वामो के चेयरमैन विमान बसु ने राज्य सरकार को घेरा, कहा उद्योगों के लिए माहौल नहीं

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कोलकाता: सूचना-प्रौद्योगिकी क्षेत्र की प्रमुख कंपनी इन्फोसिस की ओर से राजारहाट में प्रस्तावित सॉफ्टवेयर विकास केंद्र को सेज का दरजा दिये जाने या जमीन के लिए जमा की गयी अग्रिम राशि लौटाने की मांग को लेकर काफी हलचल बनी हुई है. इन्फोसिस के एक वरिष्ठ अधिकारी का कहना है कि पूर्व वाम मोरचा सरकार ने […]

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कोलकाता: सूचना-प्रौद्योगिकी क्षेत्र की प्रमुख कंपनी इन्फोसिस की ओर से राजारहाट में प्रस्तावित सॉफ्टवेयर विकास केंद्र को सेज का दरजा दिये जाने या जमीन के लिए जमा की गयी अग्रिम राशि लौटाने की मांग को लेकर काफी हलचल बनी हुई है. इन्फोसिस के एक वरिष्ठ अधिकारी का कहना है कि पूर्व वाम मोरचा सरकार ने कंपनी से वायदा किया था कि वह इस परियोजना को सेज का दरजा देगी.

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परियोजना के तहत करीब 15,000 रोजगार सृजन होते, लेकिन मौजूदा तृणमूल सरकार ने अभी तक प्रस्तावित योजना को सेज का दरजा नहीं दिया है. इस मसले को लेकर वाम मोरचा की ओर से तृणमूल सरकार की औद्योगिक नीतियों को लेकर एक बार फिर कई सवाल खड़े किये गये हैं.

राज्य में वाम मोरचा के चेयरमैन विमान बसु ने आरोप लगाया कि तृणमूल सरकार की नीतियों की वजह से राज्य में औद्योगिक विकास का माहौल नहीं रह गया है. उद्योगपतियों को लुभाने के लिए विदेश यात्र की जा रही है, लेकिन राज्य के मौजूदा उद्योग के विकास और प्रस्तावित कई परियोजनाओं को लागू करने पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है.
श्री बसु ने आरोप लगाया कि भाजपा नीत केंद्र सरकार और तृणमूल कांग्रेस नीत राज्य सरकार की नीतियों में ज्यादा फर्क नहीं है. उद्योग-धंधों के विकास के नाम पर केवल विदेश यात्र को ही तरजीह दी जा रही है. कथित तौर पर विगत वर्ष सिंगापुर दौरे के दौरान मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने जल्द कई विकासमूलक योजनाएं शुरू किये जाने व राज्य में निवेश की बात कही गयी थी. वाम मोरचा ने उस घोषणा के तहत राज्य में विकास मूलक कितने कार्य हुए उसकी जानकारी राज्य सरकार को दिये जाने की मांग की है.
बांग्लादेश के साथ भूमि सीमा समझौता को लेकर तृणमूल सरकार द्वारा समर्थन जताने पर वाम मोरचा की प्रतिक्रिया के रूप में श्री बसु ने कहा कि यह तो नयी बात नहीं है. प्रधानमंत्री व मुख्यमंत्री के बीच पहले भी बातचीत हो गयी है. अब दोनों पक्षों की ओर धीरे-धीरे सकारात्मक रवैया दिखायी देने लगा है. आरोप के मुताबिक भाजपा व तृणमूल का गुप्त समझौते की संभावना बरकरार है.
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