बिजली के दाम घटाने की तैयारी, यूपी-एमपी साथ आए, 10 हजार करोड़ का निवेश, बदलेंगे बिजली के नियम

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₹10,000 करोड़ से बदलेगा पावर ग्रिड, यूपी-एमपी की संयुक्त पहल

UP News: उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश ने बिजली की मौसमी जरूरतों को पूरा करने के लिए एक महत्वपूर्ण समझौता किया है. दोनों राज्य 2000 मेगावाट बिजली की संयुक्त खरीद करेंगे, जिससे ₹10,000 करोड़ के निवेश की संभावना है और उपभोक्ताओं को सस्ती बिजली मिल सकती है.

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UP News: उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश ने बिजली की मौसमी जरूरत को पूरा करने के लिए पहली बार आपसी सहयोग की दिशा में बड़ा कदम उठाया है. दोनों राज्यों ने 2000 मेगावाट बिजली खरीदने के लिए एमओयू पर हस्ताक्षर किए हैं. इस व्यवस्था से बिजली की उपलब्धता बेहतर होने के साथ खरीद की लागत घटाने में मदद मिलने की उम्मीद है. साथ ही नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में करीब 10 हजार करोड़ रुपये के निवेश की संभावना जताई गई है.

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जब एमपी को रबी में ज्यादा बिजली चाहिए, यूपी को गर्मियों में

दोनों राज्यों में बिजली की मांग अलग-अलग समय पर बढ़ती है. मध्य प्रदेश में अक्टूबर से मार्च तक रबी सीजन के दौरान कृषि क्षेत्र में बिजली की जरूरत ज्यादा रहती है. वहीं उत्तर प्रदेश में अप्रैल से सितंबर तक गर्मी और खरीफ सीजन के कारण बिजली की मांग बढ़ जाती है. इसी अंतर का फायदा उठाते हुए दोनों राज्यों ने बिजली की संयुक्त खरीद और इस्तेमाल की व्यवस्था तैयार करने पर सहमति बनाई है.

पांच साल की फर्म पावर बैंकिंग व्यवस्था पर भी जोर

एमओयू के तहत करीब पांच साल के लिए फर्म पावर बैंकिंग व्यवस्था विकसित करने की दिशा में भी दोनों राज्य आगे बढ़ेंगे. इसका मतलब यह होगा कि जिस समय किसी एक राज्य के पास अतिरिक्त बिजली उपलब्ध होगी, उसे दूसरे राज्य की जरूरत के समय इस्तेमाल किया जा सकेगा. इससे दोनों राज्यों की उपलब्ध बिजली उत्पादन क्षमता का ज्यादा प्रभावी इस्तेमाल हो सकेगा.

अप्रैल से सितंबर तक यूपी को मिलेगी बिजली

समझौते के मुताबिक मध्य प्रदेश को अक्टूबर से मार्च तक रबी सीजन में दिन के समय बिजली उपलब्ध होगी. इसके बदले उत्तर प्रदेश को अप्रैल से सितंबर तक गर्मी और खरीफ सीजन के दौरान ज्यादा बिजली मिल सकेगी. इस व्यवस्था से खासकर उस समय बिजली उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी, जब मांग का दबाव ज्यादा रहता है.

पीक आवर्स में कटौती से राहत की उम्मीद

पावर कारपोरेशन प्रबंधन को उम्मीद है कि अगले साल भीषण गर्मी के दौरान शाम से रात तक के पीक आवर्स में बिजली की उपलब्धता बेहतर रहेगी. इससे प्रदेशवासियों को इस दौरान बिजली कटौती की समस्या से कम जूझना पड़ सकता है. साथ ही पीक आवर्स में पावर एक्सचेंज से महंगी बिजली खरीदने की निर्भरता भी कम होने की उम्मीद है.

2000 मेगावाट पीक पावर की होगी खरीद

एमओयू के तहत दोनों राज्य प्रतिस्पर्धी बिडिंग प्रक्रिया के जरिए 2000 मेगावाट पीक पावर क्षमता खरीदने की प्रक्रिया शुरू करेंगे. इससे बिजली की जरूरत के मुताबिक आपूर्ति सुनिश्चित करने की कोशिश की जाएगी. अधिकारियों के मुताबिक इस व्यवस्था से उपलब्ध संसाधनों का बेहतर इस्तेमाल होगा और बिजली खरीद की लागत कम करने में मदद मिल सकती है.

10 हजार करोड़ के निवेश की संभावना

दो हजार मेगावाट बिजली खरीद की इस व्यवस्था से बिजली और नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में करीब 10,000 करोड़ रुपये के निवेश की संभावना है. इससे स्वच्छ ऊर्जा के विकास को गति मिलने के साथ रोजगार के नए अवसर भी पैदा होने की उम्मीद है.

शक्ति भवन में हुआ एमओयू पर हस्ताक्षर

लखनऊ के शक्ति भवन में यूपी और मध्य प्रदेश के अधिकारियों की मौजूदगी में समझौते पर हस्ताक्षर किए गए. यूपी की ओर से अपर मुख्य सचिव ऊर्जा एवं पावर कारपोरेशन के अध्यक्ष आशीष कुमार गोयल, प्रबंध निदेशक नितीश कुमार और निदेशक कॉरपोरेट प्लानिंग दीपक रायजादा मौजूद रहे. मध्य प्रदेश की ओर से सचिव विशेष गरपाले, मध्य प्रदेश पावर मैनेजमेंट कंपनी लिमिटेड के मुख्य महाप्रबंधक (गैर-पारंपरिक ऊर्जा) जीएस खनूजा और यूपी पावर कारपोरेशन के मुख्य अभियंता मनीष द्विवेदी ने एमओयू की प्रक्रिया पूरी की.

महाराष्ट्र समेत दूसरे राज्यों से भी बिजली खरीद पर नजर

आशीष कुमार गोयल के मुताबिक दोनों राज्यों की अलग-अलग समय पर बढ़ने वाली बिजली की मांग को देखते हुए यह व्यवस्था उपलब्ध उत्पादन क्षमता का बेहतर इस्तेमाल करने में मदद करेगी. इससे संसाधनों का सही उपयोग होगा और बिजली खरीद की लागत घटाने का रास्ता खुलेगा. पावर कारपोरेशन प्रबंधन मध्य प्रदेश की तरह महाराष्ट्र सहित दूसरे राज्यों के साथ भी मिलकर बिजली खरीदने के प्रस्ताव पर गंभीरता से विचार कर रहा है.

10 रुपये यूनिट तक की महंगी बिजली से बचने की कोशिश

कारपोरेशन प्रबंधन का मानना है कि इस व्यवस्था से जरूरत के समय 10 रुपये प्रति यूनिट तक की महंगी बिजली खरीदने की जरूरत कम होगी. इसका सीधा फायदा दोनों प्रदेशों के उपभोक्ताओं को अपेक्षाकृत सस्ती बिजली के रूप में मिलने की उम्मीद है. इस तरह यूपी और एमपी की यह साझेदारी सिर्फ बिजली की कमी पूरी करने तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि बिजली लागत घटाने, नवीकरणीय ऊर्जा में निवेश बढ़ाने और दोनों राज्यों के संसाधनों का बेहतर इस्तेमाल करने की दिशा में भी अहम कदम मानी जा रही है.

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