जुवेनाइल जस्टिस पर चार हफ्ते में रिपोर्ट तलब

Updated at : 02 Jul 2018 4:11 AM (IST)
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जुवेनाइल जस्टिस पर चार हफ्ते में रिपोर्ट तलब

कोलकाता : सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के तहत जूवेनाइल जस्टिस कानून का पालन सही तरीके से हो रहा है या नहीं, यह जानने के लिए केंद्र व राज्य सरकार के पास चार हफ्ते के भीतर हलफनामे की सूरत में स्टेटस रिपोर्ट कलकत्ता हाइकोर्ट ने तलब की है. साथ ही अदालत के सहयोग के लिए एक […]

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कोलकाता : सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के तहत जूवेनाइल जस्टिस कानून का पालन सही तरीके से हो रहा है या नहीं, यह जानने के लिए केंद्र व राज्य सरकार के पास चार हफ्ते के भीतर हलफनामे की सूरत में स्टेटस रिपोर्ट कलकत्ता हाइकोर्ट ने तलब की है. साथ ही अदालत के सहयोग के लिए एक वकील को बतौर एमिकस क्यूरी के तौर पर मुख्य न्यायाधीश ज्योतिर्मय भट्टाचार्य व न्यायाधीश अरिजीत बंद्योपाध्याय की खंडपीठ ने नियुक्त किया है.
उल्लेखनीय है कि देश भर में जूवेनाइल जस्टिस कानन व शिशु व महिला कल्याण की दिशा में काम न होने का आरोप लगाते हुए सोशल साइंस की छात्रा तथा समाजसेविका संपूर्णा बेहुरा ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी. सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश मदन बी लकूर व न्यायाधीश दीपक गुप्तe की खंडपीठ में मामले की सुुनवाई में उन्होंने कहा कि जूवेनाइल जस्टिस कानन तथा शिशु व महिला अधिकार व रक्षा कानून के तहत सरकारी व निजी होम में आधारभूत ढांचा बिल्कुल नहीं है. बच्चों को दत्तक लेने के मामले में भी नियमों को पालन नहीं किया जा रहा है. उनका यह भी कहना था कि इस संबंध में चाइल्ड वेलफेयर कमेटी की महत्वपूर्ण भूमिका होती है, लेकिन वह भी इस संबंध में लापरवाह हैैं. वह भी उचित नियम के तहत काम नहीं कर रहे हैं.
जिससे देश भर में महिला व शिशुओं की तस्करी के मामले में बढ़ोत्तरी हो रही है. सुप्रीम कोर्ट के मुताबिक इस संबंध में राज्यों की महत्वपूर्ण भूमिका है. लिहाजा सभी राज्यों के हाइकोर्ट इस संबंध में स्वत: संज्ञान लेते हुए मामला दायर करने का निर्देश दें. कलकत्ता हाइकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश ज्योतिर्मय भट्टाचार्य व न्यायाधीश अरिजीत बंद्योपाध्याय की खंडपीठ में मामले की सुनवाई में केंद्र की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल कौशिक चंद व सुष्मिता साहा दत्त ने कहा कि केंद्र की ओर से इसबीच राज्य के महिला व शिशु कल्याण विभाग से राज्यों के होम की स्थिति व वहां के नियमों के पालन के संबंध में विस्तृत तथ्य मांगे गये हैं. उनसे तथ्य मिलने पर वह अदालत में पेश किये जायेंगे. उनका यह भी कहना था कि इस बाबत केंद्र की ओर से पहले ही कदम उठाया गया है.
केंद्र के शिशु व महिला कल्याण मंत्रालय की ओर से नेशनल पुलिस अकादमी, राज्य सरकार, केंद्रीय एडप्शन रिसोर्स ऑथोरिटी, नेशनल कमीशन फॉर प्रोटेक्शन ऑफ चाइल्ड राइट को पत्र भेजा गया है. राज्य की ओर से एडवोकेट जनरल किशोर दत्त ने मामले की अगली सुनवाई में रिपोर्ट देने की बात कही. दोनों पक्षों के वक्तव्य को सुने के बाद खंडपीठ ने चार हफ्ते के भीतर हलफनामे की सूरत में स्टेटस रिपोर्ट जमा देने का निर्देश दिया है. साथ ही अदालत का सहयोग करने के लिए वकील शमीम अहमद को एमिकस क्यूरी के तौर पर नियुक्त किया गया है.
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