता बनाने में सफल हो गये, तभी हिमस्खलन के कारण महत्वपूर्ण चढ़ाई उपकरण नष्ट हो गये, जिसके कारण उन्हें शिखर पर चढ़ने की उम्मीद छोड़नी पड़ी. इसके बाद टीम ने गुप्त पर्वत को फतह करने पर ध्यान केंद्रित किया.

पर्वतारोहण सहायता दल के सदस्य दीपांजन दास ने बताया : टीम ने 5,285 मीटर की ऊंचाई पर शिविर स्थापित किया और पर्वत के पश्चिमी हिस्से के माध्यम से चोटी तक पहुंचने की योजना बनायी. पिछले तीन दिन से लगातार बर्फबारी के कारण पर्वतारोही चोटी तक पहुंचने के लिए समय का इंतजार कर रहे थे. आखिरकार उन्होंने 25 जून को तड़के एक बजे शिखर पर चढ़ने की योजना बनायी. अंतिम सूचना मिलने तक, पर्वतारोही सफलतापूर्वक शिविर तक उतर चुके थे और आगे शिविर-एक की ओर जाने की योजना बना रहे थे.

सत्यरूप की मां गायत्री सिद्धांता (70) ने कहा : इसमें कोई संदेह नहीं है कि मैं आज उन सबकी उपलब्धि से खुश हूं. लेकिन उससे भी अधिक, मुझे इस बात से बहुत राहत मिली है कि चोटियों पर कई मुश्किलों का सामना करने के बावजूद टीम के सभी सदस्य सुरक्षित हैं. क्लब की वेबसाइट पर बताया गया है कि सोनारपुर आरोही क्लब के सदस्यों की उपलब्धियों में माउंट एवरेस्ट पर उसके उत्तर और दक्षिण दोनों तरफ से चढ़ाई, पूर्वी भारत में माउंट कंचनजंघा पर चढ़ाई से लेकर पश्चिमी क्षेत्र में कच्छ के रण, ट्रांस-हिमालयी साइकिलिंग अभियान और अफ्रीका में माउंट किलिमंजारो की चोटी तक साइकिलिंग अभियान शामिल हैं.

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