नातिन की जान बचाने के लिए तेंदुए से भिड़ गयी 60 वर्षीय नानी, आदमखोर से एक घंटे तक चला देविका शेरपा का संघर्ष

Author Ashish Jha
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अस्पताल में भर्ती देविका शेरपा

Leopard attack: दार्जिलिंग की देविका की बहादुरी ने सबको हैरान कर दिया है. पूरे मामले पर देविका का कहना है कि उसने कहा- अगर मैं पीछे हटती या आगे बढ़ती, तो तेंदुआ मुझे मार देता.

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कोलकाता से अमित शर्मा की रिपोर्ट

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Leopard attack: दार्जिलिंग के लोअर भूटिया बस्ती इलाके से एक बेहद रोमांचक और साहसिक घटना सामने आयी है. यहां 60 वर्ष से अधिक उम्र की देविका शेरपा ने अपनी जान की परवाह किये बिना लगभग एक घंटे तक एक खूंखार तेंदुए से अकेले मुकाबला किया और अपनी पांच साल की नातिन तथा पालतू कुत्ते की जान बचा ली. इस संघर्ष में देविका गंभीर रूप से घायल हो गयीं. उनके सिर और शरीर के कई हिस्सों में गहरे घाव हुए हैं. फिलहाल उनका इलाज सिलीगुड़ी के एक निजी अस्पताल में चल रहा है.

अचानक घर में दिखा तेंदुआ

अस्पताल के बिस्तर पर लेटी देविका ने उस खौफनाक मंजर को याद करते हुए बताया कि तेंदुआ अचानक उनके घर में घुस आया और उनकी नातिन तथा पालतू कुत्ते पर हमला कर दिया. उस समय देविका घर की दूसरी मंजिल पर थीं. शोर सुनकर वह तुरंत नीचे आयीं. जैसे ही उन्होंने हालात संभालने की कोशिश की, तेंदुए ने उन पर झपट्टा मार दिया.

संघर्ष लगभग एक घंटे तक चलता रहा

देविका ने बताया- अगर मैं पीछे हटती या आगे बढ़ती, तो तेंदुआ मुझे मार देता. मैंने सोचा अगर मरना ही है, तो लड़ते हुए मरूंगी. नीचे मेरी छोटी नातिन थी, उसे बचाना ही था. इसके बाद देविका ने कमरे में रखी एक लाठी उठा ली. तेंदुआ जब-जब उन पर हमला करने के लिए झपटा, देविका पूरी ताकत से उस पर वार करती रहीं. इंसान और जंगली जानवर के बीच यह संघर्ष लगभग एक घंटे तक चलता रहा.

लंबे संघर्ष ने दोनों को थका दिया

देविका ने कहा- लगातार लड़ते-लड़ते मैं पूरी तरह थक गयी थी. आखिर में हाथ उठाने की ताकत भी नहीं बची थी. लेकिन लगातार लाठी की मार खाने के बाद तेंदुआ भी कमजोर पड़ गया और उसके अंदर छलांग लगाने की ताकत नहीं रही. इस जानलेवा संघर्ष में देविका ने न केवल खुद को बचाया, बल्कि अपने परिवार को भी सुरक्षित रखा. हालांकि इस घटना के बाद उन्होंने वन विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाये.

वन विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर उठाये सवाल

देविका ने वन विभाग पर नाराजगी जताते हुए कहा- अगर कोई इंसान जंगली जानवर को चोट पहुंचाये, तो वन विभाग तुरंत सख्त कार्रवाई करता है. लेकिन जब यही हिंसक जानवर आबादी में घुसकर इंसानों की जान खतरे में डालते हैं, तब आम लोगों की सुरक्षा के लिए क्या किया जाता है? उन्होंने बताया कि पहाड़ी इलाके में तेंदुओं का आतंक नया नहीं है. पहले भी तेंदुआ बस्ती और मेरे घर के आंगन तक आ चुका है. मेरा बकरी फार्म था, उसे भी तेंदुए ने खत्म कर दिया. मैंने कई बार वन विभाग में शिकायत की, लेकिन स्थायी समाधान नहीं मिला.

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जल्दबाजी में रेस्क्यू करना खतरनाक

देविका ने मांग की है कि इलाके के लोगों की सुरक्षा के लिए तेंदुए को जल्द पिंजरे में बंद कर कहीं और ले जाया जाये. वन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि तेंदुआ इस समय बेहद आक्रामक और उत्तेजित अवस्था में है. ऐसे में उसे तुरंत पकड़ने की कोशिश करना जोखिम भरा हो सकता है. अधिकारी मानते हैं कि यदि जल्दबाजी में रेस्क्यू किया गया, तो तेंदुआ बचाव दल पर हमला कर सकता है या फिर किसी दूसरे रिहायशी इलाके में भाग सकता है. इसलिए सही अवसर मिलते ही सुरक्षित तरीके से उसे पकड़ा जायेगा. बहरहाल देविका शेरपा की बहादुरी ने पूरे दार्जिलिंग में चर्चा छेड़ दी है. लोग उनकी हिम्मत को सलाम कर रहे हैं.

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