सामने आया मानव तस्करी का भयावह रूप, छह साल से लापता है बालिका सावित्री असुर
Author :Prabhat Khabar Digital Desk
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Updated at :18 Oct 2017 8:58 AM
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कालचीनी: महिला व मानव तस्करी के गढ़ कालचीनी में तमाम कोशिशों के बावजूद मानव तस्करी जारी है. यहां तक कि कई बार इसकी थाने में शिकायत भी दर्ज नहीं होती है. यहां के जरूरतमंद परिवार की महिलाओं को पंजाब, कश्मीर, दिल्ली सहित देश के विभिन्न स्थानों में अच्छा काम दिलाने का लालच देकर भेज दिया […]
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कालचीनी: महिला व मानव तस्करी के गढ़ कालचीनी में तमाम कोशिशों के बावजूद मानव तस्करी जारी है. यहां तक कि कई बार इसकी थाने में शिकायत भी दर्ज नहीं होती है. यहां के जरूरतमंद परिवार की महिलाओं को पंजाब, कश्मीर, दिल्ली सहित देश के विभिन्न स्थानों में अच्छा काम दिलाने का लालच देकर भेज दिया जाता है. इसके बाद वर्षों तक उनका कोई अता-पता नहीं मिल पाता है. ऐसी ही एक घटना कालचीनी ब्लॉक के गरम बस्ती निवासी लुगास असुर की बेटी सावित्री असुर के साथ घटी है.
सावित्री छह सालों पहले जनवरी 2012 में पास के मुहल्ले छोटा गरम बस्ती की महिला मीना मुंडा के घर पर काम करने ले जायी गयी. उस समय उसकी उम्र महज 11 साल थी. सावित्री की मां मुनी असुर जब कुछ दिनों बाद बेटी को देखने वहां पहुंचीं तो पाया की उस घर में उसकी बेटी नहीं है.
मुनी असुर को बताया गया कि उसकी बेटी को एक रिश्तेदार के यहां भेजा गया है, वह जल्द ही लौट आयेगी. इसके फिर एक साल बाद मुनी असुर बेटी से मिलने गयी. तब भी सावित्री वहां नहीं मिली. उनलोगों ने बताया की सावित्री दिल्ली में काम करने गई है. इसके बाद मुनी असुर तीन बार मीना मुंडा के साथ दिल्ली तक बेटी से मिलने गयी, लेकिन कभी मुलाकात नहीं हो पाई.
इधर, इतने साल बीत जाने के बाद भी थाने में मामले की शिकायत दर्ज नहीं हुई थी. मंगलवार को स्वयंसेवी संगठन कृपा के सदस्यों की मदद से लुगास असुर व मुनी असुर ने कालचीनी थाने में अपनी बेटी की गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज करवाई. ‘कृपा’ के अध्यक्ष विनय नार्जीनारी ने बताया की कालचीनी ब्लॉक एवं संपूर्ण डुआर्स में महिला तस्करी भयावह आकार धारण करता जा रहा है. लेकिन थाने में इसकी जानकारी तक नहीं दी जाती है. यह समाज के लिए कलंक है, इसे खत्म किया जाना चाहिए.
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