कोलकाता : वाममोर्चा व कांग्रेस ने सर्वदलीय बैठक का किया बायकॉट
Updated at : 01 Feb 2019 2:52 AM (IST)
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कोलकाता : राज्यपाल केशरीनाथ त्रिपाठी शुक्रवार को अपराह्न एक बजे विधानसभा में अभिभाषण देंगे, जबकि विरोधी दल कांग्रेस व वाममोर्चा ने अभिभाषण के दौरान विरोध प्रदर्शन करने की घोषणा की है. गुरुवार को विधानसभा में अध्यक्ष बिमान बनर्जी के कक्ष में सर्वदलीय बैठक और सदन की कार्यनिर्वाही समिति की बैठक हुई. बैठक कांग्रेस व वाममोर्चा […]
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कोलकाता : राज्यपाल केशरीनाथ त्रिपाठी शुक्रवार को अपराह्न एक बजे विधानसभा में अभिभाषण देंगे, जबकि विरोधी दल कांग्रेस व वाममोर्चा ने अभिभाषण के दौरान विरोध प्रदर्शन करने की घोषणा की है. गुरुवार को विधानसभा में अध्यक्ष बिमान बनर्जी के कक्ष में सर्वदलीय बैठक और सदन की कार्यनिर्वाही समिति की बैठक हुई. बैठक कांग्रेस व वाममोर्चा के विधायकों ने बायकॉट किया, जबकि विरोधी दल में भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष दिलीप घोष ने हिस्सा लिया.
बैठक के बाद संसदीय मंत्री पार्थ चटर्जी ने कहा कि राज्यपाल दोपहर एक बजे अभिभाषण देंगे. उसके बाद धन्यवाद ज्ञापन होगा और शोक प्रस्ताव के बाद विधानसभा की कार्यवाही चार फरवरी तक के लिए स्थगित कर दी जायेगी.
विधानसभा का बजट सत्र एक फरवरी से शुरू होकर पांच फरवरी तक मात्र छह दिनों तक चलेगा. राज्यपाल के अभिभाषण पर बहस विधानसभा के अगले सत्र में होगी. उन्होंने कहा कि विधानसभा के नियम 19(2) के तहत इसका प्रावधान है और इसके पहले भी 1977, 1982 तथा 2004 में राज्यपाल के अभिभाषण पर बाद में चर्चा हुई थी.
उन्होंने कहा कि यह चुनावी वर्ष है. लोकसभा चुनाव प्रस्तावित है. विधायक अपने क्षेत्र में रहेंगे. ऐस कारण यह फैसला किया गया है. विधानसभा की कार्यवाही का बहिष्कार करने की विपक्ष की धमकी पर श्री चटर्जी ने कहा कि वह विरोधी दल के नेताओं से अपील करते हैं कि वे कार्यवाही में हिस्सा लें और विधानसभा का अधिक से अधिक इस्तेमाल करें.
नहीं सुनी जाती है िवरोधियों की बात : मन्नान
वाममोर्चा व कांग्रेस ने सर्वदलीय बैठक और विधानसभा कार्यनिर्वाही समिति की बैठक का बहिष्कार किया और राज्यपाल के अभिभाषण के दौरान विरोध प्रदर्शन करने की धमकी दी. इसके साथ ही साफ कर दिया कि शुक्रवार को राज्यपाल के अभिभाषण में हिस्सा लेंगे, लेकिन अगली विधानसभा की कार्यवाही में हिस्सा लेंगे या नहीं.
इसका फैसला बाद में लेंगे. विधानसभा में विपक्ष के नेता अब्दुल मन्नान ने कहा कि विधानसभा के इतिहास में बजट सत्र इतने कम दिनों का कभी नहीं रहा. न तो विरोधी दल के विधायकों का कोई सुझाव सुना जाता है और न ही उनके प्रस्ताव पर विचार किया जाता है. ऐसी स्थिति में केवल मूक दर्शक बनने और सरकार की हां में हां मिलाने के लिए वे लोग विधानसभा की कार्यवाही में क्यों हिस्सा लेंगे? उन्होंने कहा कि इसके पहले सरकार के खिलाफ और विधानसभा अध्यक्ष के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाया गया था.
आरंभिक स्वीकृति के बाद भी उस पर चर्चा नहीं हुई. उन्होंने कहा कि इस सत्र के दौरान न तो प्रश्नकाल होगा, न ही उल्लेख काल होगा और न ही स्थगन प्रस्ताव पेश किया जायेगा, तो फिर इस सत्र में हिस्सा लेने का क्या मतलब है. जब वे लोग अपने मुद्दे ही नहीं उठा पायेंगे, तो फिर सदन की कार्यवाही में क्यों हिस्सा लेंगे.
श्री मन्नान ने कहा कि राज्यपाल के अभिभाषण के दौरान विपक्ष के विधायक राज्यपाल को प्रजातांत्रिक तरीके अपनी समस्याएं बतायेंगे और पूछेंगे कि उनकी सरकार में क्या विरोधियों का कोई अधिकार नहीं है, लेकिन उन्होंने साफ कर दिया कि यह विरोध प्रदर्शन पूरी तरह से संसदीय नियमों के अनुकूल होगा. दूसरी ओर, माकपा विधायक दल के नेता सुजन चक्रवर्ती ने कहा कि दिल्ली में मोदी और बंगाल में ममता बनर्जी की सरकार का एक ही रवैया है.
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